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जिसे लोगों ने कभी कह कर चिढ़ाया काला,आज उसी ने मचा रखा है क्रिकेट जगत में रौला

लहरों से डर कर नौका कभी पार नहीं होती ,कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती । इस कविता की लाइन इस शख़्सियत पर खूब बैठती है । कुछ लोग अपनी ज़िंदगी के संघर्षों से परेशान होकर हार मानने लगते है और अपना सपना अपना गोल भूल जाते क्यूँकि वो ज़िंदगी द्वारा दी जा रही चुनौतियों का सामना नहीं कर पाते और उन्ही में से कुछ लोग ऐसे होते है जो ज़िंदगी की इन चुनौतियों को अपनी ताक़त बना आगे बढ़ते रहते है और अगर इन कुछ लोगों में अगर क्रिकेट जगत के दमदार खिलाड़ी हार्दिक पण्ड्या का नाम ले तो इसमे कोई बुराई नहीं होगी।

आपको बता दें हार्दिक पण्ड्या एक शो ‘ व्हाट द डक ‘ में गये थे । जहा उन्होंने अपनी ज़िंदगी के संघर्ष की वो कहानी बतायी जो हम लोगों से छुपी थी । हार्दिक पण्ड्या टीम इंडिया के उन दमदार खिलाड़ियों में से है जिनकी बोलिंग और बैटिंग के सामने टिक पाना मुश्किल है । हार्दिक पण्ड्या ने ‘ व्हाट द डक’ शो में बताया की जब में अंडर 19 में था । तब मुझे मैगी बहुत पसंद थी और में रोज़ मैगी खाता था । लेकिन मैगी खाना मेरी मजबूरी भी थी । क्यूँकि उस टाइम अपनी डाइट को अच्छे से लेने के लिए पैसे नहीं हुआ करते थे। परिवार आर्थिक तंगी से गुजर रहा था। घर की हालत बहुत ख़राब थी। इसलिए में सुबह शाम मैगी ही खाता था। मैच के बाद भी घर जाकर और मैच से पहले में मैगी ही खा कर रहता था।

उन्होंने बताया की मेरे पिता घर में आमदनी का एक ही ज़रिया थे। उन्हें और उनके भाई ने बड़ौदा क्रिकेट टीम से किट उधार ली थी। हार्दिक पण्ड्या के भाई ने एक और कहानी का ज़िक्र किया बचपन में कोई भी हार्दिक के काले रंग पर कुछ बोलता था या बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे तब उनकी माँ उनसे लड़ने लगती थी मेरा बेटा कला नहीं है। और माँ को बोलता था आप लड़ क्यों रहे है अगर वो कला है और लोग उसे ऐसा बोल रहे है तो इसमें क्या बुराई है ? जिस हार्दिक पण्ड्या के पास एक टाइम खाने का खाना नहीं था पहनने के लिए कपड़े नहीं थे आज वही हार्दिक पण्ड्या अपने टैलेंट के दम पर ब्रांड ख़रीदने का दम रखता बल्कि वो आज खुद ही एक ब्रांड बन चुका है।

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