बिहार से लेकर महाराष्ट्र तक फिर ग’रमाई प्रवासी मजदूरों पर सि’यासत

एक तरफ देश कोरोना की मा’र झेल रहा है दूसरी तरफ प्रवासी मजदूरों के मा’मले पर लगातार सि’यासत चालू है. दरअसल प्रवासी मजदूरों के रेल टिकट को लेकर घमा’सान मचा हुआ है. जिस पर लगातार मोदी सरकार विप’क्ष के नि’शाने पर है. जहाँ एक तरफ सरकार पर टिकट का पैसा लेने का आरो’प लगाया जा रहा है वही सरकार का कहना है कि सरकार 85 फीसदी खर्च खुद वहन कर रही है 15 फीसदी राज्य सरकारों के प’क्ष में है. जिसके बाद भी लगातार इस माम’ले पर सि’यासत चालू है.

वही अब इस मामले पर 2008 में जिस वक्त लालू प्रसाद यादव रेल मंत्री थे. उस वक्त बाड़ पी’ड़ितों के लिए भी विशेष ट्रेन चलाई गयी थी. जिस में लोगो से कोई किराया नहीं लिया गया था. वही 2016 में में महाराष्ट्र के लातूर में जल सं’कट से निपटने के लिए रेलवे ने पानी की ट्रेनें भेजी थीं. जिस का बिल लातूर भेजा गया था. हालंकि इस माम’ले पर संसद में विवा’द हुआ और सरकार ने बिल को मा’फ़ कर दिया था.

ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब देश में जरूरत के वक्त विशेष ट्रेन चलायी जा रही है और यदि रेलवे चाहे तो बहुत जल्द ही प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचा सकती है. दरअसल 2008 में जिस वक्त बाड़ आई थी उस समय भी रेलवे ने माल गाड़ियों तक का उपयोग किया था और प्लेटफॉर्म्स को शिविर केंद्र बनाया था. ताकि लोग वहां रुक सके. उसके बाद आज जब देश कोरोना के सं’कट से जूझ रहा है तो ऐसे में भी यह किया जा सकता है.