आखिर भारत को क्यों बदनाम करती है विदेशी मीडिया?

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आज हम बात करने जा रहे हैं एक ऐसी विदेशी मीडिया के बारे में जिसका भारत को बदनाम करने का एक इतिहास रहा है. हम बात कर रहे हैं अमेरिकी अखबार न्यू यॉर्क टाइम्स के बारे में. न्यू यॉर्क टाइम्स, जो कि पहले भी आधे अधूरे तथ्यों के साथ एंटी इंडिया रिपोर्टिंग करता सामने आया था, इस बार फिर इस अखबार ने भारत के खिलाफ बहुत शर्मनाक रिपोर्टिंग की है. हाल ही में हुए पुलवामा आतंकी हमले को इस अखबार ने सिर्फ “एक विस्फोट” बताया है.

इस खबर को ओपिन्डिया न्यूज़ वेबसाइट ने बहुत गहराई में कवर किया है.

जिस आर्टिकल को इस खबर में दिखाया गया है उसकी हैडलाइन भी बिलकुल असंवेदनशील थी. लेकिन जब सोशल मीडिया पर इसका विरोध हुआ तो न्यू यॉर्क टाइम्स को अपनी हैडलाइन बदलनी पढ़ी.
हालांकि पुलवामा आतंकी घटना जिसे जैश ऐ मोहम्मद ने अंजाम दिया था उसे ये अखबार अभी भी एक विस्फोट के रूप में ही दिखा रहा है.

दरअसल ग्यारह फ़रवरी के दिन न्यू यॉर्क टाइम्स में एक आर्टिकल प्रकाशित हुआ जिसमें न्यू यॉर्क टाइम्स ये दावा करता है कि जैसे जैसे 2019 लोक सभा चुनाव नजदीक आ रहे थे वैसे वैसे प्रधानमंत्री मोदी कि पॉपुलैरिटी कम होती जा रही थी. अख़बार में ये भी दावा किया गया कि तमाम विपक्षी दल एक नए जोश के साथ सरकार को भ्रष्टाचार के आरोप में घेरने में सफल रहे. आगे आर्टिकल में लिखा है, लेकिन कश्मीर में “एक विस्फोट” ने और भारत पाकिस्तान सेना के आमने सामने के बाद प्रधानमंत्री मोदी कि लोकप्रियता गिरनी रुक गयी. ये जानकर आपको आश्चर्य नहीं होगा कि इस आर्टिकल कि एक को ऑथर मारिया अबी हबीब हैं जिन्होने 3 मार्च को एक प्रो पाकिस्तान आर्टिकल लिखा था.

इस आर्टिकल में हबीब भारत के मिग फाइटर को पहुंचे नुकसान के बारे में तो बात करती हैं लेकिन पाकिस्तान के F -16 के नुकसान कि कोई बात नहीं करती. भारत पाकिस्तान कि डॉग फाइट के बाद पाकिस्तान के लोगों ने मीडिया को बताया था कि उन्होंने तीन पायलट को इजेक्ट करते देखा था. एक तो भारतीय पायलट अभिनन्दन थे. और बाकी दो पायलट पाकिस्तान के थे जो F-16 में सवार थे. आपको बता दे कि F-16 में दो पायलट बैठते हैं.

ग्यारह फ़रवरी के दिन लिखे आर्टिकल में आगे बताया जाता है कि कैसे प्रधानमंत्री मोदी ने पाकिस्तान के खिलाफ एयर स्ट्राइक के आदेश दिए जिसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी हमला किया. ये बात भी बिलकुल तथ्यों के विपरीत लिखी गयी है. क्योंकि सबसे पहले इंडियन एयर फ़ोर्स कि ये स्ट्राइक पाकिस्तान के खिलाफ नहीं थी. वायु सेना ने प्रेस कांफ्रेंस करके ये साफ़ कर दिया था कि ये एयर स्ट्राइक आतंकवाद के खिलाफ थी और भारत के पास पुख्ता इंटेलिजेंस थी कि लोक सभा चुनावों के चलते आतंकवादी आगे और हमले कर सकते हैं. इंडियन एयर फ़ोर्स ने एयर स्ट्राइक किसी सिविलियन एरिया या मिलिट्री इंस्टालेशन में नहीं की थी.

दूसरा पाकिस्तान का हमला जवाबी कार्रवाई नहीं था. जैश के ठिकानों पर इंडियन एयर फ़ोर्स कि स्ट्राइक से पाकिस्तान सही मायने में बौखला गया था और उसने भारत कि मिलिट्री इंस्टालेशन पर हमला करने कि कोशिश की थी.

इसके बाद न्यू यॉर्क टाइम्स इस एयर स्ट्राइक के राजनीतिक फायदे गिना कर इस हमले कि गंभीरता को ही ख़त्म कर देता है. आतंकवाद सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक खतरा है. जब अमेरिका ने ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान के अबोटाबाद में घुस कर मारा था तब इस अखबार ने ऐसे सवाल क्यों नहीं उठाये थे.

हाल ही में उत्तर प्रदेश के सीतापुर में आवारा कुत्तों के झुंड बच्चों पर हमला कर रहे थे. इससे स्थानीय लोगों में काफी डर था और लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने से भी डर रहे थे. लेकिन इसी न्यू यॉर्क टाइम्स अखबार ने इस घटना को उत्तर प्रदेश में बंद इललीगल स्लॉटर हाउस से जोड़ दिया. इललीगल स्लॉटर हाउस नियमों के खिलाफ चल रहे थे जिन्हें बंद करने के कोर्ट ने आदेश दिए थे.

इसके पहले इसी अखबार ने ये दावा किया था कि 2014 के बाद से गौ रक्षा को लेकर कैसे दलितों और मुसलामानों पर हमला किया जा रहा है. इस बार भी इस अखबार ने आधे अधूरे तथ्य दिखाए थे और तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश किया था. हाला कि स्वाति गोएल शर्मा ने इनके झूठ का पर्दाफाश ट्विटर पर कर दिया था.
अब सोचने कि बात ये है कि अखबार के विदेशी और अमेरिकी होने से लोग अपने देश के नियम कानूनों को क्यों छोटा कर देते हैं. क्या इन अखबारों कि क्रेडिबिलिटी यानी विश्वसनीयता भारत के कानून और संविधान से भी ऊपर है? ये एक फैशन बनता जा रहा है जहाँ अगर विदेशी अखबार कोई ऐसी खबर चला दे जिससे भारत के ऊपर अस्पष्ट आरोप लगे तो लोग ऐसे आरोपों पर विश्वास करने लगते हैं.

अपने अधूरे और गलत तथ्यों के आधार पर ये अखबार हमेशा ही भारत के खिलाफ लिखता आया है. कोई भी अखबार सरकार पर सवाल उठा सकता है. सवाल उठाना एक लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है. लेकिन सवालों कि आड़ में जब कोई अख़बार किसी देश को अपमानित करने में लग जाये तो ऐसे अखबार का पर्दा फाश होना भी ज़रूरी होता है. हमने इसे अपनी जिम्मेदारी समझा कि आप तक ऐसे अखबारों का विदेशी प्रोपगंडा जो कि झूठ के आधार पर चलाया जाता है उसे उजागर करें और आपको एक जागरूक नागरिक बनाने आपकी सहायता करें.