क्या आपको वो किस्सा पता है जब भारत की जनता ने सचिन, सहवाग, गांगूली और धोनी को “terrorist” घोषित कर दिया था ?

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क्या आपको वो किस्सा पता है जब देश की जनता ने सचिन, सहवाग, गांगूली और धोनी को “terrorist” घोषित कर दिया था। जी हां यह सच बात है कि जनता नें इन सभी खिलाड़ियो को “terrorist” के रुप में देखने लगी थी। तो आज हम आपको इस दिलचस्प कहानी में यही सुनाएंगे की देश जनता ने ऐसा क्यों किया था। आपको बताएं कि भारतीय क्रिकेट टीम के लिए वह सबसे बुरा दौर कहो या फिर काला दिन कहिए आप। काला दिन सुनने के बाद आप लोगों के भी दिमाग में क्रिकेट के कई किस्से आ रहे होगें जैसे क्रिकेट के भगवान सचिन का क्रिकेट को अलविदा कहने वाला दिन चाहे धोनी का 2019 विश्व कप में रन आउट होना या फिर जी हां यह सभी किस्से भी बेहद शानदार मगर आज मै जो कहानी सुनाउंगा, वो शायद आपको बेहद शानदार और दिलचस्प लगे,क्योंकि यह घटना भारतीय क्रिकेट टीम के लिए काला दिन कहो या सबसे बुरा दिन बन गया था 

Pic Credit : Google

बात साल 2007 के 50-50 विश्व कप कि है यह टूर्नामेंट वेस्ट इंडीज में खेला जा रहा था भारत एक मजबूत टीम के साथ इस टूर्नामेंट को खेलने पहुंची थी। मगर वहां के मैदान पर पहुंचते ही टीम का पुरा रुख ही बदल गया और भारत 2007 विश्व कप जीतने में कामयाब नहीं हो सका। तो आज हम इस किस्से में विश्व कप का जिक्र करते हुए उस घटना को बताएंगे जो भारत के लिए सबसे बुरा दिन था 

अगर आपने कभी सचिन, गांगूली, द्रविण और धोनी के इंटरव्यू देखे होंगे औऱ उनसे यह सावल किया गया हो कि .. आपके लिए क्रिकेट जगत का सबसे बुरा दिन कौन सा रहा तो देखा होगा आपने कि सबने एक ही जवाब दिया होगा कि 2007 के विश्व कप से बाहर होना

धोनी की आई मूवी द अनटॉल्ड स्टोरी” के प्रोमोशन में भी धोनी ने इस दौर के घटना का जिक्र किया था और बताया था कि  हमने इस मूवी में साल 2007 के 50-50 विश्व कप के बारे में कोई जिक्र नहीं किया है क्यों मै नहीं चाहता कि देश एक बार फिर से उस दौर से रूबरू हो और मै भी उस दौर को फिर से नहीं देखता चाहता था। लेकिन इसके अलांवा धोनी ने बड़ा खुलासा भी किया था जो हम आपको इस कहानी में आगे बताएंगे। 

2007 के 50-50 विश्व कप से पहले ऐसा नहीं था कि भारतीय टीम कोई कमजोर टीम थी द्रविड़ की कप्तानी में भारत का रिकॉर्ड भी बेहद शानदार था और टीम में एक से एक धुरंधर थे। बल्लेबाजी में सचिन, सेहवाग, द्रविड़ और धोनी से लेकर ऑलराउंडर में गांगूली और युवराज से लेकर गेदबाजी में जहीर, अगरकर, कुंबले और भज्जी तक टीम मे थे । 

भारत को जितनी उम्मीद साल 2003 के विश्व कप में नहीं थी उससे कहीं ज्यादा 2007 के विश्व कप में थी. बात 17 मार्च 2007 की है इस दिन को भारत बंग्लादेश के साथ विश्व कप का मैच खेला जाना था आपको बता दें कि उस टूर्नामेंट में बंग्लादेश सबसे कमजोर टीम थी लेकिन उस टीम के खिलाड़ियों ने जो करिश्मा दिखा की भारतीय टीम की आंखें खुल गई और भारतीय टीम को करारी हार मिली, जिसे देख करोड़ो भारतीय देशवासियों की आखें नम हो गई। उस मैच में सहवाग धोनी बिना खाता खोले शून्य पर पवेलियन लौट गए तो वहीं सचिन, द्रविड़ 7 और 14 पर अपना विकेट गवां दिए इस मैच में भारत का कोई बल्लेबाज बंग्लादेश की गेंदबाजी के सामने मैदान पर टीक नही पाया। 

वहीं फिर भारत को अब अगला मैच बरमुडा के साथ खेलना था, इस मैच में बरमूडा ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया था, इस मैच में भारत के बल्लेबाजों ने बरमूडा के गेंदबाजों की कमर तोड़ दी थी,भारत ने 50 ओवर में 5 विकेट पर 413 रन बनाए थे लेकिन इसके जवाब में बरमूडा की टीम 43.1 ओवर में 156 रन पर ऑल आउट हो गई थी जो कि भारत यह मैच जीतकर टूर्नामेंट में वापसी कर लिया था । 

मगर अब बारी थी करो या मरो कि क्योंकि भारत को यह मुकाबला किसी भी हाल में श्रीलंका से जीतना ही था उस मैच में भारत 254 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए मात्र 185 रनों पर ही ऑल आउट हो गया। जहां एक बार भारत का कोई बल्लेबाज मैदान पर टिक नहीं सका और भारत यह मैच 69 रनों से हार गया और विश्व कप से बाहर हो गया। अब देखों भारत को जैसा खेलना था खेल चुका था लेकिन अभी जनता का असली खेल बाकि था जब एक साथ कई करोड़ों दिल टूटते हैं तो क्या होता हैं दुनियां ने उस दिन देखा था।

अगले ही दिन एक चौंका देने वाली खबर आती है कि रांची में 200 लोगों नें मिलकर धोनी के मकान पर हमला कर दिया. दिवारे तोड़ दिया, घर के पिलर को तोड़ दिए गए, वही घर जो धोनी नें अपनी मेहनत से तैयार किया था यहां तक की धोनी के पुतले जलाए गए डाई धोनी के नारे लगाए गए वहीं यह सब देखकर द्रविड़ के घर भी रातों रात सेक्योरिटी बढ़ा दी गई, क्योंकि जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर था. अहमदाबाद से लेकर कोलकाता तक सचिन, सेहवाग,धोनी, द्रविड़ की अर्थियां निकाली गई पुतले जलाए गए. क्योंकि 2007 में सोशल मीडिया उतना नहीं था कि लोग खिलाड़ियों को ट्रोल कर सकें और गाली दे सकें। इसलिए उनके पास सड़क पर ऊतरने के अलावां कोई और चारा नहीं हुआ करता था।

आपको शायद इतना ही सुनकर ऐसा लग रहा होगा कि यार सच में इतना कुछ हुआ था तो अभी सब्र करिये हमने तो कुछ अभी बताया ही नहीं हैं लेकिन असली कहानी तो अब बताने वाला हुं।अभी तक मैने जो भी कहानी बताया वो भारत में चल रही थी लेकिन आपको बता दें कि एक कहानी तो भारतीय टीम के ड्रेसिंग रुम में भी चल रही थी। उस समय में भारतीय टीम के मौजूदा कोच Greg Chappell ने तो अपनी सीट को संभालने से ही हाथ खड़ा कर दिया और अपने देश को निकल लिए। वो जानते थे कि भारत की जनता उनसे इतने गुस्से में थी कि सारा गुस्सा उनके ऊपर ही फोड़ देती।

लेकिन अब बात आती है भारतीय खिलाड़ियों कि जो वेस्टइंडिज में मौजूद थे इस समय उन्हें ये नहीं समझ आ रहा था कि उनके ना होने पर उनके घर में इतने हमले हो रहें हैं और अगर वो भारत आएंगे तो फिर जनता उनके साथ क्या करेगी। पहली बार ऐसा हो रहा था कि प्लेयर ये सोचने पर मजबूर हो गए थे कि कहीं हमने क्रिकेट में अपना करियर बनाकर कोई गलती तो नहीं कर दी. देखों यहां पर एक बात यह भी समझना जरुरी है कि जो लोगों का 2007 में क्रिकेट के प्रति इमोशन थे वो आज के मुकाबले हजारों गुना ज्यादा थे। क्योंकि केबल का इतना ज्यादा माहौल था नहीं और बहुत कम ही लोगों के घरों में टी.वी हुआ करती थी। यह मैच भी केवल दूरदर्शन पर ही आता था इसलिए लोग मन लगा कर पूरा मैच देखा करते थे इसलिए यह केवल उन लोगों के लिए खेल ही नहीं इमोशन भी हुआ करता था

आपको बता दें कि इसलिए जब करोडों लोगो का दिल टूटा तो फूट फूट कर गुस्सा सामने आया और देश के हर कोने-कोने में क्रोध का रुप बस देखने को मिल रहा था। अगर आप गैरी कस्टन का एक बयान पढ़ेंगे तो उन्होने बताया था कि जब वो 2008 के आस पास कोच बने थे तो सचिन ने उन्हें बताया कि उस विश्व कप के तुरंत बाद उन्होने संन्यास लेने के प्लान कर लिया था उन्होंने सोचा कि शायद मेरे क्रिकेट छोड़ने से लोगों की भावनाएं शांत हो जाए.

अगर आप लोगों को याद हों साल 2011 विश्व कप में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले मुनाफ पटेल भी 2007 विश्व कप में टीम के एक अहम पार्ट थे क्या आपको पता है कि वही एक प्लेयर थे जिनको भारत वापस लौटने में कोई डर नहीं था और वही एक रीजन भी थे जो लोगों में हिम्मत बने हुए थे और लोग घर वापसी के लिए सोचने लगे, तो वहीं सचिन ने एक इंटरव्यू के दौरान बताया था कि जब हम सब प्लेयर डरे हुए थे कि घर कैसे जाएंगे, लोग इंडिया में कैसे रिएक्ट करेंगे और उन्होंने मुनाफ पटेल से यह पूछा कि तुम्हे डर नहीं लग रहा घर वापस जाने में तब मुनाफ पटेल ने एक सीधा जवाब दिया था वो मै आपको बताता हूं मुनाफ पटेल बोले पाजी मै जहां रहा हुं वहा 8 हजार लोग रहे हैं और वो लोग मेरे सिक्योरिटी हैं मुनाफ की बात नें ड्रेसिंग रुम के माहौल को एक बार फिर थोड़ा शांत किया और टीम ने फिर से हिम्मत जुटाई देश वापस लौटने कि, सचिन ने मुनाफ से यह भी कहा था अगर दिक्कत ज्यादा हुई तो सारे खिलाड़ी तेरें वहां ही आएंगे।

लेकिन जब भारतीय खिलाड़ी भारत वापस लौटे तो फिर क्या हुआ धोनी ने खुद अपनी मूवी के लॉन्च में बताया था जिसकी बात हमने वीडियो के शुरुआत में ही किया था। और धोनी ने बताया था कि जब हम लोगो का दिल्ली एयरपोर्ट पर आए तब एयरपोर्ट के बाहर ही पुलिस का मेला गल चुका था और वो हम लोगो को सुरक्षित ले जाने के लिए तैयार थे। और वहीं हमे मीडिया की गाड़िया भी बड़े बड़े कैमरों के साथ पीछा कर रही थी। और तब हमें ऐसा लग रहा था कि मानो हम कोई टैरेरिस्ट हैं या हमने कोई बड़ा मर्डर कर दिया है। हमें लगातार कुछ ऐसे चेज किया गया और हम लोगो को कुछ घंटों पुलिस स्टेशन में ही बिताना पड़ा। और फिर कार में घर को निकल पाए।

आपने पढ़ा इस कहानी को मगर कोई पॉजिटीव एंगल नहीं मिला होगा फिर भारत ने उसी साल कुछ ही महीनो बाद टी20 विश्व कप जीतकर सारे गम को खुशियों में बदल दिया था जिन लोगों के घर तोड़े थे वहीं लोग फूलों की बारिश कर रहे थे। मगर वो वक्त दूसरा था और जिन लोंगो ने देखा होगा वही उस वक्त को समझा होगा।और उस वक्त मेरी भी उम्र महज 12 साल थी और आज भी वो दिन मेरे दिमाग में आता है तो रोगटे खड़े हो जाते है। क्योकि उस समय लोग भूख प्यास सब त्याग कर केवल मैच ही मैच का रट लगाते थे और वो लोग क्रिकेट को दिल और जान से ज्यादा प्यार देते थे।  

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