सशक्त व स्वावलंब हो रही बहरोड़ की महिलाएं, सिलाई प्रशिक्षण से खुले रोजगार के अवसर

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बहरोड़: महिलाओं ने हर क्षत्र में नाम कमाया है लेकिन आज भी समाज में उन्हें बराबरी का हक़ आज भी नहीं मिल सका है। आज भी महिलाओं को पुरुषों से कम आंका जाता है। लेकिन समाज में व्याप्त महिला-पुरुष के बीच के इस फासले को कम करने का काम राजस्थान के एक ट्रस्ट द्वारा किया जा रहा है। संतोष देवी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा बहरोड़ में सिलाई प्रशिक्षण केंद्र चलाया जा रहा है। यह ट्रस्ट बहरोड़ विधानसभा में डॉ शानू यादव द्वारा संचालित है। इस ट्रस्ट के द्वारा बहरोड़ के आसपास के गांव में रहने वाली लड़कियों व महिलाओं को सशक्त करने के साथ-साथ उन्हें स्वावलंबी बनाया जा रहा है। यह सिलाई सेंटर महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण के साथ-साथ उन्हें रोज़गार के अवसरों से जोड़ने का कार्य भी करता है।

भारत विश्व में रेशम का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है जिसकी विश्व में हाथ से बुने हुए कपड़े के मामले में 95% हिस्सेदारी है। इसके साथ ही राजस्थानी कपड़ों पर की गई कारीगरी और हस्तशिल्पी, उसके रंग पूरे देश-दुनिया में देखने को नहीं मिलते हैं। इसलिए भी राजस्थान में महिलाओं के लिए सिलाई उनके व्यवसाय के साथ ही उनके बड़े उद्यमी बनने का जरिया है। भारतीय अर्थव्यवस्था में वस्त्र उद्योग का बहुत बड़ा योगदान है एवं इसमें व्यापार व उद्योग सम्बन्धी बहुत संभावनाएं भी मौजूद हैं। इन्हीं संभावनाओं से संतोष देवी चैरिटेबल ट्रस्ट बहरोड़ की महिलाओं को अवगत कराता है।

यह ट्रेनिंग सेंटर पूरी तरह नि:शुल्क है जिससे गरीब घर की महिलाएं इस सेंटर से आसानी से जुड़ पाती हैं। बता दें इस सिलाई सेंटर में बेरोजगार महिलाओ एंव युवतियों को सिलाई का प्रशिक्षण दिया जाता है जिससे कि वे स्वयं रोज़गार पा सकें। इस प्रकार महिलाएं न दूसरों पर आश्रित रहती हैं बल्कि परिवार के आर्थिक स्थिति में सहयोग भी कर पाती हैं।

भारत की मौजूदा सरकार में महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। बेटी बचाओ, बेटी पढाओ, फ्री सिलाई मशीन योजना, महिला शक्ति केंद्र योजना आदि महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में भारत सरकार के सक्रीय कदम हैं। इन पहलों से प्रेरणा ले कर ही डॉ शानू यादव भी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा महिलाओं को स्वावलम्बन की ओर ले कर जा रही हैं और उन्हें सशक्त बना रही है।

इसलिए ये कहना गलत न होगा कि आज महिलाओं को भारत सरकार की नीतिओं के कारण समाज में उचित स्थान मिल रहा है। हर क्षेत्र में महिलाओं का सम्मान हो रहा है और वह रुढि़वादिता से बाहर निकालकर स्वावलंबी बनाने की ओर अग्रसर हैं।