सर्वे में यूँ ही नरेंद्र मोदी का उत्तराधिकारी बन कर नहीं उभरे योगी आदित्यनाथ, उनके इन कामों का बजा डंका

बीते दिनों इंडिया टुडे-कार्वी इनसाइट्स के सर्वे में सामने आया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता बीते चार वर्षों में इतनी तेजी से बढ़ी है कि लोग अब उन्हें नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में देखने लगे हैं. सर्वे में जब लोगों से पूछा गया कि नरेंद्र मोदी के बाद वो किसे प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं तो उनका सीधा जवाब था योगी आदित्यनाथ. योगी का नरेंद्र मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में उभारना यूँ ही नहीं है. बल्कि इसके पीछे बतौर मुख्यमंत्री उनके काम, बेदाग़ छवि और कड़े फैसले हैं. जिस तरफ से गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए नरेंद्र मोदी ने ब्रांड मोदी की छवि बनाई थी कुछ वैसी ही छवि ब्रांड योगी की बन गई है.

सीएम योगी के काम :

जिस वक़्त कोरोना से पूरा देश त्रस्त था उस वक़्त योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से अपने राज्य में हालाओं को संभाला उससे उनकी छवि एक कुशल प्रशासक की बने. चाहे कोटा में फंसे छात्रों को घर तक पहुँचाने की बात हो या यूपी बॉर्डर पर फंसे प्रवासी मजदूरों को उनके शहरों तक पहुँचाने की बात. जिस वक़्त मुंबई जैसे महानगर में कोरोना से हाहाकार मचा था उस वक़्त उत्तर प्रदेश में सीएम योगी ने सबसे ज्यादा टेस्ट करवा कर कोरोना पर लगाम लगाया.

लॉकडाउन की वजह से बेरोजगार हुए कामगारों को सबसे पहले 1000 रुपये भत्ता देने का ऐलान योगी आदित्यनाथ ने ही किया. बाकी राज्यों ने भी उनके इस मॉडल को अपनाया.

सख्त प्रशासक की छवि :

साल 2019 के अंत में जब CAA के खिलाफ हिंसा भड़की तो सबसे ज्यादा प्रभावित उत्तर प्रदेश ही हुआ. उसके बाद जिस तरह से यूपी पुलिस ने दंगाइयों से निपटा, उनसे नुकसान का हर्जाना वसूला गया और चौक-चौराहों पर दंगाइयों के पोस्टर लगाए गए, उसने योगी आदित्यनाथ की छवि सख्त प्रशासक की बनाई. उसके बाद जिस तरह से बाहुबलियों की अवैध सम्पतियों पर बुलडोजर चला कर नकेल कसा गया उसपर भले ही विपक्ष सवाल उठाये लेकिन योगी की छवि एक बोल्ड और सख्त निर्णय लेने वाले मुख्यमंत्री की बनी.

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