Women’s Day: समाज की बंदिशों को तोड़ किया हर मैदान फतह किया इन 3 महिलाओं ने

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आज से कुछ साल पहले अगर हम महिलाओं की बात करें तो, उनकी स्थिति काफ़ी आलग थी, जहाँ उन्हें पढ़ने तक अधिकार नहीं था, उनसे बिना पूछे उनकी शादी करवा दी जाती थी, अगर कोई लड़की पढ़ना भी चाहती तो उसको बार बार यही सुनाया जाता था की ज़्यादा पढ़ लिख कर कौन सा तुझे कलेक्टर बनना है । शादी के बाद तो तुझे वैसे भी ससुराल वालों की सेवा के साथ पति और बच्चों को सम्भालना है। शहरो की स्थिति तो फिर भी हम बोल सकते थोड़ी ठीक थी , लेकिन गांवों की बात करें वह कि स्थिति ऐसी ही थी। लेकिन अब हम देखे तो पाएंगे मानो सबकुछ बदल सा गया,अब लड़कियाँ अपने हिसाब से पढ़ सकती है, ख़ुद के लिए ग़लत सही का फ़ैसला कर सकती है, अपने हिसाब से जी सकती हैं। अगर हम ये बोले की चमत्कार हुआ है तो ये बोलना बिलकुल ग़लत होगा क्योंकि ये कोई चमत्कार बिलकुल नहीं है बल्कि उनका ख़ुद का संघर्ष और मेहनत का असर है। और हम ये भी नहीं बोलेंगे की हमारे माँ बाप ने हमारा साथ नहीं दिया। बिल्कुल दिया उन्होंने हमारा साथ, बिना उनके साथ और विश्वास इतना आगे तक बढ़ना शायद हमारे लिए थोड़ा मुश्किल होता।

वैसे तो हर फ़ील्ड में महिलाओं काफ़ी नाम बनाया है चाहे वो एजुकेशन का फ़ील्ड हो या फिर ias -ips ऑफ़िसर बनना हो या फिर cooperate वर्ल्ड या ग्लैमर वर्ल्ड, या फिर बॉलीवुड या हॉलीवुड हो, स्पोर्ट्स हो, या फिर स्पेस हो या राजनीति । हर फ़ील्ड में महिलाओं ने अपनी धाक जमाई है। अगर हम ऐसी सफल महिलाओं की बात करने बैठे तो शायद साल बीत जाए लेकिन इनकी उपलब्धियों की बातें नहीं ख़त्म हो पाएँगी। लेकिन आज हम जिन ३ महिलाओं की बात करने जा रहे जिन्होंने पिछले 5 सालों में भारत की राजनीति अपनी इक अलग ही पहचान बनाई है। और भारत की सरकार चलाने में आना अहम योगदान दे रही है। हम बात करने वाले हैं स्मृति इरानी, सुषमा स्वराज ओर निर्मला सीतारमन की।

स्मृति इरानी जिन्हें लोग राजनीति में आने से पहले ही जानते थे। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि टीवी की दुनिया में आने से पहले स्मृति एक नामी रेस्टोरेंट में वेट्रेस और क्लीनर का काम भी कर चुकी हैं।उसके बाद वो मोडलिंग की दुनिया में आ गयी।एकता कपूर के सबसे लोकप्रिय टीवी शो ‘क्योंकि सास भी कभी बहू थी’ में तुलसी का रोल निभाकर स्मृति ने लोगों के दिलों में अपनी एक खास जगह बनाई।स्मृति ईरानी का राजनीतिक सफर 2003 में शुरू हुआ, जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की मेंबरशिप ली। 2010 में स्मृति को बीजेपी महिला मोर्चा की कमान सौंपी गई, 2011 में उन्‍हें गुजरात से राज्यसभा सांसद चुना गया. 2014 में स्मृति ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के खिलाफ अमेठी संसदीय सीट से चुनाव लड़ा और उन्हें कड़ी चुनौती दी, हालांकि स्मृति ये चुनाव हार गईं. लोस चुनाव हारने के बाद बीजेपी सरकार में उन्‍हें सीधे कैबिनेट मंत्री का दर्जा देकर मानव संसाधन जैसा अहम मंत्रालय दिया गया. इन दिनों स्मृति ईरानी टेक्सटाइल मिनिस्टर है।

सुषमा स्वराज :
14 फरवरी साल 1952 को जन्मीं सुषमा स्वराज अंबाला से हैं।
उन्होंने अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की है। इसके बाद उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री हासिल की। वह भाषण और वाद विवाद में हमेशा से ही आगे रही हैं। उन्होंने ऐसी कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार भी हासिल किए हैं।
सुषमा स्वराज ने साल 1977 से राजनीतिक करियर की शुरूआत कर पहली बार चुनाव लड़ा था। जिसके बाद उन्हें चौधरी देवीलाल की सरकार में कैबिनेट का मंत्री बनाया गया। फिर वह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनीं। उन्होंने साल 1999 के लोकसभा चुनाव में कर्नाटक के बेल्लारी से कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा। दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री भी रह चुकी हैं। वह वर्तमान में देश की विदेश मंत्री हैं। एक प्रखर प्रवक्ता के रूप में जानी जाने वाली सुषमा स्वराज शुरूआत से ही संघ और बीजेपी से जुड़ी हुई हैं।

निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) उन महिला नेताओं में से एक हैं जो बेहद कम समय में राजनीति के शिखर तक पहुंची हैं. देश की पहली महिला रक्षा मंत्री होने के अलावा सीतारमण पेशे से अर्थाशास्त्री और समाज सेविका भी हैं. निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) देश की कई महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने लंदन के एक होम डिकोर में सेल्स गर्ल के रूप में कार्य किया था. बाद में उन्होंने प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स में सीनियर मैनेजर के तौर पर काम किया. बता दें कि सीतारमण ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में भी काम किया. निर्मला सीतारमण ने 17 जनवरी 2018 को सुखोई-30 लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी. निर्मला सीतारमण पहली महिला रक्षा मंत्री हैं जिन्‍होंने लड़ाकू विमान में उड़ान भरी. बता दें कि इंदिरा गांधी ने भी रक्षा मंत्रालय की कमान संभाली थीं. उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए रक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार संभाला था.

महिला दिवस पर ये थी हमारी खास पेशकश, जिसमे हमने देश के लिए नेतृत्व संभाल रहीं इन महिलाओं को याद किया। हम इनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते है। और उम्मीद करते है इनसे प्रेरणा लेकर और भी महिलाएं आगे आएंगी और अपने सपनो को साकार करेंगी।