‘तुम तो वैश्या हो ही गई हो तुमने बेटी को भी वैश्या बना दिया’

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एक पत्नी ने अपने पती की गला दबाकर हत्या कर दी लेकिन सुप्रीम कोर्ट इसको हत्या नहीं मान रही है…अब आप ये सोच रहे होगें की सुप्रीम कोर्ट इस हत्या को हत्या क्युं नही मान रही है..तो इसको जानने से पहले हम आपको उस महिला की स्टोरी बताएंगे….

ये कहानी तमिलनाडु की है….प्रियंका और मनोज…ये दोनों शादी-शुदा यानि की पती पत्नी थे और साथ में रहते थे….बता दें, प्रियंका और मनोज..ये दोनों काल्पनिक नाम है..हम रियल नाम disclose नहीं कर सकते इसलिए आपको समझाने के लिए हम ये नाम रख रहे है….प्रियंका के पती मनोज को शक था कि उसकी बीवी प्रियंका का किसी और के साथ अवैध संबंध हैं…मनोज को लगता था की उसके पड़ोस में रहने वाले नवाज के साथ उसका एक्स्ट्रामैरिटॅल अफेयर चल रहा है. आए दिन वह अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था..साथ ही उसे यह भी शक था की पत्नी ने अपनी युवा बेटी को भी इसी तरह का बना दिया था..एक दिन इस बात को लेकर दोनो पति-पत्नी में इतना झगड़ा हुआ की…मनोज ने प्रियंका को वैश्या तक कह दिया…मनोज ने अपने बच्चों के सामने प्रियंका से बहुत झगड़ा किया और बेटियों के सामने ही उसे वैश्या भी कह दिया…पति ने यह भी कहा कि तुम तो वैश्या हो ही गई हो तुमने बेटी को भी वैश्या बना दिया है…हालांकि इस दौरान प्रियंका ने अपने पती को बहुत समझाने की कोशिश की..लेकिन मनोज बहुत गुस्से में था और किसी की बात नहीं सुन रहा था…बात इतनी बढ़ गई कि झगड़े की आवाज नावाज तक पहुंच गई..नवाज ने सारी बात सुन ली और प्रियंका के घर आ गया…..नावाज और प्रियंका दोनों ने मनोज को शांत रहने को कहा…झगड़ा नहीं करने को कहा…पर नवाज की मौजूदगी से दिनेश और आग बबूला हो गया….बात इतनी बढ़ गई की प्रियंका और नवाज ने मनोज की हत्या कर दी….दोनों ने मिलकर एक तौलिए की मदद से मनोज का गला घोंट दिया…इसके बाद दोनों ने शव को जला दिया ताकि हत्या का कोई सबूत न रहे…..

लेकिन ये मर्डर छुपा नहीं और इसकी तहकीकात हुई… तो पूरी घटना सामने आई..उस समय ट्रायल कोर्ट और मद्रास हाई कोर्ट ने दोनों को इस मर्डर का दोषी पाया था और दोनों को आईपीसी की धारा 302 और सबूत नष्ट करने के लिए धारा 201 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इस फैसले के बाद प्रियंका और नावाज ने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी ।

और अब जाकर सुप्रीम कोर्ट ने इस केस पर फैसला सुनाया है…सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद इस केस में एक नया मोड़ आ गया है…जिसकी चर्चा हर जगह हो रही है…सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए दोनों पर से मर्डर का चार्ज हटा दिया है हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने नवाज़ और प्रियंका दोनों को दोषी जरूर करार किया…सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि ‘हमारे समाज में कोई भी महिला अपने पति के मुंह से अपने लिए वेश्या का शब्द नहीं सुन सकती। खास तौर पर अपनी बेटी के लिए तो वह बिल्कुल नहीं सुन सकती। मृतक का यह शब्द गंभीर रूप से उकसाने वाला था। अचानक पैदा किए गए इस उकसावे के वजह से दोनों ने एकाएक गुस्से में पति को जान से मार दिया। क्योंकि शव को ले जाकर जलाया गया है इसलिए इस मामले में उन्हें धारा 201 के तहत दंडित किया जाना उचित है। कोर्ट ने इसे हत्या का नहीं बल्कि गैर इरादतन हत्या का केस माना। अदालत ने कहा, इस मामले में हम सजा को संशोधित कर रहे हैं क्योंकि यह मामला आईपीसी की धारा 304 भाग-1 में आएगा, धारा 302 के तहत नहीं। इसलिए दोनों को गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी करार देते हुए 10-10 साल कैद की सजा सुनाई…

ये पहली बार हुआ जब कोर्ट ने इस तरह के शब्दों को गंभीर और अचानक पैदा किया गया उकसावे की वजह मानी है…इससे पहले आत्मरक्षा में की गई हत्या के मामले में ही माफी दी जाती थी और आरोपी को हल्की धाराओं में दंडित किया जाता था….

यहां आपको ये भी समझने की जरूरत है कि हत्या और गैरइरादतन हत्या में क्या अंतर होता है….

धारा 302 यानि कि हत्या के मायने होते हैं, आरोपी खुद हत्या के इरादे से पूरी तैयारी के साथ आए और घटना को अंजाम दे दे। धारा 304 गैरइरादतन हत्या के मायने होते हैं कि आरोपी अचानक किसी घटनाक्रम में उलझे और हत्या कर दे। धारा 304 में भी उम्रकैद का प्रावधान होता है लेकिन आमतौर पर इसकी सजा उमकैद से कम कर दिया जाता है…आपकी इस खबर पर क्या राय है, हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताइऐगा…