रूस ने भारत से कुछ इस तरह निभाई दोस्ती , सुरक्षा UNSC में 6 बार भारत के लिए लगाया ‘वीटो पावर ‘ , अमेरिका करता रहा विरोध

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युक्रेन और रूस के बीच का युद्ध तो जगजाहिर है . रूस के युक्रेन के ऊपर हमले को लेकर ज्यादातर देशों ने रूस पर नए – नए प्रतिबन्ध लगा दिए और रूस के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद यानि UNSC में निंदा प्रस्ताव भी लाया गया . इस प्रस्ताव में रूस के खिलाफ कई देशों ने मतदान दिया लेकिन भारत ने इसमें हिस्सा लेने से ही साफ़ मना कर दिया . भारत ने इस निंदा प्रस्ताव से खुद को दूर रखा . भारत के ऐसा करने पर कई देशों ने भारत की आलोचना भी की . लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि भारत का ये फैसला ऐसी भारत ने हवा में नहीं लिया बल्कि भारत ने कहीं न कहीं इतिहास में जाकर इसके ऊपर विचार किया और तब ये फैसला लिया . भले ही अन्य देशों को ये बात खटकी हो लेकिन भारत का ये कदम सराहनीय था . आपको बता दें कि जब एक समय रूस सोवियत संघ हुआ करता था तब रूस ने भारत के लिए बहुत कुछ किया वो हमेशा भारत के साथ खड़ा रहा . UNSC में रूस ने हमेशा अपने वीटो पवार का इस्तेमाल कर भारत का साथ दिया . रूस 1957 से हमेशा भारत के साथ रहा है उसने भारत के लिए एक नहीं दो नहीं बल्कि छह बार अपने ‘वीटो पावर’ का इस्तेमाल कर भारत के खिलाफ लाए गए प्रस्तावों को रोक दिया . चलिए आपको बताते हैं UNSC में कब – कब भारत का हाथ थामे खड़ा रहा रूस –

(1 )कश्मीर मुद्दे पर बना कवच -20 फरवरी 1957

जब भारत को सन 1947 में आजादी मिली थी तब कश्मीर ने अपनी अलग रियासत बना स्वतंत्र रहने का फैसला लिया था . तब कुछ ही दिनों में पाकिस्तानियों ने कबायलियों के भेष में कश्मीर में घुसकर वहा हमला कर दिया था और तब कश्मीर के नेताओं की तरफ से भारत से मदद मांगी गयी . तब भारत ने कश्मीरी नेताओं से अधिग्रहण दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा और बोला अगर आप इस पर हामी भरेंगे तभी हम आपकी मदद करेंगे . भारत ने कश्मीर की मदद की भी लेकिन तब के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने इस मामले को संयुक्त राष्ट्र ले जाकर सबसे बड़ी गलती की . नेहरु इस मामले को संयुक्तराष्ट्र में ले गये और इसे उनकी सबसे बड़ी गलती माना जाता है . भारत ने नेहरु की इस गलती की सजा भुगती . 1957 में 20 फरवरी को अमेरिका ,ऑस्ट्रेलिया ,क्यूबा और यूके द्वारा एक प्रस्ताव लाया गया जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् के अध्यक्ष से मांग की गयी कि भारत और पाकिस्तान से बात करके इस मुद्दे को सुलझाया जाए . इसके लिए जो सुझाव दिया गया वो ये था कि दोनों देश अपनी – अपनी सेनाओं को उस विवादित जगह से वापस बुलाने के लिए मना लें . इतना ही नहीं एक दूसरा प्रस्ताव रखा की संयुक्त राष्ट्र कश्मीर में अपनी सेना तैनात करे . इस प्रस्ताव के लिए अमेरिका ,फ्रान्स ,ऑस्ट्रेलिया ,चीन , कोलंबिया, क्यूबा , इराक , फिलिपींस और यूके ने अपना समर्थन जताया . यही समय था जब सोवियत संघ ने भारत के खिलाफ आए इस प्रस्ताव को अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर रोक दिया .

(2 ) गोवा, दमन और द्वीप पर बचाव – 18 दिसंबर 1961

हुआ कुछ यूं था कि अमेरिका , फ़्रांस तुर्की और यूके द्वारा सुरक्षा परिषद् में भारत के खिलाफ एक प्रस्ताव लाया गया जिसमें गोवा , दमन द्वीप पर भारत की तरफ से सैन्य बालों के इस्तेमाल करने पर परेशानी जताई गयी . जिसके बाद भारत सरकार से सैन्य बालों को को वहां से हटाने की बात की गयी . इस समय सोवियत संघ ,सिलोन (श्री लंका ) , लाइबेरिया और युएई ने भारत के खिलाफ इस प्रस्ताव में भारत का साथ दिया . वही भारत का विरोध करने वाले देशों में शामिल थे अमेरिका ,चीली , चीन , फ्रांस , इक्वाडोर ,तुर्की और यूके . जब इस बहस और चर्चा हो रही थी तब UN में सोवियत के एम्बेसडर वेलेरियन जोरिन ने कहा कि ,’ पुर्तगाल का बचाव करने वाले संयुक्त राष्ट्र का हिट नहीं बल्कि उपनिवेशवाद का पक्ष ले रहे हैं जो 20वीं सदी का सबसे शर्मनाक फैसला है . जबकि वो देश दर्जनों बार विपरीत कदम उठा चुके हैं .

(3 ) फिर किया कश्मीर पर बचाव – 22 जून 1962

एक बार फिर अमेरिका को समर्थन देते हुए आयरलैंड ने सुरक्षा परिषद् में प्रस्ताव रख दिया . जिसमें भारत और पाकिस्तान की सरकार से कश्मीर मुद्दे को सुलझाने की मांग की गयी . दोनों देशों यानि भारत और पाकिस्तान से कहा गया की बातचीत वाला माहौल बनाया जाए ताकि बात करके इस पर कोई फैसला लिया जा सके . इस बार फिर से सोवियत संघ ने अपना वीटो पॉवर लगा दिया प्रस्ताव के खिलाफ और रोमनिया ने भी प्रस्ताव के विरोध में वोट किया और भारत का साथ दिया . जबकि चीन , चीली , फ्रांस , आयरलैंड ,यूके , वेनेजुएला और अमेरिका ने प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया .

(4 ) पाकिस्तान सीमा पर युद्धविराम – 4 दिसंबर 1971

एक बार फिर से अमेरिका के नेतृत्व में एक और प्रस्ताव लाया गया . इसके द्वारा भारत पाकिस्तान सीमा पर युद्धविराम लागू करने के लिए बोला गया . और फिर यहाँ इस प्रस्ताव के खिलाफ रूस ने वीटो पावर लगा कर इसे रोक दिया . उस समय अटल बिहारी वाजपेयी ने रूस के वीटो पावर का खुल कर स्वागत किया और कहा ,’ मौजूदा संकट में जो साथ देगा ,वह हमारा दोस्त है | विचारधारा की लड़ाई बाद में लड़ ली जाएगी .’ और साथ ही इस प्रस्ताव के समर्थन में रहने वाले देश थे बुरुंडी , चीन , इटली , जापान ,अमेरिका ,अर्जेंटीना , बेल्जियम , निकारागुआ ,सियरा लियोन ,सीरिया और सोमालिया .

(5 ) शरणार्थियों के मामले पर – 5 दिसंबर 1971

ये पांचवी बार था जब रूस ने भारत के साथ अपनी दोस्ती निभाई . इटली , जापान ,अमेरिका ,अर्जेंटीना , बेल्जियम , निकारागुआ ,सियरा लियोन ,सीरिया और सोमालिया ने भारत – पाकिस्तान सीमा पर युद्धविराम लागू करने का प्रस्ताव रखा था . ताकि जो शरणार्थी हैं उनकी वापसी हो पाए . यहां रूस ने भारत का साथ देते हुए पांचवी बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया . अमेरिका ने प्रस्ताव रखने वाले देशो का साथ दिया वही पोलैंड ने प्रस्ताव के विरोध में वोट किया .

(6 ) सैन्य वापसी की मांग पर – 14 दिसंबर 1971

इस बार अमेरिका के बनाए गए इस प्रस्ताव में भारत और पाकिस्तान की सरकारों को अपनी सेनाओं को वापस अपने – अपने इलाके में बुलाने के लिए बोला गया . यहाँ फिर रूस ने वीटो पावर लगा दिया पोलैंड ने इस प्रस्ताव के विरोध में वोट डाला और फ़्रांस और यूके ने वोटिंग से दूरी बना ली .

Adarsh Sharma
Adarsh Sharma
Chief Editor - The Chaupal Email - Adarsh@thechaupal.com

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