प्रवासी मजदूरों के पलायन से सूने हुए कारखाने, नहीं मिल रहे काम के लिए मजदूर

लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर मजदूरों पर पड़ा जिसकी वजह से देश भर में लाखों मजदूर सड़कों पर उतर आया और घर जाने के लिए कोई साधन न होने पर अपने घरो के लिए पैदल ही निकल पड़ा. जिससे देश में मजदूरों के पलायन को लेकर भी सियासत शुरू हो गयी. हालाँकि अभी स्थिति नियंत्रण में है.

लेकिन मजदूरों के पलायन का सबसे ज्यादा असर अब उधोगो पर पड़ रहा है. अनलॉक लॉकडाउन 5.0 के शुरू होने के बाद अब उधोग भी धीरे धीरे शुरू हो गए है. लेकिन अब मजदूरों के न होने से उधोगो पर इसका असर देखने को मिल रहा है. बता दें महाराष्ट्र में कंपनियां, फैक्ट्री सब शुरू हो गए है. लेकिन मजदूरों के न होने से दि’क्कतें हो रही है.

आज फैक्ट्री और कारखानों में सोशल डि’स्टेंसिंग, मास्क सब कुछ है. लेकिन कारखानों को अपने खून पसीने से चलाने वाले मजदूरों की ही कमी मह’सूस हो रही है. जाहिर है जिन मजदूरों के खून पसीने से कारखाने चला करते थे आज लोग न होने से सब ठप चल रहे है. मालिकों को कारखानों के लिए मजदूर ढूंढने में काफी दिक्क’तें हो रही है. कम लोगो के साथ ही काम करना पड़ रहा है.

वही एक कंपनी के मालिक से बातचीत करने पर उनका कहना था कि ज्यादातर मजदूर घर चले गए हैं, हमने उन्हें तीन महीने की तन’ख्वाह दी, लेकिन वे लोग बहुत डरे हुए थे. मैं उनसे लगातार फोन पर बात करता रहता हूं, वे आना भी चाहते हैं, लेकिन अभी नहीं. वही अभी मेरे साथ कुछ ही मजदूर काम कर रहे है. उनके लिए खाना मैं अपने घर से लाता हूँ. उन्हें अपनी ही गाड़ी से लाना और ले जाना सब करता है. मजदूर न होने की वजह से कामकाज बुरी तरह से प्रभा’वित है.

गौरतलब है लॉकडाउन का असर मजदूरों के साथ साथ अब कामकाज पर भी पड़ रहा है.

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