“चायवाले प्रधानमंत्री” के बाद अब इन चायवालों ने खड़ी कर दी है कांग्रेस के लिए मुश्किल

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प्रधानमंत्री मोदी बचपन में चाय बेचा करते थे इस बात से तो हम सभी परिचित हैं. चायवाला प्रधानमंत्री नाम से फेमस हो चुके प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस के लिए एक बड़ी मुसीबत के तौर पर उभरे और कांग्रेस को सत्ता से उखाड़ फेंकने में कोई कसर नही छोड़ी है. आज हालात तो यह है कि कुछ ही राज्यों की छोड़कर कांग्रेस लगभग विलुप्त सी हो गयी है. लेकिन अब असम के चायवालों ने कांग्रेस के लिए मसीबत खड़ी करने जा रहे हैं. दरअसल सरकार ने असम के चाय बागानों में लोगों के जीवन स्‍तर में सुधार किया है.. सरकार के प्रयासों को असम के चाय बगानों में काम करने वाले लोग सकरात्मक रूप से देख रहे हैं. ये लोग अब खुद प्रधानमंत्री से खुद को जुड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं. यही कारण है कि कांग्रेस के लिए ये लोग मुसीबत बन गये हैं.
असम लगभग आधे देश के लिए चाय उत्पादन करता है. इस काम से जुड़े लोगों की संख्या लगभग 17 फीसदी है और असम की पांच ऊपरी लोकसभा सीटों तेजपुर, कालिबोर, जोरहाट, डिब्रूगढ़ और लखीमपुर में 11 अप्रैल को चुनाव होने हैं। और इस क्षेत्र में चाय बगानों में काम करने वालों की संख्या करीब 45 फीसदी है. यहाँ के लोगों का कहना है कि भाजपा ने लोगों को पैसा, चावल, शौचालय, सड़क‍ सब कुछ दिया है, इसलिए हम उसी को वोट देंगे।..


हालाँकि ये सीटें कांग्रेस की परम्परागत सीटें रही हैं लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव में यहाँ से बीजेपी पांच में चार सीटें जीती थी एक कांग्रेस जीती थी. 30 मार्च को ही प्रधानमंत्री मोदी ने डिब्रूगढ़ के मोरन में रैली को संबोधित किया था. यहाँ उन्होंने कहा था कि पहले वे चौकीदार से ही घृणा करते थे लेकिन अब वे चायवालों से भी नाराज है. पहले मैं समझता था कि वे सिर्फ चायवालों से नाराज है लेकिन जब मैं पशिचम बंगाल और असम आया तो पता चला कि वे यानी कांग्रेस के लोग चाय उगाने वालो से भी नाराज है. यहाँ आपको बता दें कि पीएम मोदी कहना था कि चाय बागानों में काम करने वाले लोगों का बीजेपी से जुड़ने से कांग्रेस के नेता नाराज हैं. हालाँकि बीजेपी ने इन क्षेत्रों से ज्यादातर चाय व्यवसाय से जुड़े नेताओं को टिकट दिया है और चाय से जुड़े लोग बीजेपी की तरफ आकर्षित हुए हैं ऐसे में ये बीजेपी के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है और कांग्रेस के लिए नुकसानदायक!
हालाँकि कई स्कीमों के कारण कांग्रेस को कुछ वोट मिलने की उम्मीद है चाय बागानों में सबसे बड़ा व्यापार संगठन आधिकारिक तौर पर कांग्रेस से जुड़ा असम का मजदूर संघ है. गोलाघाट जिले में एक चाय बागान के एक मजदूर संघ अध्यक्ष जो कलियाबोर निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं उन्होंने ने कहा कि हम कार्यकर्ताओं को कांग्रेस को वोट देने के लिए कहते हैं तो वे कहते हैं कि जब भाजपा हमारे लिए इतना काफी कुछ कर रही है तो कांग्रेस को वाट क्‍यों दें।


इस पर कांग्रेस नेता घटोवार ने कहा कि उन्होंने यानी बीजेपी ने निशुल्क योजनाओं का एलान कर हमारे वोट को लुभाने की कोशिश की है. यहाँ के कांग्रेस के नेताओं को यह डर सताने लगा है कि इस बार उन्हें वोट मिलने की उम्मीद काफी कम है. सरकार की योजनायें और योजनाओं से मिला लाभ चाय बगानों में काम करने वाले लोगों को बीजेपी की तरफ आकर्षित करने में कामयाब रहा है.