धोनी और विराट के बिना बच्चो की तरह क्यो खेलती है भारतीय टीम

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भारतीय टीम अपने रेगुलर कप्तान विराट कोहली के बिना मैदान पर उतरी और नतीजा ये हुआ कि उसे 92 रन के स्कोर पर ही पवेलियन में बैठना पड़ गया। सकूं है तो बस इस बात का की टीम अपने सबसे कम स्कोर 54 रन को पार कर गई। खैर, जिस वक्त न्यूजीलैंड जीती तब भी 212 बॉल बची हुई थी,इससे बड़ी बेज्जती और क्या हो सकती है यार। 
अब लोग कह रहे है कि धोनी और कोहली नही थे इसलिए टीम हार गई लेकिन रुकिये जनाब ये समस्या आज की नही है। आप पिछला रिकॉर्ड भी देखेंगे तो आपको नजर आ जायेगा कि धोनी और कोहली के बिना भारतीय टीम एकदम कमज़ोर सा महसूस करती है और मैदान पर उसका बर्ताव एकदम बच्चो की तरह हो जाता है।  उसे समझ ही नही आता कि कौनसी बॉल पर शॉट मारना है और किस बॉल को छोड़ना है।


रिकॉर्ड को देखे तो जब भी टीम का टॉप थ्री क्रम फेल रहा है तब तब टीम की नैया डूब गई। कोहली की कैप्टेन्सी में भारत ने कुल 63 वनडे मैच खेले है जिनमे टीम ने 47 मैच जीते है और कुल 14 मैच हारे है। कोहली की कैप्टेन्सी में टीम के जीतने का कुल औसत लगभग 77 प्रतिशत का रहा है।  टेस्ट क्रिकेट में भी टीम काफी हद तक एक दो खिलाड़ियों पर ही टिकी है। यानी कोहली जैसे खिलाडी जब तक साथ रहे उसका फायदा टीम को मिला और टीम का प्रदर्शन लगातार बेहतर होता गया। लेकिन जैसे ही कोहली बाहर हुए या नही चले तो पूरी टीम ने सरेंडर कर दिया।

रोहित शर्मा भी सीनियर खिलाड़ी है और विराट की एप्सेन्स में वो ही टीम की कमान संभालते है। उन्होंने अभी तक कुल 9 मैचों में कप्तानी है जिसमे से 7 मैचों में टीम ने जीत दर्ज की है।

अब आपको लगेगा कि कोहली और धोनी के बिना रिकॉर्ड तो बहुत बढ़िया है फिर मैं टीम को बच्चे की तरह बर्ताव करने वाली क्यो कह रहा हूँ। दरअसल उसके पीछे भी बड़ी बड़ी वजह हैं। रोहित की अगुवाई में टीम इंडिया ने जिन 7 मैचों में जीत हासिल की है उनमें खुद रोहित ने बेहतरीन खेल दिखाया है तभी टीम जीती है। हो सकता है आपको मेरी कुछ बाते चुभ भी जाए पर जरा दिल पे हाथ रखिएगा और फिर बताएगा कि मौजूदा समय मे कोहली,धोनी,रोहित के अलावा आपको टीम के भीतर कोई भी ऐसा खिलाड़ी सामने ऐसा नजर आता है जिसपर मैच जिताने का दांव खेला जा सके।

धोनी हालांकि टेस्ट से विदा ले चुके है लेकिन वनडे में उनके प्रदर्शन को देखते हुए साफ कहे तो धोनी और कोहली में कुछ तो ऐसा जरूर है जो टीम को मजबूती देता है। उनके ड्रेसिंग रूम में होने और ना होने से टीम पर बहुत असर पड़ता है। भुवी जैसे खिलाड़ी इस बात को कई बार कह चुके है की कोहली और धोनी की मौजूदगी टीम मे एनर्जी भरती है। हम ये नही कहते कि टीम में कोहली,रोहित या धोनी से बढ़िया खिलाड़ी नही है। खिलाड़ी है तो लेकिन वो सिर्फ भारत की रनों से भरी पिच पर ही चल पाते है और विदेश में आते ही उनके बल्ले खामोश हो जाता है। सीनियर्स खिलाड़ियों की एप्सेन्स में आप बच्चो की तरह विकेट फेंककर निकलोगे तो सवाल तो उठेंगे और जरूर उठेंगे। सवाल अभी भी यही है कि आख़िर कब हम तक धोनी,कोहली,रोहित जैसे खिलाड़ियों पर ही टिके रहेंगे।