बीजेपी के सत्ता में आने कि संभावना से क्यों आ रहा स्टॉक मार्किट में उछाल

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चुनाव आयोग ने इलेक्शन की तारीखें घोषित कर दी हैं और इसके साथ ही चुनावी मौसम भी शुरू हो गया है. अगर ओपिनियन पोल्स कि मानें तो जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे है, केंद्र में बीजेपी कि सरकार बन्ने कि संभावनाएं भी बढ़ती जा रही हैं. दो तीन महीने पहले के सभी ओपिनियन पोल्स हंग पार्लियामेंट बता रहे थे जहाँ एनडीए 272 का अंक पार किए बिना सबसे बड़ा दल उभर के आ रहा था. लेकिन हाल ही में हुए तीन ओपिनियन पोल्स में एनडीए को बढ़त मिलती दिख रही है.

इंडिया टीवी-CNX ओपिनियन पोल के मुताबिक एनडीए को 285 सीट मिल सकती है. इस पोल के हिसाब से बीजेपी को 238 सीट, यूपीए को 126 सीट और अन्य को 132 सीट मिलती दिख रही है. साथ ही इंडिया टीवी के सर्वे के मुताबिक 54 प्रतिशत उत्तरदाता प्रधानमंत्री मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनते देखना चाहते हैं.

इसके अलावा ABP न्यूज़-C वोटर और ज़ी 24 टास के मुताबिक एनडीए को 264 सीट मिल सकती हैं जो कि 273 से थोड़ा ही कम है. यूपीए और अन्य को ABP न्यूज़ के मुताबिक 141 और 138 सीटे मिल सकती हैं. वही ज़ी न्यूज़ के मुताबिक यूपीए और अन्य को 165 और 114 सीट मिल सकती हैं. C वोटर का सर्वे तो यहाँ तक कहता है कि अगर उत्तर प्रदेश में महागठबंधन नहीं होता है तो एनडीए को 307 सीटे तक मिल सकती हैं.

एनडीए कि वापसी कि खबर कांग्रेस को परेशान कर सकती है. लेकिन अगर स्टॉक मार्किट कि बात की जाये तो एनडीए सरकार बन्ने कि संभावना के साथ स्टॉक मार्किट ने बड़ी उछाल मारी है. जहाँ निफ्टी ने 132 अंक कि बढ़त के साथ ग्यारह हजार एक सौ 68 का मार्क छू लिया है वहीं सेंसेक्स भी 382 पॉइंट बढ़कर सैंतीस हजार 54 तक पहुँच गया है. सेंसेक्स और निफ्टी पिछले छह महीनों में उच्चतम स्तर पर पहले से ही पहुँच चुके थे. इनके साथ 26 अलग स्टॉक एक्सचेंज भी अपने 52 हफ्तों का रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं.

दरअसल स्टॉक मार्किट का बढ़ना अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा माना जाता है. ऊँची स्टॉक मार्किट मतलब भारत कि अर्थव्यवस्था में ज्यादा विश्वास. ऊँची स्टॉक मार्किट होती है तो निजी कंपनियों और सरकार के लिए निवेश के लिए भी पैसा ज्यादा उपलब्ध होता है. इस पैसे से इंफ्रास्ट्रक्चर और निजी कंपनियों द्वारा निवेश आसानी से किया जाता है. संक्षिप्त में बोला जाये तो ऊँची स्टॉक मार्किट हमारी अर्थव्यवस्था के लिए, नौकरी के लिए और विकास के लिए बहुत ज़रूरी होती है.

बीजेपी सरकार और स्टॉक मार्किट का रिश्ता पुराना है. जब जब एनडीए सरकार बनती है तब तब स्टॉक मार्किट बहुत उछाल मारते हैं. 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही सेंसेक्स ने अपनी बढ़त के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे.

वहीं एनडीए के तीन साल यानी 2014 से 2017 तक भी स्टॉक मार्किट ने नए आयाम छूए.

जब उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनावों के नतीजे आये थे तब भी स्टॉक मार्किट ने ऊंचाई के नए रिकॉर्ड बनाये थे.

इस मायने में पिछले साल हुए विधान सभा चुनाव सबसे दिलचस्प रहे. जब एग्जिट पोल्स ने बीजेपी की हार बताई थी तब स्टॉक मार्किट में काफी गिरावट आई थी. सेंसेक्स 714 पॉइंट और निफ्टी 214 पॉइंट नीचे आ गए थे. इन दोनों स्टॉक मार्केट्स को दो प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ा था. लेकिन जिस दिन चुनाव के परिणाम घोषित हुए उस दिन मार्केट्स ने रिकवरी कर ली थी. रिकवरी के पीछे एक्सपर्ट्स ने ये कारण बताया की बीजेपी की हार का मार्जिन बहुत कम था और पार्टी ने अपना वोट शेयर भी नहीं खोया था .

सभी दल इस बात पर जोर दे रहे हैं कि 2019 लोक सभा चुनाव नौकरियां, आर्थिक गति और खुशहाली जैसे मुद्दों के आधार पर लड़ा जायेगा. तो ऐसे में ये खबर आप सभी के लिए बहुत ज़रूरी थी क्योंकि मतदाता का जागरूक होना स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सबसे आवश्यक है.