बजट पर भारतीय मीडिया इतना बंटा हुआ क्यों है ?

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केंद्र सरकार ने अपना बजट पेश कर दिया है जिसमे आयकर की सीमा ढाई लाख से बढ़ाकर पांच लाख करने,किसानों को 6 हज़ार सालाना देंने जैसी कई घोषणाएं की। ख़ैर, कल के बजट के बारे में देश की मीडिया क्या सोचती है ये भी आपके लिए जानना बेहद जरुरी है। तो चलिए आपको बताते है।

सबसे पहले बात करते है बीबीसी हिंदी की .
बीबीसी हिंदी ने इस बजट को चुनावी करार दिया है। 
उसका मानना है कि बजट से काफी उम्मीदे थी कि कृषि क्षेत्र के लिए मोदी सरकार कुछ खास करेगी लेकिन ऐसा कुछ नही हुआ। 
दो हेक्टेयर जमीन वाले किसानों को सरकार द्वारा हर साल 6000 रुपए दिए जाने के फैसले पर बीबीसी लिख रहा है कि केंद्र ने इस योजना को तेलंगाना से कॉपी किया है। 
बीबीसी हिंदी ने सवाल उठाते हुए पूछा है कि जिस हिस्से को ध्यान में रखके बजट में घोषणाएं हुई है क्या वो भाजपा को अगले चुनाव में फायदा दिला पाएगा।
बीबीसी हिंदी तो बजट से इतनी चिढ़ होती दिखाई दी कि उसने संवैधानिक पद पर बैठे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसद में मेज पर हाथ मारने को लेकर फनी वीडियो तक बना दिया। 


बजट को बढ़िया बताते हुए ज़ी न्यूज़ कह रहा है कि ये बजट किसानों के साथ साथ मध्यम वर्ग और युवाओं का बजट भी कहलायेगा। ज़ी न्यूज़ के मुताबिक बजट से लोगो को काफी फायदा पहुँचेगा ,पिछले कई सालो के बजट के मुकाबले ये बजट दमदार है और  इसमें सभी का ध्यान रखा गया है।

एनडीटीवी वाले रवीश कुमार ने बजट को चुनावी बताते हुए कहा कि सरकार का ये बजट महज छलावा है।अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि गोल गोल गोयल बजट- डेडलाइन का पता नही केवल हेडलाइन है। उन्होंने लिखा कि सरकार को बताना चहिये की उसके राज में कितने मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित कराई गई है। नमामि गंगे में बजट कम किये जाने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने लिखा कि नमामि गंगे का बजट 2250 करोड़ से घटाकर 700 करोड़ कर दिया। अब गंगा मैया सवाल तो नही करेगी की 1500 करोड़ किसके कहने पर घटाए। 


 नवभारत टाइम्स ने बजट को मिला जुला करार देते हुए कहा है कि बजट चुनावी तो है लेकिन 5 लाख रुपए तक कि आय को टैक्स फ्री करना और छोटे किसानों को वार्षिक भत्ते के साथ मजदूरों को आर्थिक मदद देने के साथ साथ लम्बे समय समय से सुस्त पड़े रियल एस्टेट सेक्टर के लिए ऐलान कर सरकार ने मिडल क्लास के वोटर को खुश कर दिया है।

अमर उजाला लिखता है कि बजट भले चुनावी नजर आ रहा हो लेकिन इसमें गांव,किसान,मिडलक्लास, सीनियर सिटीजन,पेंशनर, और रियल स्टेट से जुड़े लोगों का ध्यान रखा गया है। किसानों को छः हजार रुपए की आर्थिक मदद देना और नौकरीपेशा मध्यक्रम की आयकर छूट सीमा को ढाई लाख से बढ़ाकर पांच लाख करना ना सिर्फ बड़ी घोषणाएं है बल्कि इससे अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुँचेगा।

केंद्र सरकार के खिलाफ हमेशा आग उगलने वाले द वायर ने इस बजट को चालाकी से पेश किया गया बजट करार देते हुए कहा हुए कहा कि सरकार के इस कदम से शायद ही किसी को फायदा पहुँचेगा।

दैनिक जागरण ने बजट को ठीक ठाक करार देते हुए कहा है कि सरकार ने इस साल रोजगार बढ़ाने की तरफ खासा जोर दिया है और इसको बढ़ाने के लिए मुद्रा योजना के तहत  सरकार कर्मचारियों को तीन लाख करोड़ का फंड आवंटित करेगी। इस बजट के बाद कहा जा सकता है कि रोजगार को लेकर लोगो की उम्मीदे कुछ हद तक पूरी हुई है।
The quint लिखता है कि बजट पूरी तरीके से चुनावी है। हालांकि छोटे किसानों को सालाना 6000 देने पर क्विंट कह रहा है कि 
एक बात स्पष्ठ है कि छोटे किसानों को सालाना 6000 देने का प्रस्ताव उन्हें कुछ भी नही देने से तो बेहतर ही है। इसके अलावा 60 वर्ष तक कि उम्र तक 3000 रुपये प्रति माह देने की योजना के बारे में द क्विंट कहता है कि ये रकम बड़ी तो नही है लेकिन ये बहुप्रतीक्षित न्यूनतम आय गारंटी आरम्भ करने का संकेत देती है। राहुल गांधी ने कांग्रेस के निर्वाचित होने पर इसी गारंटी का वादा किया था।

ह्म्म्म,ये थी हमारे देश के मीडिया की प्रतिक्रिया,मीडिया बजट के मुद्दे पर भी अच्छे और बुरे के खेल में फंसकर एकजुटता के साथ देश की जनता को सच नही बता सका। 

लेकिन असल मे ये बजट कैसा है आइए समझने की कोशिश करते है। 

सरकार द्वाराकिसानों को 6 हज़ार देने का प्रस्ताव उन्हें कुछ ना देने से तो बेहतर ही है।
गरीब मजदूरो को 60 साल की उम्र होने पर 3000 रुपए प्रतिमाह की पेंशन देना इस बजट का सबसे बेहतरीन फैसला कह सकते है।
रक्षा बजट में व्रद्धि सीमा पर तैनात जवान और देश हित के लिहाज से एक बेहतरीन कदम कह सकते है।
आयकर में छूट को ढाई लाख से बढ़ाकर 5 लाख करने से मिडल क्लास को काफी फायदा पहुँचता दिखाई देगा इसलिए इसे बजट की सबसे अहम घोषणा भी कह सकते है।
अगर सरकार ने नमामि गंगे का बजट कम करके किसानों और मजदूरों के हितों के लिए आवंटन राशि और ज्यादा करने का फैसला लिया है तो इसमें गलत क्या है ?? 
इसके अलावा बहुत कुछ अच्छा हुआ, कुछ जगह ऐसी भी रही जहां थोड़ी बहुत कमियां रही लेकिन ये सालाना बजट है। बजट हर साल आते और जाते है। इसलिए इस बजट को लेकर ही शोर मचाने का क्या मतलब है??? देश बड़ा है अगर कुछ कमियां रह भी गई तो क्या हो गया ?? बजट तो आगे भी आएंगे इसलिए हमें इसको ही स्वीकारते हुए आगे बढ़ने की ज़रूरत है। फिलहाल समय की यही मांग भी है।

हम्म्म्म,तो बजट के बाद ये थी भारत की मीडिया की प्रतिक्रिया। अब आप खुद ये डिसाइड कर लीजिएगा की आख़िर ये बजट कितना लाभकारी है और कितना चुनावी।