लॉकडाउन की वजह से अब तक 8 लाख मजदूर लौट चुके उत्तर प्रदेश, उन्हें रोजगार देने के लिए एक्शन में आई योगी सरकार

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लॉकडाउन की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी प्रवासी मजदूरों को हुई. वो मजदूर जिन्होंने अपने गाँव घरों को छोड़ कर बड़े बड़े महानगरों को अपनी मेहनत से संवारा, जब मुसीबत आई तो राय सरकारों ने उन्हें बेसहारा छोड़ दिया. हालाँकि दावे बहुत किये गए. राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने कहा कि वो मजदूरों का पूरा ख्याल रखेंगे. लेकिन सच्चाई क्या रही वो पूरे देश ने देखा. मजबूर हो कर केंद्र सरकार को स्पेशल ट्रेन चलानी पड़ी मजदूरों को उनके घरों तक पहुँचाने के लिए. पराये शहर में मजदूरों ने आपदा के वक़्त जो कुछ झेला उससे उम्मीद तो कम ही है कि वो वापस फिर उन शहरों की तरफ रुख कर सकें जिन शहरों ने मुसीबत में उन्हें बेसहारा छोड़ दिया था.

अकेले उत्तर प्रदेश में पिछले 3 दिनों में विभिन्न राज्यों से स्पेशल ट्रेनों के जरिये अब तक 8 लाख मजदूर वापस लौट चुके हैं. इन मजदूरों ने मजबूरी में ही अपने घरों को छोड़ा था और मजबूरी में ही ये वापस आ रहे हैं. आने वाले दिनों में कई और मजदूर वापस पहुंचेंगे. इसके अलावा विदेशों में फंसे प्रवासी श्रमिकों को भी आज शारजाह से लेकर लखनऊ पहली फ्लाइट पहुंचेगी. अब इन मजदूरों को उत्तर प्रदेश में ही रोजगार देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लेबर रिफॉर्म कानून ले कर आ रहे हैं.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को टीम-11 के साथ मीटिंग की. सीएम योगी ने मीटिंग में मजदूरों की सुरक्षित वापसी के साथ ही लेबर रिफॉर्म कानून के जरिए गांवों व कस्बों में ही रोजगार देने की योजना बनाई. उन्होंने अपनी टीम को आदेश दिया कि वापस लौटने वाले मौजूरों को फिलहाल तो क्वारनटीन सेंटर भेजा जाए और वहीँ पर उन्हें स्वास्थ्य और भोजन की व्यवस्था की जाए. साथ ही उन्होंने अपनी टीम को आदेश दिया है कि इन मजदूरों की स्कीलिंग डाटा तैयार की जाए ताकि क्वारनटीन पीरियड ख़त्म होते ही इन मजदूरों के रोजगार की व्यवस्था की जा सके. इन मजदूरों के लिए रोजगार की व्यवस्था मनरेगा, ईंट भट्ठों के अलावा चीनी मिलों और एमएसएमई सेक्टरों में भी की जा रही है.

लेबर रिफोर्म क़ानून में हर श्रमिक को रोजगार के साथ ही न्यूनतम 15 हजार रुपये वेतन की गारंटी, उसके काम के घंटों की गारंटी, सुरक्षा की गारंटी की व्यवस्था है. महिला कामगारों के लिए महिला सुरक्षा कानून के तहत सुरक्षा की गारंटी है.

कोरोना के वैश्विक महामारी बनने के बाद करीब 1000 कम्पनियाँ चीन से निकलने की कोशिश कर रही है और भारत ने उन कंपनियों के लिए रेड कारपेट बिछा दिया है. उत्तर प्रदेश में नोएडा और ग्रेटर नोएडा सबसे बड़े औद्योगिक केंद्र है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा पहले से ही इलेक्ट्रोनिक कंपनियों का गढ़ हैं. अब योगी सरकार की कोशिश है कि चीन से निकलने वाली कंपनियों को नोएडा और ग्रेटर नोएडा लाया जाए. इसके लिए पिछले दिनों श्रम क़ानून (लेबर लॉ) में बदलाव भी किया गया. इस बदलाव के साथ ही कंपनियों को वर्किंग आवर 12 घंटे करने की इजाजत मिल गई है. दरअसल चीन में कई कंपनियों में वर्किंग आवर 12 घंटे की है. ऐसे में राज्य सरकारें ये व्यवस्था करने में जुट गई है ताकि चीन से आने वाली कंपनियों को माहौल में नए माहौल में कोई दिक्कत नहीं हो.

नयी कम्पनियाँ आएँगी तो नए वो अपने प्लांट लगाएंगी और ऐसे में उन्हें मजदूरों की जरूरत तो पड़ेगी. इससे न सिर्फ मजदूरों को उनके गृह राज्य में ही रोजगार मिलेगा बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था भी सरपट भागेगी.