CAA के खिलाफ़ हिं’सात्मक प्रदर्शन करने वाले इस सं’गठन को बैन करने की तैयारी

1251

संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ़ देशभर में हो रहे प्रदर्शन में PFI का नाम सामने आया है. PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) खुद को एक गैर सरकारी संगठन बताता है. जिस पर गैर क़ानूनी गतिविधियां फैलाने के आरोप भी लगे हैं. लखनऊ और मेरठ में ऐक्ट के विरोध में हुई हिं’सा में PFI से जुड़े  लोगो के नाम सामने आये हैं. जिस पर प्रशासन ने भी पुष्टि करते हुए कहा है कि PFI से जुड़े 25 लोगों के खिलाफ़ मामला दर्ज करके उनको अरेस्ट कर लिया गया है. अरेस्ट किये गए लोगो में PFI के राजनीतिक शाखा सोशल डेमोक्रेटक पार्टी ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष नूर हसन शामिल हैं. वहीं PFI के प्रदेश संयोजक वसीम अहमद और उनके सहयोगियों को लखनऊ शहर में बड़े पैमाने पर हिं’सा फैलाने के लिए हिरासत में ले लिया है.

CAA के खिलाफ़ बढ़ते विरोध में हिं’सात्म’क गतिविधियों में PFI के कुछ लोगो के लिप्त होने के कारण योगी सरकार PFI पर बैन लगाने की तैयारी कर रही है. इसके अलावा कर्नाटक सरकार भी इस संगठन पर बैन लगाने के पक्ष में है. इससे पहले भी PFI पर आरोप लगते रहे हैं जिसमें 6 आतंकी गतिविधियों में शामिल होने, जबरन धर्मांतरण करने और धार्मिक क’ट्टर’वाद को बढ़ावा देना शामिल है.

दूसरी तरफ PFI के केंद्रीय नेतृत्व का कहना है कि योगी सरकार संगठन को झूठे आरोपों मे फंसा रही है. लखनऊ पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए अहमद की शहर में आ’गजनी और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुचाने में कोई भूमिका नहीं है. बता दें हिं’सा में 21 लोगों की मौ’त हो गयी थी और 400 के लगभग लोग घा’यल हुए थे. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा विरोध प्रदर्शन और हिं’सा के दौरान सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुचाने के मामले सामने आये हैं. जिसमें 318 लोगों को हिरासत में लेकर कार्रवाई की जा रही है.

हिं’सा के दौरान हुए नुक’सान कि भरपाई करना भी योगी सरकार ने शुरू कर दिया है. उप’द्रवियों की सीसीटीवी फुटेज से पहचान करके उनकी सम्पति को ज’ब्त करने के नोटिस जारी कर दिए हैं. वहीं बुलंदशहर के लोगो ने बतौर ह’र्ज़ाना 6 लाख रुपए खुद से ही जिला कलेक्टर के पास जमा करा दिए हैं