3 घंटे तक फिल्म देखने वाली महिला नेशनल एंथम बजने पर पीरियड की वजह से 52 सेकेण्ड तक नहीं हो पाई खड़ी

मंगलवार को सोशल मीडिया पर अचानक से एक विडियो वायरल हुआ जिसमे एक सिनेमाहॉल में कुछ लोग एक परिवार के साथ बहस कर रहे हैं. इस बहस का कारण ये था कि उस परिवार की एक महिला फिल्म शुरू होने से पहले सिनेमाहॉल में बजने वाले नेशनल एंथम के लिए खड़ी नहीं हुई. जो लोग उस परिवार के साथ बहस कर रहे थे उनका नेतृत्व कर रहे थे कन्नड़ एक्टर अरुण गौड़ा.

घटना है बेंगलुरु के मल्लेश्वरम के एक थियेटर की. वहां धनुष स्टारर तमिल फिल्म “असुरन” का शो चल रहा था. शो शुरू होने से पहले जब नेशनल एंथम बजाय गया तो एक परिवार खड़ा नहीं हुआ. उसी थियेटर में कन्नड़ एक्टर अरुण गौड़ अपने दोस्तों के साथ मौजूद थे. जब उन्होंने देखा कि परिवार नेशनल एंथम के लिए खड़ा नहीं हुआ तो उन्होंने खड़े होने को कहा लेकिन परिवार ने इसे अपनी मर्जी बता कर खड़े होने से इनकार कर दिया. जिसके बाद अरुण गौड़ और उनके दोस्तों ने थियेटर में परिवार के साथ बहस की.

ये विडियो सोशल मीडिया पर 24 अक्टूबर को अपलोड हुआ था लेकिन इसको लेकर 29 अक्टूबर को हल्ला मचा. विडियो में मौजूद लोगों की भीड़ उस परिवार से कह रही हैं कि “क्या तुम पाकिस्तानी हो? आप भारत की धरती पर खड़े हो. आपके पास देश के लिए 52 सेकेण्ड नहीं हैं और तुम 3 घंटे की फिल्म देख सकते हो?

ट्विटर पर विडियो वायरल होने के बाद लोग दो धड़ों में बंट गए. कुछ लोग नेशनल एंथम बजने पर खड़े नहीं होने को लेकर परिवार के खिलाफ बातें कर रहे थे तो कुछ लोग ऐसे थे जो ये कह रहे थे कि किसी को उसकी मर्जी के खिलाफ मजबूर नहीं किया जा सकता खड़े होने को.

बात सिर्फ नेशनल एंथम पर खड़े होने को लेकर थी लेकिन द प्रिंट की जर्नलिस्ट ज्योति यादव ने उसमे महिलाओं के पीरियड का एंगल घुसा दिया और बात नेशनल एंथम से होते हुए महिलाओं के पीरियड तक पहुँच गई.

ज्योति यादव ने ट्वीट कर दावा किया कि वो महिला जो नेशनल एंथम पर खड़ी नहीं हुई वो उनकी दोस्त है और उसे पीरियड आया था इसलिए वो खड़ी नहीं हुई. लेकिन ज्योति यादव के दावे में एक झोल था और इस झोल ने ज्योति यादव के झूठ की पोल खोल दी. दरअसल ज्योति यादव ने कहा कि ये घटना केरल में हुई जबकि ये घटना बेंगलुरु में हुई थी. ज्योति यादव का झूठ पकडे जाने के बाद लोगों ने उन्हें ट्रोल कर दिया.

लोगों ने कहा कि पीरियड में वो महिला तैयार हो सकती है, घर से दूर फिल्म देखने थियेटर पहुँच सकती है, 3 घंटे तक फिल्म भी देख सकती है लेकिन 52 सेकेण्ड खड़े नहीं हो सकती. अपना झूठ पकडे जाने के बाद ज्योति यादव बौखला गईं और सारी बहस नेशनल एंथम पर खड़े हों या न हों से हट कर पीरियड पर आ गई. लेकिन लोगों के सवाल गलत भी नहीं थे. इसमें कोई शक नहीं कि महिलायें पीरियड के असहनीय दर्द से गुजरती हैं लेकिन जो महिला घर से तैयार हो कर, ड्राइव कर के, इतनी दूर 3 घंटे तक फिल्म देख सकती है वो 52 सेकेंड्स तक नेशनल एंथम के सम्मान में खड़े तो हो ही सकती है. लेकिन अगर आपको अपना एजेंडा चलाना हो तो पीरियड में दुनिया के हर काम किये जा सकते हैं सिवाए नेशनल एंथम पर खड़े होने के.

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