आखिर हर कोई धोनी जैसा क्यों नही बन सकता

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भाई वर्ल्ड कप नजदीक है और उससे पहले ही धोनी भाई फॉर्म में आ गए है और फॉर्म में भी ऐसे आए है कि विरोधी तो बस उनके उनके आगे धूल ही फांकते नजर आ रहे है। यूँ तो अपने धोनी भाई 37 साल के हो गए लेकिन आज भी उनका बल्ला रन नही बल्कि आग उगलता है। पिछली 5 पारियों में उन्होंने जिस हिसाब का खेल दिखाया है उसको देखते हुए आसानी से उनके कद को आंका जा सकता है। पांच मैचों की चार पारी में धोनी ने जबर खेल दिखाते हुए  241 रन ठोक दिए। पिच पर एमएस की फुर्ती तो आज भी नए लौंडो को फेल करती है। ये सब देखकर कोई भी आसानी से कह सकता है कि शेर कभी बूढ़ा नही होता। यार कसम से एक क्वालिटी हो तो बताऊं,बंदा जब तक मैदान में रहता है बस छाया ही रहता है। धोनी कबकी कप्तानी छोड़ चुके है और फिलहाल दिल्ली वाला लोंडा विराट कोहली टीम की कप्तानी कर रहा हो लेकिन मैदान पर टीम को संभालने का काम खुद धोनी ही करते है। ना जाने कितने ऐसे मौके आये जब धोनी ने विरोधी खेमे के बल्लेबाज को  ड्रेसिंग रूम जाकर लोअर-टीशर्ट में बैठकर मैच देखने को मजबूर कर दिया। अरे यानी आउट कर दिया।


भाई साहब जब तक धोनी मैदान में रहते है तब तक तो अंपायर की भी ज़रूरत नही पड़ती क्योकि उनकी पारखी नज़रे ही सब जान समझकर फैसला सुना देती है। ना जाने कितनी बार ऐसा हुआ है कि धोनी के चलते अंपायर को खुद ही अपना फैसला बदलना पड़ गया। अब यही वजह भी रही उनके फैन्स ने डीआरएस की फुल फॉर्म को बदलके धोनी रिव्यू सिस्टम कहना शुरू कर दिया। 
बन्दे को रन आउट करना बिल्कुल किम जोंग को धमकी देने जैसा ही है। फुर्ती का आलम ये है कि इनकी विकेटकीपिंग के दौरान कोई बल्लेबाज अगर अपना पांव उठा दे तो बस नतीजा आउट ही होता है। 

इंटरनेशनल मैचों में विकेट के पीछे सबसे ज्यादा शिकार की बात करे तो धोनी भाई मार्क वाउचर,एडम गिलक्रिस्ट के बाद तीसरे नंबर पर है। यानी एशिया में उनसे बेहतर कोई विकेटकीपर नही है।


यार देखो आप खूब गरियाओ धोनी को लेकिन एक बात तो आपको भी माननी पड़ेगी की बंदा क्रिकेट के लिए डेडिकेटिड तो है।अगर धोनी के नाम वनडे मे सिर्फ 10 और टेस्ट में 6 शतक दर्ज है तो ऐसा नही है कि वो रन बनाने के मामले में कमजोर है। इसके पीछे की वजह थी दूसरे खिलाड़ियों को मौक़ा देना।बड़े बड़े  क्रिकेट विद्वान भी इस चीज को मानते है कि धोनी और सौरव गांगुली ही ऐसे कप्तान रहे जिन्होंने अपने आप को साइड में करके पहले और खिलाड़ियों को मौका देने के बारे में सोचा। धोनी यूँ तो हर डाउन पर खेल चुके है पर अगर आप रिकॉर्ड उठाके देखो तो दूसरे और तीसरे नंबर पर धोनी का रिकॉर्ड काफी बेहतर रहा है लेकिन बाद में जब उन्हें लगा कि विराट उनसे बढ़िया कर रहा है तो उन्होंने खुद  छठे और सातवें डाउन पर आकर खेलना शुरू कर दिया। 

आज ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की आंखों में आंख डालकर देखने वाले विराट कोहली, अपनी स्पीड से चौकाने वाले मोहम्मद शमी,भुवनेश्वर कुमार और स्पिन के बलबूते बड़े बड़े बल्लेबाजों के विकेट उड़ाने वाले युजवेंद्र चहल,आर अश्विन और कुलदीप यादव जैसे खिलाड़ियों को चमकने का मौक़ा भी धौनी ने ही अपनी कप्तानी में दिया था। अब इतना भी आप मानोगे की आउट ऑफ फ़ॉर्म जाने से दुनिया का कोई बल्लेबाज नही बच सका है। 2018 में धोनी का बल्ला थोड़ा खामोश क्या हुआ लोगो ने उन्हें चुका हुआ समझकर बोझ करार दिया लेकिन 2019 में धोनी एक बार फिर से साबित कर रहे है कि सोना जितना पुराना पड़ता जाता है उसकी चमक उतनी ही बढ़िया होती जाती है। 
आप धोनी के फैन हो या आलोचक लेकिन मैदान पर धोनी के इम्पेक्ट को चाहकर भी नजरअंदाज नही सकते। फिलहाल की सच्चाई तो यही है।