दुनिया के सबसे खतरनाक आतंकी संगठन

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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में स्थित अवंतिपोरा इलाके में आतंकियों ने सीआरपीएफ जवानों के एक काफिले पर बड़ा हमला किया है। इस हमले में लगभग 40 जवान शहीद हुए हैं और कई अन्य घायल हैं। बताया जा रहा है कि उरी में सितम्बर 2016 के आतंकी हमले के बाद ये कश्मीर में सुरक्षाबलों के ऊपर हुआ अब तक का सबसे बड़ा हमला है, इस हमले कि ज़िम्मेदारी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। जैश ए मोहम्मद के अलावा दुनिया के सबसे बड़े आन्तंकी संगठन कौन कौन से हैं जानते हैं

जैश-ए-मुहम्मद 

एक पाकिस्तानी जिहादी संगठन है जिसका एक ध्येय भारत से कश्मीर को अलग करना है हालांकि यह अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के विरुद्ध आतंकवादी गतिविधियों में भी शामिल समझे जाती हैं। इसकी स्थापना मसूद अज़हर नामक पाकिस्तानी पंजाबी नेता ने मार्च २००० में की थी। इसे भारत में हुए कई आतंकवादी हमलो के लिए ज़िम्मेदार ठहराया गया है और जनवरी २००२ में इसे पाकिस्तान की सरकार ने भी प्रतिबंधित कर दिया। इसके बाद जैश-ए-मुहम्मद ने अपना नाम बदलकर ‘ख़ुद्दाम उल-इस्लाम​’ कर दिया। सुरक्षा विषयों के समीक्षक बी रामन ने इसे एक ‘मुख्य आतंकवादी संगठन’ बताया है और यह भारतसंयुक्त राज्य अमेरिका और ब्रिटेन द्वारा जारी आतंकवादी संगठनों की सूची में शामिल है।

इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस)

अलकायदा आतंक की दुनिया का बड़ा नाम है, लेकिन इस्लामिक स्टेट शैतान बन गया है. इस संगठन को आईएसआईएस के नाम से भी जाना जाता है. इस आतंकी संगठन ने उत्तरी इराक और पश्चिमी सीरिया पर कब्ज़ा करके वहां अपनी सरकार बना ली है. अबु बक्र अलबगदादी का बनाया हुआ ये संगठन इतना बर्बर और हिंसक है कि अलकायदा ने भी इसकी निंदा की. इस आतंकी संगठन में दुनियाभर के लड़ाके शामिल हैं जिनमें ब्रिटिश मुस्लिमों की तादाद सबसे ज्यादा है.

अलकायदा
अलकायदा दुनियाभर में आतंकी संगठनों में सबसे बड़ा ब्रांड माना जाता है. इस उग्रवादी संगठन की स्थापना 1989 में ओसामा बिन लादेन ने की थी. ओसामा के नेतृत्व में ही अलकायदा ने अमेरिका में 9/11 का हमला किया था. इसके बाद अफगान युद्ध की शुरूआत हुई जो मई 2012 में लादेन की मौत के साथ खत्म हुई. अब यह संगठन अल-जवाहरी के नेतृत्व में अपना नेटवर्क फिर से मजबूत करने में लगा है. 

तालिबान
तालिबान एक पश्तो शब्द है जिसका मतलब है छात्र. तालिबान दुनिया के उन चुनिंदा आतंकी संगठनों में से एक है जिन्होंने किसी देश पर राज किया हो. इस संगठन ने अफगानिस्तान में 1996 से 2001 तक सत्ता सम्भाली. इस संगठन की स्थापना मुल्ला मोहम्मद उमर ने की थी. तालिबान ने अफगानिस्तान में शरिअत और इस्लामिक कानून लागू कर इसे सदियों पीछे धकेल दिया. इसे अलकायदा का समर्थन भी हासिल था. मगर अमेरिकी हमले ने इसे अफगानिस्तान से उखाड़ फेंका. 

तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान

इस आतंकी संगठन का ठिकाना पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर मौजूद आदिवासी क्षेत्र में है. यह संगठन कई इस्लामिक आतंकी संगठनों से मिलकर बना है. पाकिस्तानी तालिबान के नाम से कुख्यात इस संगठन की स्थापना पाकिस्तानी के कुख्यात आतंकवादी बैतुल्ला महसूद ने किया था, जिसकी 23 अगस्त, 2009 को मौत हो गयी थी. पाकिस्तानी तालिबान अक्सर पाकिस्तानी राज्यों को अपना निशाना बनाता रहा है. लेकिन कई खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस संगठन का असली मकसद अमेरिका के कई बड़े शहरों को अपना निशाना बनाना है. इसी संगठन ने पाकिस्तान के पेशावर में स्कूल पर हमला कर कई मासूम बच्चों की जान ली थी.



बोको हराम

बोको हराम नाइजीरिया का एक आतंकी संगठन है जो अपनी बर्बरता के लिए जाना जाता है. यह संगठन उस वक्त दुनिया की नजर में आया जब इसने नाइजीरिया के एक स्कूल से 250 छात्राओं को अगवा कर लिया था. अंग्रेजी में बोको हरम का अर्थ है ‘पश्चिमी शिक्षा पाप है’. सामाजिक-आर्थिक मुद्दों से निपटने में विफल नाइजीरियाई सरकार की ज्यादा रोकटोक के बिना यह आतंकी संगठन अपना काम आसानी से अंजाम दे रहा है. 


अल नुस्रा फ्रन्ट

अल नुस्रा फ्रन्ट यानी जमात अल नुस्रा, अरबी भाषा में जिसका अर्थ है ‘अल-शाम के लोगों के समर्थन में मोर्चा’. यह संगठन सीरिया और लेबनान में अल-कायदा की शाखा के तौर पर काम कर रहा है. इस संगठन का प्रमुख अबु मौहम्मद अल जुलानी था, जो सीरियाई विद्रोहियों का मजबूत समर्थक होने के नाते बशर अल-असद शासन के खिलाफ सीरियाई नागरिक युद्ध में शामिल हुआ था. जानकारों के मुताबिक यह सीरिया में ‘एक सबसे प्रभावशाली विद्रोही बल’ था. इस संगठन संयुक्त राष्ट्र, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, सऊदी अरब, यूनाइटेड किंगडम, संयुक्त राज्य अमेरिका और टर्की ने अपने यहां आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया गया.

हिजबुल्लाह
ईरान और सीरिया समर्थित यह लेबनानी आतंकवादी संगठन 1982 के लेबनानी गृह युद्ध से उभरा. इस संगठन को इसराइल और सुन्नी अरब देशों का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है. सीआईए की रिपोर्ट के मुताबिक यह संगठन की लेबनान की 41 फीसदी जनसंख्या का समर्थन हासिल होने का दावा करता है. यही नहीं हिजबुल्लाह देश में कई मानवीय और सामाजिक गतिविधियों में शामिल भी होता है.

  

हमास
हमास का मतलब है ‘हरकत उल मुकवामा अल इस्लामिया’. यह फिलिस्तीन का सामाजिक-राजनीतिक आतंकवादी संगठन है. जो मुस्लिम ब्रदरहुड की एक शाखा के रूप में 1987 में स्थापित किया गया था. इस संगठन का जिहाद इसराइल के खिलाफ है, और इसका मकसद इजराइल से फिलिस्तीन की आजादी को सुरक्षित रखना है. इसे आत्मघाती हमलों के लिए जाना जाता है. इस आतंकवादी संगठन को इजरायली सरकार और नागरिकों के खिलाफ अपने अभियान में हिजबुल्लाह का समर्थन भी हासिल है. यूरोपीय संघ की एक शीर्ष अदालत ने हाल ही में हमास को यूरोपीय देशों की आतंकी सूची से हटा दिए जाने का फरमान सुनाया है. 

कुर्दिस्तान वर्कर्स पार्टी (पीकेके)

इस संगठन को पीकेके नाम से ही जाना जाता है. इसका गठन 27 नवम्बर 1978 को तुर्की में किया गया था और बाद में यह एक स्वतंत्र कुर्द राज्य के लिए लड़ने लगा. आधिकारिक तौर पर एक अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया जा चुका पीकेके अब तुर्की, ईरान, सीरिया और इराक में सक्रीय है. इस्लामिक स्टेट यानी आईएस के खिलाफ दुनिया में चल रही लड़ाई में पीकेके भी शामिल है. यही नहीं उसे इस काम के लिए पश्चिमी देशों का समर्थन भी मिल रहा है. हालांकि तुर्की सरकार की नजरों में उसकी आतंकी छवि कम नहीं होती.

रिवोल्यूशनरी आर्म्ड फोर्सेस ऑफ कोलंबिया

कोलम्बिया के इस मार्क्सवादी-लेनिनवादी आतंकवादी संगठन को FARC  के नाम से जाना जाता है. FARC दुनिया भर में अवैध ड्रग्स कारोबार के सरगना और लैटिन अमेरिकी देश में आतंकवादी गतिविधियों के लिए जाना जाता है. इस संगठन की स्थापना 1964 में की गई थी. अब यह संगठन ग्रामीण क्षेत्रों में अपने हजारों समर्थकों और लगभग 12 हजार लड़ाकों से साथ सक्रीय है. FARC बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और अमीर वर्ग से मिलने वाले फिरौती के पैसों का इस्तेमाल गरीब लोगों की मदद के लिए करता है.