तो इस वकील की वजह से जस्टिस यू यू ललित ने राम मंदिर से खुद को अलग कर लिया

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तो इस वजह के चलते जस्टिस यू यू ललित ने खुद को राम मंदिर की सुनवाई से किया था अलग ?

सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर पर सुनवाई के लिए बैठी बेंच में से जस्टिस यू यू ललित ने खुद को अलग कर लिया है..माना जा रहा था कि जस्टिस ललित राम मंदिर के फैसले में अहम् रोल निभाने वाले थे इसके बाद भी आखिर ऐसा क्या हुआ कि जज ललित खुद इस केस से बाहर हो गये!?
10 जनवरी को जैसे ही सुनवाई शुरू हुई मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने बेंच में जस्ट‍िस उदय उमेश ललित पर यह कहकर सवाल खड़ा कर दिया कि जज यू यू ललित कल्याण सिंह के पक्ष में केस लड़ चुके हैं. कोर्ट में राजीव धवन के इस दलील को रखते ही जस्टिस ललित ने खुद को इस बेंच से अलग कर लिया जिसके बाद राम मंदिर की सुनवाई को टाल दिया गया और फिर मिल गयी एक नई तारिख.
मामला 1994 का है जब अयोध्या की बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया था और इस मामले को लेकर कल्याण सिंह को कोर्ट की अवहेलना का नोटिस मिला था. इस केस को लेकर उस समय वकील रहे जस्टिस ललित कोर्ट में पेश हुए थे.

राजीव धवन वही वकील है जिन्होंने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा से कोर्ट में चिल्लाकर-चिल्लाकर बहस किया था . चीफ जस्टिस की फटकार लगने के बाद धवन ने वकालत छोड़ने का फैसला किया था लेकिन बाद में राम मंदिर के खिलाफ केस लड़ने के लिए तैयार हो गये.
राजीव धवन उन वकीलों में शामिल हैं जो राम मंदिर के फैसले में रोड़ा अटकाते आये हैं. इस बार भी राजीव धवन द्वारा ही जस्टिस ललित पर टिप्पणी के बाद उन्होंने खुद को केस से अलग कर लिया और फिर इसी वजह से इस बार की भी सुनवाई टाल दी गयी.
5 दिसम्बर 2017 को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. कोर्ट में कांग्रेस नेता और वकील कपिल सिब्बल,राजीव धवन और दुष्यंत दवे जैसे अनेक वरिष्ठ वकीलों ने मिलकर राम मंदिर की सुनवाई 2019 तक टालने की वकालत की थी लेकिन फैसला उनके पक्ष में नही आया.
वकील राजीव धवन बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का भी प्रतिनिध्तिव कर रहे हैं. और ये उन कांग्रेसी वकीलों में शामिल है जिनके बारे में पीएम मोदी ने अपने इंटरव्यू में जिक्र किया था कि वे राम मंदिर के फैसले में रोड़ा अटका रहे हैं.

जो वकील शुरुवात से राम मंदिर के खिलाफ खड़ा दिखाई दे रहा है. वकालत छोड़ने के बाद भी मुस्लिम पक्षकारों और कांग्रेसी नेताओं से मिलीभगत से राम मंदिर के खिलाफ केस लड़ रहा है, वो हैं राजीव धवन. पूरा मामला साफ़ हो गया है कि राजीव धवन की टिप्पणी के बाद ही जस्टिस यू यू ललित ने खुद को राम मंदिर के केस अलग कर लिया जिससे फैसले पर कोई ऊँगली ना उठा सके. अब धवन का कहना है कि उन्होंने किसी ख़ास मकसद से ये टिप्पणी नही की थी लेकिन उनकी मंशा उनकी टिप्पणी से साबित हो गयी थी.

खैर अब 29 जनवरी को सुनवाई की तारिख तय की गयी है. नई बेंच बैठेगी, सुनवाई होगी और फैसला क्या होगा ये तो उसी दिन पता चलेगा.