छत्तीसगढ़ में गोबर से बनी चप्पलों का मार्केट में बोल -बाला , ख़ासियत ऐसी की ख़रीदने पर हो जाएँगे मजबूर

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जब भी इंसानो की ज़रूरतें आजकल की टेक्नॉलोजी पूरी नही कर पाती । तब इंसान की ज़रूरत पूरी करने में कारगर साबित होता है पुराने समय की टेक्नॉलोजी । जी हाँ ! एक बार फिर ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है छत्तीस गढ़ की राजधानी रायपुर में । आपको बता दें छत्तीसगढ़ की गोबर की चप्पल ने सबका ध्यान अपनी और खींच लिया है । लोगों को ये खूब भा रही है आज कल की टेक्नोलोजी ने से भले ही बीपी , शुगर के मरीज़ों को पूरा आराम या फ़ायदा न दे पायी हो लेकिन इस चप्पल ने बीपी और शुगर के मरीज़ों को बहुत फयदा पहुँचाया है और उनकी तकलीफ़ कम की है।

चलिए इस चप्पल को बनाने वाले व्यक्ति के बारे में कुछ बता दें , इस शुभ कार्य की शुरुआत करने वाले है गोकुल नगर के पशुपालक रितेश अग्रवाल। इन्होंने तो गोबर की चप्पल बना कर लोगों को अचंभित ही कर डाला। आख़िर ऐसा क्या हुआ की रितेश ने ये कदम उठाया? बात कुछ यूँ है की रितेश अग्रवाल प्लास्टिक उपयोग के विरोधी है। उनका कहना है की प्लास्टिक का उपयोग पूरी दुनिया में बढ़ता ही जा रहा है। और इससे पर्यावरण के साथ गौवंश को भारी नुक़सान हो रहा है। उन्होंने बताया की प्लास्टिक खाकर कितनी गाय और जंतु बीमार हो जाते है और कितने गाय ,गौवंश को जान गवानी पड़ती है।

आगे चप्पल की ख़ासियत बताते हुए रितेश अग्रवाल बोलते है उनकी १ दर्जन चप्पल बिक चुकी हैं। एक जोड़ी चप्पल की किमत 400 रुपए जैव। ये चप्पल गौ भक्तों , बीपी और शुगर के मरीज़ों के ट्राइयल के लिए बनायी गयी थी। रितेश ने इन्हें मरीज़ों को रोज़ पहन कर टाइम नोट करने को बोला और इससे सच में मरीज़ों को फ़ायदा हुआ।

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