आखिर जगन्नाथ मंदिर में जाने से क्यों रोक दिए जाते हैं गांधी परिवार के सदस्य? जानिए पूरी कहानी

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हिन्दुओं की आस्था से जुड़े देश के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक जगन्नाथ मंदिर, देश पर सबसे ज्यादा सालों तक राज करने वाली पार्टी कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाँधी के परिवार में से कोई भी जगन्नाथ मंदिर क्यों नही जा सकता, एक तरफ राहुल गाँधी देश के अलग अलग मन्दिरों में घूम रहे है और खुद को जनेयूधारी ब्राहमण बता रहे हैं लेकिन जगनाथ मन्दिर में चाहकर भी राहुल गाँधी क्यों नही जा सकते.. आइये हम आपको इसके पीछे की असली कहानी बताते हैं…
आपको बता दें कि वर्ष 1984 में भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी इस मंदिर में एंट्री की अनुमति नही दी गयी थी. दरअसल इंदिरा ने फ़िरोज़ जहांगीर गांधी से शादी की थी, जो कि एक पारसी थे. और शादी के बाद लड़की का गोत्र बदलकर जो लड़के का गोत्र होता है वही हो जाता है. पारसी से शादी करके इंदिरा गाँधी भी पारसी हो गयी थी और पारसी का कोई गोत्र नही होता.. यही नही बताया जाता है कि हज़ारों वर्ष पहले जगन्नाथ मंदिर पर कई बार आक्रामण हुआ और ये सभी हमले एक धर्म विशेष के शासकों ने किए… मन्दिर और धर्म को सुरक्षित करने के लिए इस मंदिर में गैर हिन्दुओं के प्रवेश पर पूर्णरोप से पाबंदी लगा दी गयी
जगन्नाथ मंदिर के वरिष्ठ सेवायत का कहना है कि वे मंदिर में राहुल गाँधी और प्रियंका गांधी को भी एंट्री की इजाजत नही देंगे.. क्योंकि वो राहुल गाँधी को हिन्दू नही मानते. उन्होंने बताया कि राहुल गांधी का गोत्र फ़िरोज़ गांधी से माना जाएगा ना कि नेहरू से. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी भले अपने आप को जनेऊधारी दत्तात्रेय गोत्र का कौल ब्राह्मण बताएं लेकिन सच्चाई ये है कि वो फ़िरोज़ जहांगीर गांधी के पौत्र हैं और फ़िरोज़ जहांगीर गांधी हिंदू नहीं थे. लेकिन अगर उन्हें भगवान् के दर्शन करने है तो साल में एक बार निकलने वाले जगन्नाथ यात्रा में शामिल जरूर हो सकते है लेकिन मुख्य मन्दिर में प्रवेश नही दिया जाएगा.


ओडिशा, जगन्नाथ पुरी के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. यह मंदिर समुद्र के बिलकुल किनारे पर है. हर हिन्दू यह जरूर चाहता है कि जिन्दगी में कम से कम एक बार वो भगवान् जगन्नाथ के दर्शन जरुर करें. लेकिन अगर वो हिन्दू नही है तो फिर चाहे वो प्रधानमंत्री ही क्यों ना हो उसे इस मंदिर में प्रवेश नही मिलेगा.. मंदिर के मुख्यद्वार पर ही पांच भाषाओं में साफ़ साफ़ लिखा है कि गैर हिन्दुओं का प्रवेश इस मंदिर में वर्जित है. मन्दिर प्रशासन, सिर्फ हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लोगों को ही भगवान जगन्नाथ के मंदिर में प्रवेश की इजाज़त देता है. बाकियों के लिए मंदिर में प्रवेश पर सदियों से प्रतिबंध लगा हुआ है.
कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष राहुल गाँधी केदारनाथ गये, मानसरोवर गये लेकिन हिन्दुओं के चारों धाम में शामिल जगन्नाथ मन्दिर में जाने की हिम्मत नही जुटा पाए… और ना ही वे कोशिश कर पाए.. खुद को हिन्दू साबित करने के लिए राहुल गाँधी ने खुद को जनयूधारी तक बताया लेकिन मंदिर सेवायतो का कहना है कि उन्हें मन्दिर में जाने की इजाजत नही दी जायेगी.
यहाँ आपको यह भी जानना जरूरी है कि जगन्नाथ मंदिर को अब तक 20 बार विदेशी हमलावरों ने लूटा है. खास तौर पर मुस्लिम सुल्तानों और बादशाहों द्वारा जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियों को नष्ट की कोशिश की गयी ओडिशा पर बार-बार हमला किया गया लेकिन ये हमलावर जगन्नाथ मंदिर की तीन प्रमुख मूर्तियों, भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की मूर्तियों को नष्ट नहीं कर सके, क्योंकि मंदिर के पुजारियों द्वारा बार-बार मूर्तियों को छुपा दिया जाता ..इतना ही नही एक बार तो मूर्तियों को बचाने के लिए ओड़िसा से दूर हैदराबाद भेज दिया गया था. आप विश्वास नही कर पायेंगे कि हमलावरों की वजह से भगवान् जगन्नाथ को मन्दिर तक छोड़ना पड़ा था. पिछले एक हजार वर्षों में मुस्लिम बादशाहों और सुल्तानों के राज में हिंदुओं के हजारों मंदिरों को तोड़ा गया. अयोध्या में राम जन्म भूमि, काशी विश्वनाथ और मथुरा में कृष्ण जन्म भूमि का विवाद भी इसी इतिहास से जुड़ा है और इसका सबूत है.
इतना ही नही सोमनाथ मंदिर को भी नष्ट करने के लिए हमलावरों ने 17 बार कोशिश की थी. हमला करने वालों में एक विशेष समुदाय शामिल था. ऐसे में इस मंदिर में हिन्दुओं के अलावा किसी भी धर्म के लोगों की एंट्री की इजाजत आज भी नही है. गाँधी परिवार को आज भी यहाँ के लोग हिन्दू नही मानते. इसलिए राहुल गाँधी चाहकर भी भगवान जगन्नाथ के दर्शन नही कर सकते.. हालाँकि कांग्रेस और खुद राहुल गाँधी खुद को जनयूधारी ब्राहमण बताते रहे हैं. कभी उन्हें राम भक्त दिखाया जाता है तो कभी शंकर भक्त,, कभी कैलाश मानसरोवर जाते हैं तो कभी केदारनाथ.. राहुल गाँधी खुद को हिन्दू साबित करने में कोई कसर नही छोड़ रहे हैं लेकिन साहब इतिहास किसी का पीछा नही छोड़ता..


जगन्नाथ मन्दिर में सिर्फ सनातनी हिन्दुओं को ही जाने की इजाजत है. इस मंदिर में प्रवेश के लिए किसी व्यक्ति का हिंदू होना अनिवार्य माना जाता है.

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