अरुणाचल प्रदेश में क्यों हो रहा है हिंसा? जानिए इससे जुड़ी हर खबर

अरुणाचल प्रदेश हिंसा की आग में जल रहा है। यहां छह समुदायों को स्थायी निवासी प्रमाण-पत्र यानि की PRC  दिए जाने के मामले को लेकर माहौल पूरी तरह से गर्म है..राज्य सरकार की इस सिफारिश पर स्थानीय लोग आगबबूला हैं..इस हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई है और राजधानी ईटानगर में उपमुख्यमंत्री चोवना मेन के घर को आग लगा दी गई और डिप्टी कमिश्नर का ऑफिस तोड़ दिया गया.

दरअसल, स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है कि इस प्रस्ताव से स्थानीय निवासियों के अधिकार प्रभावित होंगे. जिन समुदायों को स्थायी निवास प्रमाण-पत्र जारी करने का प्रस्ताव है वे गैर-अरुणाचल प्रदेश अनुसूचित जनजातियां यानि की APST हैं. हालांकि, अरुणाचल प्रदेश की सरकार ने राज्य के बाहर के 6 समुदायों को स्थायी निवासी सर्टिफिकेट देने वाले विधेयक को वापस ले लिया है..

यहां हमें इससे जूडे कई तथ्य जानने की जरूरत है तो आईए जानते है इनके बारे में-

1.स्थायी निवासी प्रमाण-पत्र यानि की PRC क्या है?

स्थायी निवास प्रमाण पत्र एक कानूनी दस्तावेज है, यह उन भारतीय नागरिकों को दिया जाता है जो देश में रहने का कोई प्रमाण दिखाता है, कई सरकारी सुविधाओं को लेने और दूसरे जरूरी कामों में इस प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ती है. ये सर्टीफिकेट आधिकारिक तौर पर स्थायी निवासी होने का प्रमाण पत्र माना जाता है.

2. राज्य सरकार की इसके पीछे क्या मंशा थी?

अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार है, जो छह गैर अरुणाचल आदिवासी समुदायों को पीआरसी देने पर विचार कर रही थी. राज्य सरकार में मंत्री नाबाम रेबिया के नेतृत्व में एक जॉइंट हाई पावर कमेटी यानि की JHPC ने विभिन्न लोगों से बात करके छह समुदायों को स्थायी निवास प्रमाण-पत्र देने का प्रस्ताव पेश किया जो अरुणाचल के स्थायी निवासी नहीं हैं, लेकिन नामसाई और चांगलांग के जिलों में दशकों से रह रहे हैं.  

3. ये छह समुदाय कौन हैं?

ये समुदाय नामसाई और चांगलांग जिलों में रहते हैं. इन समुदायों में देवरिस, सोनोवाल कछारी, मोरान, आदिवासी और मिशिंग शामिल हैं. इनके अलावा विजयनगर में रहने वाले गोरखा भी इस प्रस्ताव में शामिल हैं. इन सभी को पडोसी राज्य असम में अनसूचित जनजाति का दर्जा दिया हुआ है.

4. अरुणाचल प्रदेश में पीआरसी का विरोध क्यों हो रहा है?

अरुणाचल प्रदेश के कई समुदायों और संस्थाओं में इसे लेकर भारी विरोध है, उन्हें लगता है कि ऐसा करने से राज्य के आदिवासियों के हितों और अधिकारों को ना केवल ठेस पहुंचेगी. बल्कि उनके अधिकारों और हितों के साथ समझौता होगा.

5. फिलहाल इस प्रस्ताव की क्या स्थिति है?

इस प्रस्ताव को राज्य की विधानसभा में 23 फरवरी को पेश किया जाने वाला था. लेकिन कई संगठनों के आंदोलन के बाद इसे पेश नहीं किया जा सका. स्पीकर ने विधानसभा का सत्र भंग कर दिया.

6. इसमें केंद्र सरकार की क्या भूमिका है?

माना जा रहा है कि केंद्र सरकार भी ऐसा ही चाहती थी लेकिन अब केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य के लोगों से शांति और सदभाव बनाए रखने की अपील की है.

केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजु का कहना है कि राज्य सरकार पीआरसी जैसा कोई बिल नहीं लाने जा रही है बस केवल ज्वाइंट हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट को पेश करने का मकसद था. उनका कहना है कि कांग्रेस भी पीआरसी लाना चाहती थी. उन्होंने कहा कि बस नाबाम रेबिया के नेतृत्व में बनी JHPC की रिपोर्ट विधानसभा में पेश होने वाली थी.

बता दें कि, हालात को देखते हुए अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने लोगों से अपील की है कि वह भविष्य में भी कभी इस मुद्दे की बात नहीं करेंगे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वह उनकी मांग को 22 फरवरी को ही मान लिया गया था, ऐसे में अब वह प्रदर्शन ना करें. सीएम ने कहा कि सभी तरह के प्रदर्शन और धरने को बंद करें.

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