NRC लिस्ट पर आखिर ये लोग क्यों कर रहे हैं विरोध!

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सरहद पार करके धीरे धीरे लोग भारत में अवैध रूप से घुसते आये और इतनी संख्या में आ गये कि इन्हें पहचानना भी मुश्किल हो गया है. सरकार और स्थानीय लोगों के लिए यही लोग मुसीबत बनते चले गये. 20वीं सदी की शुरुआत से ही बांग्लादेश से अवैध घुसपैठियों की समस्या से जूझ रहा असम अकेला राज्य है जहां पहली बार 1951 में राष्ट्रीय नागरिक पंजी NRC तैयार किया गया था हालाँकि अब असम में एनआरसी की अंतिम सूची जारी हो गई है. गृह मंत्रालय द्वारा जारी एनआरसी की लिस्ट में 3 करोड़ 11 लाख (3,11,21,004) लोगों को शामिल किया गया है. जबकि सूची से 19 लाख (19,06,657) लोगों को बाहर रखा गया है. उनके मुताबिक इन लोगों ने अपने क्‍लेम नहीं दिए थे. हालाँकि जो भारतीय है और उनका नाम इस लिस्ट में नही आया है तो उन्हें चिंता करने की जरूरत नही है. इसपर हम आगे बात करेंगे.. फिलहाल हम बात करते हैं एनआरसी की…

साल 2005: तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अगुआई में केंद्र सरकार, असम सरकार और ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के बीच त्रिपक्षीय बैठक हुई, जिसमें तय किया गया कि असम समझौते में किए गए वादों को पूरा करने के लिए NRC को अपडेट करने की दिशा में कदम उठाए जाने चाहिए. साल 2009 में असम पब्लिक वर्क्स नाम के एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ रुख किया. फिर ये संस्था कोर्ट पहुँच गयी. दिसंबर 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि एनआरसी को अपडेट करने का काम शुरू होना चाहिए लेकिन 2014 में ही चुनाव होना था..इसमें सरकार जोखिम लेना उचित नही समझा होगा..हालाँकि 2014 के सरकार बदल गयी.. देश में मोदी सरकार आई और एनआरसी पर काम शुरू हुआ . 31 दिसंबर 2017 को सरकार ने एनआरसी का पहला ड्राफ्ट,. 30 जुलाई 2018 को एनआरसी का दूसरा ड्राफ्ट असम सरकार ने जारी किया. इसके लिए 3 करोड़ 29 लाख लोगों ने अप्लाई किया था, जिसमें से 2 करोड़ 89 लाख लोगों को वास्तविक नागरिक माना गया. ड्राफ्ट में 40 लाख लोगों को बाहर रखा गया.. 31 दिसम्बर 2018 फाइनल लिस्ट जारी करने की आखिरी तारिख थी लेकिन हो नही पाया..इसके बाद 26 जून 2019 को बहिष्करण सूची की एक और लिस्ट सामने आई. इस लिस्ट में 1लाख 02,462 नाम थे, जिसके बाद ड्राफ्ट से बाहर रखे गये लोगों संख्या 41लाख 10, 169 तक पहुंच गई, मतलब इतने लोग बाहरी माने गये और आख़िरकार 31 अगस्त को सरकार की फाइनल लिस्ट आ ही गयी.. जिसमें से लगभग 19 लाख लोगों को फिलहाल भारतीय नागरिक नही माना गया है.

यहाँ आपको ये जानना चाहिए कि एनआरसी की पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की निगरानी पर हो रही थी. हालाँकि सरकार ने इन लोगों को 120 दिन का समय दिया है. अब जिन लोगों का नाम लिस्ट में नही आया है उनके पास आप्शन क्या है? वे अब क्या कर सकते है.. इसके लिए 400 फॉरनर्स ट्रिब्यूनल्स स्थापित किये जा रहे हैं. यहाँ आपको बता दूँ कि फॉरनर्स ट्रिब्यूनल अर्ध न्यायिक कोर्ट होते हैं, जो एनआरसी सूची से निकाले गए लोगों की अपील सुनते हैं. एनआरसी की अंतिम सूची से निकाले गए लोगों को तब तक हिरासत में नहीं लिया जा सकता, जब तक फॉरनर्स ट्रिब्यूनल अपना फैसला नहीं सुना देते और एफटी के आदेश से संतुष्ट नहीं होने पर उच्च अदालत में याचिका दायर कर सकते हैं.”

 वैसे फाइनल लिस्ट जारी होने से पहले ही सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इतंजाम किये गये थे.. कई लोग अपना नाम इस लिस्ट में ना आने की वजह से दुखी थी. वहीँ दूसरी तरफ कांगेस के ही शासनकाल में इस काम को करने का आदेश कोर्ट ने दिया था लेकिन कांग्रेस की राजनीति कहें, ढीला रवैया कहें ये काम उनके शासनकाल में हो नही पाया अब कांग्रेस इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में लगी है..जिन नेताओं ने 2014 से पहले एनआरसी को सही बता रहे थे वहीँ लोग आज विरोध कर रहे हैं..पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए लोकसभा में स्पीकर पर कागज के टुकड़े तक फेंक दिए थे और आज वहीँ ममता दीदी विरोध कर रही हैं. लिस्ट आने के बाद ही कांग्रेस ने बैठक की और आगे रणनीति पर विचार कर रही है.

खैर यहा हम सबको ये सोचना चाहिए कि हमारे देश के संसाधनों को बाहर से व्यापरियों यानी अंग्रेजों और आक्रान्ताओं ने लूटा है और अब रोहिंग्या और बाग्लादेशी बांग्लादेशी घुसपैठी हमारे संसाधनों पर हक़ जता रहे हैं..वे भारत के नागरिक भी नही है, भारत के गरीबों..आपके और हमारे हिस्से की रोटी खा रहे हैं. क्या ऐसे लोगों को वापस नही भेजा जाना चाहिए? जो लोग बाग्लादेश से आकर कुछ पार्टियों के लिए वोट बैंक बन गये हैं, आपके हक़ का संसाधन, पैसा और सुविधा ले रहे हैं क्या उन्हें बाहर नही जाना चाहिए, उन्हें उनके देश भेजा जाना चाहिए? बड़े बड़े देश अवैध रूप से देश में घुसे लोगों को नहीं रहने दे रहे हैं क्यों कि ये देश के विकास में रुकावट होते हैं, सुरक्षा के लिए खतरा होते हैं तो भारत तो अभी प्रगतिशील देश ही तो है, और ये लोग भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बने है तो ये देश बाग्लादेश या किसी देश से आये घुसपैठियों पर मेहरबान क्यों हो?