पौराणिक इतिहास लिखने वाले देवदत्त पटनायक पगला क्यों गए हैं?

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एक गाँव में एक ज्ञानी था. उसे अपने ज्ञान पर बड़ा घमंड था. ऐसा नहीं नहीं था कि उस गाँव में कोई अन्य पढ़ा लिखा नहीं था लेकिन वो आदमी अपने ज्ञान के आगे किसी को कुछ नहीं मानता था. एक दिन वो ज्ञानी आदमी कहीं जा रहा था. रास्ते में गोबर पड़ा था. लोगों ने कहा बच के जाओ, रास्ते में गोबर है. वो ज्ञानी भड़कते हुए बोला, “हुंह, तुम जाहिलों को कैसे पता कि ये गोबर है. अभी मैं बताता हूँ कि ये क्या है.” फिर उस ज्ञानी ने पहले तो गोबर को अपने हाथ में उठाया और उसे मसल कर देखा. उसे कुछ समझ नहीं आया. फिर उसने गोबर को सुंघा, उसे फिर भी समझ नहीं आया. अबकी बार उसने गोबर को चाट कर देखा और फिर गर्व करते हुए कहा. वाकई ये गोबर है.

इस कहानी में जो ज्ञानी आदमी है उसका नाम है देवदत्त पटनायक. इतिहासकार हैं, खुद को परम ज्ञानी समझते हैं. ये पौराणिक कहानियों पर ज्यादा ज्ञान बांचते हैं. इसलिए इन्हें इतिहासकार से ज्यादा मिथोलॉजिस्ट कहलाना पसंद है. ये रोमिला थापर जी के लीग के हैं और ये जो इतिहासकार खुद को परमज्ञानी समझते हैं उनके ज्ञान की तो पूछो मत. ये तो अशोक को भी युधिष्ठिर का प्रेरणाश्रोत बता देते हैं. खैर आज बात रोमिला की नहीं सिर्फ देवदत्त पटनायक की करेंगे.

वामपंथी इतिहासकारों द्वारा इतिहास को तोड़ मरोड़ कर पेश करना आज कल चलन है. सोशल मीडिया पर जब कोई इन परम ज्ञानियों के ज्ञान पर सवाल उठाता है. कोई उनकी गलतियों को सही करने की कोशिश करता है तो इनसे बर्दास्त नहीं होता और ये गाली गलौज पर उतर आते हैं. ये महिलाओं को भी नहीं छोड़ते और चुड़ैल, कुतिया जैसी गालियाँ दे देते हैं.

देवदत्त पटनायक का इन दिनों रोज एक ही काम है. दिन में एक ट्वीट कर हिन्दुओं को चिढाना और फिर जब उस ट्वीट पर काउंटर आता है तो लोगों को गालियाँ देना. 10 अक्टूबर को निम्बू –मिर्ची, गाय और लक्ष्मी पर तंज कसते हुए देवदत्त पटनायक ने एक ट्वीट किए. जो कई लोगों को पसंद नहीं आया.

एक महिला ने पटनायक को लताड़ लगते हुए कहा कि पटनायक इन दिनों एक ट्रोल की तरह बर्ताव कर रहे हैं. जिस पर पटनायक ने पलट कर महिला को जवाब देते हुए कहा, “चुप चुड़ैल. जलती क्यों है. लिम्बू-मिर्ची बंद हुआ क्या?”

पीएम मोदी ने जब चेन्नई दौरे के दौरान वहां की पारंपरिक पोशाक वेस्टी पहनी तो देवदत्त पटनायक ने उसे लुंगी कहा. तो एक महिला यूजर ने उन्हें सही करते हुए कहा कि ये देख कर आश्चर्य होता है कि आपको लुंगी और वेस्टी में अंतर नहीं पता तो. पटनायक ने भड़कते हुए कहा कि कुतिया, क्या तुम्हे ओडिया आती है?

ये एक दो बार की बात नहीं है बल्कि ऐसे कई ट्वीट देवदत्त पटनायक के फ्रस्ट्रेशन की दास्तान सुनाते हैं. देवदत्त पटनायक ने अपनी छवि मिथोलॉजिस्ट से एक सड़क छाप आवारा की बना ली है. पौराणिक इतिहास लिखने वाला इंसान अपने सार्वजनिक जीवन में कितना भद्दा और घटिया इंसान है ये जानने के लिए आप उनके ट्विटर टाइमलाइन पर चक्कर लगायें.