भारत रत्न लौटाने को लेकर क्यो झूठ फैला रहे है रवीश कुमार ?

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रवीश कुमार पत्रकार है। पत्रकार भी ऐसे वैसे नही क्रांति वाले। एसी रूम में बैठकर अक्सर लोगो को रोज़गार दिलाने की बात करते इनको कई बार देखा जा सकता है। वो बात दूसरी की एनडीटीवी वाले इनके ही एक साथी को 2017 में छोटी सी गलती पर नौकरी से निकाल दिया गया पर इन्होंने उसके लिए कोई स्टैंड नही लिया,कोई प्राइम टाइम नही किया। ओह्ह हो सकता है भूल गए हो,कोई बात नही। रवीश कुमार हमेशा समाज मे गंदगी फैली होने की बात कहकर खूब प्राइम करते है पर वो बात भी दूसरी की उन्होने अपने ही चैनल की उस अपील को खुशी खुशी स्वीकार कर लिया जिसमे कहा गया था कि देश के लिए जान देने वाले और शहीद होने वाले सैनिकों को शहीद नही बोला जाएगा बल्कि मरा हुआ कहा जायेगा। देश के लिए जान कुर्बान करने वाले सैनिकों के प्रति इतना असम्मान उनके ही चैनल ने दिखाया पर वो चुप रहे। अरे हा,हो सकता है कि रवीश सर ने कानो में रुई लगा रखी हो और उन्हें सुनाई ही ना पड़ा हो।


रवीश कुमार जैसे पत्रकार बहुत कम ही मिलते है। शायद ऐसे लोग तो एक्का दुक्का ही पैदा होते है। इन जैसे महान पत्रकार दिया लेकर घूमने से भी नही मिलते।वो बात अलग है कि कभी मोदी सरकार पर निशाना साधने के चक्कर मे झूठ बोल जाते है तो कभी डबल स्टैंडर्ड दिखा जाते है।  

 हिंदी से तो उन्हें ना जाने क्या चिढ़ हो गई है कि आजकल वो लोगो को हिंदी टीवी चैनल देखने और अखबार पढ़ने से मना कर रहे है। हिंदुस्तान अखबार से तो वो पूरे खार खाए बैठे है तभी अपने कई पोस्ट में वो हिंदुस्तान अखबार को गरियाते हुए उसकी कटिंग दबाके पोस्ट कर रहे है। अभी 11 फरवरी को ही उन्होंने हिंदुस्तान और इंडियन एक्सप्रेस की कटिंग पोस्ट की।

अब अगर बात करे उससे पहले आप ये जान लीजिए कि हिंदुस्तान अखबार ने प्रधानमंत्री का एक बयान छापा था जिसमे पीएम मोदी कह रहे थे कि 2030 तक  भारत दुनिया की दूसरी बड़ी आर्थिक ताकत बन जाएगा। 
जबकि एक्सप्रेस की ख़बर में लिखा था कि भूपेन हज़ारिका के बेटे ने भारत रत्न को लौटा दिया है।
हालांकि यूँ तो हिंदुस्तान अखबार की खबर में भारत की तरक्की का ही जिक्र था लेकिन ना जाने क्यो रवीश कुमार को भारत की तरक्की वाली खबर अच्छी नही लगी और उन्होंने हिंदुस्तान अखबार को इंडियन एक्सप्रेस की तरह काम करने की नसीहत देते हुए लिख दिया कि उसके पास कुछ छापने को नही है,बस बॉक्स और फ़ोटो लगाकर पन्ना भर दिया है। इसके अलावा उन्होंने लिखा कि क्या हिंदी मीडिया अपने पाठकों को बेवकूफ समझने लगा है। यानी इनडायरेक्टली शायद वो यही कहना चाह रहे होंगे कि देश की तरक्की वाली खबर मत दिखाओ,पीएम वीएम को मत दिखाओ बस सरकार विरोधी खबरों को चलाने से ही आप निष्पक्ष पत्रकारिता कर पाएंगे। उन्होंने भूपेन हजारिका के बेटे को भारत रत्न लौटाने की खबर कवर करने के लिए एक्सप्रेस को शाबाशी भी दे दी। लेकिन पोल तब खुली गई जब भूपेन हजारिका के बेटे तेज हजारिका ने कहा कि उन्हें तो अभी तक भारत रत्न लेने का कोई निमंत्रण भी नही मिला। अब जब उन्हें निमंत्रण ही नही मिला तो उन्होंने उसको वापिस कैसे कर दिया?? इतना बड़ा पत्रकार आख़िर कैसे झूठ फैला सकता है।

वैसे रवीश कुमार के झूठ बोलने की ये पहली घटना नही है इससे पहले भी वो तब एक्सपोज हुए जब वो अमेजन,फ्लिपकार्ट,वालमार्ट जैसी कंपनियो को लेकर झूठ फैलाते पकड़े गए। तब भी उन्हें खूब गरियाया गया। इसको लेकर the chaupal एक वीडियो भी बना चुका हैं।
उनका दोहरे स्टैंडर्ड यही खत्म नही होता।  रवीश कुमार कहते है कि 2017-18 में  देश भर में जो नए आयकर रिटर्न आये उनमें ज्यादातर वो थे जिनकी आयकर देने की क्षमता नही है,रिटर्न की संख्या तो बढ़ गई लेकिन देश के राजस्व पर उसका कोई असर नही पड़ा और अभी भी आयकर देने वालो की संख्या कोई ज्यादा नही बढ़ी है।
ये तो सब ठीक है लेकिन 2019 आते आते वो अपने ही बयान से पलट गए। बजट आने के बाद सरकार का विरोध करने के फेर में वो बोले तो पर शायद अपनी पुरानी बात को भूल गए।
बजट में 5 लाख तक कमाने वालों को आयकर में छूट मिलने के बाद उन्होंने कहा कि आयकर देने वालो की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है,बेस बढ़ गया है। बढ़ी हुई  संख्या के बाद 2020-21 तकलगभग तीन करोड़ लोग इससे बाहर हो गए है। आगे वो कह रहे है कि अगर 5 लाख इनकम वाले आयकर फाइल करने जाएंगे तो उनको कुछ नही देना होगा। जबकि अब तक सरकार को 18 हजार 500 करोड़ का टैक्स इनसे मिल रहा था। ये सब रवीश कुमार के बोल थे।
यानी पहले ये कह रहे थे कि टैक्स बहुत कम लोग देते है और उनसे सरकार को कुछ नही मिलता वही बाद में मोदी सरकार और मध्यमवर्ग से अपनी खुन्नस निकालने के लिए कह रहे है कि सरकार को इससे 18 हजार 500 करोड़ मिल रहे थे। खैर छोड़िए.

राफेल डील पर भी उन्होंने खूब सरकार को घेरने के लिए जमके प्रोग्राम किये,खूब जहर उगला पर बाद में सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया की राफेल सौदे में कोई गड़बड़ी नही हुई। ओह हो सकता है रवीश जी का परमज्ञान,दिव्यज्ञान जज साहब ने ना देखा हो।

हम तो बस यही कह सकते है कि ठीक है रवीश जी आप पत्रकार है, आपके हिसाब से आप महान पत्रकार भी है। लाखो लोग आपको फॉलो भी करते है। इसलिए आपकी ये जिम्मेदारी बनती है कि कम से कम देश हित के मसले पर झूठ ना फैलाए क्योकि देश ने आपको पत्रकारिता करने के लिए भेजा था क्योकि उसे आपसे ही उम्मीद थी। राजीनीति के लिए तो अभी पूरी जिंदगी बाकी है सर। आप कलम उठाइये, आप वाकई शब्दो के जादूगर है और इस बात को किसी अप्रूवल की बिल्कुल जरूरत नही है।