नई सरकार बनने के बाद ब्रिटेन क्यों छोड़ रहे हैं मुसलमान ?

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ब्रिटेन में चुनाव हुए, रिजल्ट आये और कंजर्वेटिव पार्टी को मिली एक बड़ी जीत. बोरिस जोनसन फिरसे ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चुने गये.. और बोरिस जोनसन जिनपर देशविरोधी होने के आरोप लगाये जा रहे थे उन्हें इतना बड़ा जनमत मिला कि विरोधियों के पाँव उखड़ गये. और इसी जनादेश के बाद अब वह ब्रिटेन को  यूरोपीय यूनियन से अलग करने वाले ब्रेक्जिट को आसानी से लागू कर पाएंगे.. लेकिन इससे ब्रिटेन का मुस्लिम समुदाय कुछ खास खुश नहीं है. और इसके पीछे तमाम बड़े कारण हैं, इसलिए पहले से ही राष्ट्रवादी विचारधारा वाली कंजर्वेटिव पार्टी को ब्रिटेन में तमाम तरह के विरोधों का सामना करना पड़ रहा था.. अब ब्रिटेन के मुस्लिम समुदाय को लेकर वहां नई चीजें सामने आ रहीं हैं.

दरअसल, चुनाव परिणामों के बाद ब्रिटिश-मुस्लिम ये मानने लगे हैं कि नई जॉनसन सरकार के अंदर उनकी कम्युनिटी को अपने भविष्य की चिंताएं सता रहीं है. न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक यही वो वजहें हैं जिनके चलते ब्रिटेन में रह रहे मुसलमानों ने देश को छोड़ने की तैयारी करना शुरू कर दिया है.

बोरिस जोनसन पर चुनाव के पहले से ही इस्लामोफोबिया का शिकार होने के आरोप लगते रहे हैं और अब क्यूंकि नए जनादेश के बाद वो आने वाले पांच साल तक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री रहेंगे. मुसलमानों के देश छोड़ने की खबरों के बीच मुस्लिम काउंसिल ऑफ़ ब्रिटेन प्रधानमंत्री बोरिस जोनसन से मुलाकात कर मुसलमानों को आश्वस्त कर चुका है.

बोरिस जोनसन पर क्यों लग रहे हैं ऐसे आरोप

दरअसल बोरिस जोनसन पहले कई दफा मुसलमानों को लेकर विवादास्पद टिप्पणियाँ कर चुके हैं जिसकी वजह से उनपर इस्लामोफोबिया का शिकार होने के आरोप लगते रहे हैं. जॉनसन ने साल 2005 में ‘स्पेक्टेटर’ में छापे गये एक लेख में टिप्पणी करके ये कहा था कि जनता का इस्लाम से डरना स्वाभाविक है. ब्रिटेन में मुसलमान समुदाय अपने स्थायित्व को लेकर लड़ाई लड़ रहा है और वहां की सरकार अपने तरीके से नीतियों को लागू कर रही है..