प्रवासी मजदूरों को ठहराने के लिए योगी सरकार ने यमुना एक्सप्रेस के किनारे बने फ्लैट्स को टेकओवर किया

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21 दिनों के लॉकडाउन से सबसे ज्यादा मुसीबत उन गरीब मजदूरों पर टूट पड़ा है जो दैनिक मजदूरी कर के अपना घर चलाते थे. दिल्ली ककी अरविन्द केजरीवाल सरकार ने तो उन दिहाड़ी मजदूरों को दूध में पड़ी मक्खी की तरह निकाल फेंका. लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार उनके लिए तारणहार बन कर सामने आई है.

योगी सरकार ने निर्देश पर नोएडा प्रशासन ने यमुना एक्सप्रेस के किनारे बने जेपी के फ्लैट्स को टेकओवर किया है ताकि उसमे दिल्ली से आने वाले प्रवासी मजदूरों को ठहराया जा सके. उन फ्लैट्स में ही मजदूरों को क्वारंटाइन करने की योजना बनाई है. वहां उनके लिए भोजन-पानी और डॉक्टर की सुविधा उपलब्ध कराई जायेगी. इससे पहेल योगी सरकार ने यूपी बॉर्डर पर स्थित कौशांबी बस डिपो से 1000 बसें चलवा कर बिहार और यूपी के अलग अलग शेरोन में जाने वाले प्रवासी मजदूरों को उनके शहरों तक छोड़ा था.

नोएडा प्रशासन ने गरीब मजदूरों को राहत देने के लिए नोएडा के मकान मालिकों को निर्देश दिया है वो गरीब मजदूरों से एक महीने का किराया देने के लिए दवाब न डालें. अगर किसी मकान मालिक ने एक महीने तक किरायदारों को निकाला तो उन्हें 2 सालों की जेल हो सकती है. दरअसल, 21 दिनों के लॉकडाउन के ऐलान के बाद के बाद से देश के कई हिस्सों से गरीब और मजदूरों का पलायन देखा जा रहा है. यातायात के साधन न होने के बावजूद गरीब-मजदूर वर्ग के लोग पैदल ही अपने गांव की ओर चल निकले हैं.