इस वैलेंटाइन भी अकेले हैं आप.. तो ये जरूर पढ़े

आज 14 फरवरी है.. यानि वैलेंटाइन डे.. प्यार का दिन.. मैंने सुना था कि प्यार करने वालों के लिए एक पूरी जिंदगी भी कम पड जाती है, मगर किसी रोमांटिक फिल्म में ही सुना था शायद..

आज आप में से भी बहुत से लोग ऐसे होंगे जो मेरी ही तरह अपने ऑफिस मैं होंगे.. और जिनके घरवाले उन्हें शादी के लिए फार्स करते रहते हैं.. रोज नए नए प्रोफाइल्स भेजते रहते हैं… पर कोई कनेक्ट नहीं कर रहा, या कोई अपने करियर में इस कदर उलझा है कि शादी से कतरा रहा है, किसी को डर है मेरी आज़ादी छिन जाएगी, किसी को डर है मेरी जिम्मेदारियां बढ़ जाएँगी, तो कही कोई यहाँ सोच रहा है कि अगर मेरा पार्टनर वैसा नहीं हुआ जैसा में चाहता हूँ, वो कभी बेवफा हुआ तो… या कभी मैं बेवफाई कर गया तो.. कहीं मेरी शादी टूट गई तो.. या मैं झूठे बंधन में बंधा रह गया तो… अगर मैं खुश नहीं रह पाया तो या वो खुश ना रह पाई तो….??

बाबा रे कितने सवाल हैं… कितना डरते हैं हम… और कितना सोचते भी हैं… कभी कभी सोचती हूँ कि हम लोग समझदार हुए हैं या उलझ गए हैं ?? और कमाल की बात ये भी है कि अगर कहीं पर किसी की कोई बात बुरी लग जाये तो तो उससे लड़ने में हमें ज़रा भी डर नहीं लगता… पर प्यार करने से कतरा रहे हैं.. क्यूंकि पुराने ब्रेकअप के बाद दिल बहुत रोया था.. याद नहीं कितनी शराब की कितनी बोतलें खाली कि थी… और फिर शुरू होता है “नफरत का दौर” लड़कियां लड़कों से.. और लड़के लड़कियों से.. और फिर एकदम से आपकी छठी इन्द्रि जाग जाती है.. और ज्ञान बांटने का दौर शुरू हो जाता है.. या आप शायर बन जाते हैं.. या गायक.. और फैसला लिया जाता है मैं अब प्यार नहीं करूंगा या करूंगी.. खैर आपको मैं यहीं कहूँगी कि आप जो भी सोचते हैं सोचिये मगर अपने आस पास किसी कपल को वैलेंटाइन डे सेलिब्रेट करते देखें तो जलियेगा नहीं., आप आज सिंगल हैं.. पर यकीन मानिये कल नहीं होंगे.. और यह आप भी जानते है.. आज दिल टूटा है.. कल कहीं लग भी जाएगा.. और कभी शादी को लेकर खतरनाक ख्याल आयें तो कुछ नहीं.. तो बस अपने मम्मी पापा को देख लेना… और याद कीजियेगा क्या कभी ऐसा हुआ कि पापा जिम्मेदारियों से भागे हो.. या मम्मी. ??

मम्मी बीमार होती थी तब भी टिफ़िन रेडी करती थी और पापा को कभी सर दर्द होता था तब भी ऑफिस जाते थे… हर छुट्टी वो हमारे साथ ही बिताते थे.. और शायद इसीलिए हम उनसे प्यार करते हैं.. उनकी इज्ज़त करते हैं.. अब सोचिये कि जैसे आप आज हैं.. मस्तमौला.. बेफिक्र.. गैर ज़िम्मेदार.. आलसी.. वैसे ही मां बाप आपके होते तो क्या आप उनकी इतनी इज्ज़त करते जैसे आज करते हैं.. नहीं ना.. मम्मी के मन में कभी फेमिनिस्म का ख्याल नहीं आया.. पर उनसे ज्यादा स्ट्रोंग लेडी कभी देखि आपने.. या पापा का ईगो हर्ट होते देखा आपने.. तो क्या मम्मी पापा इन जिम्मेदारियों में बंधकर खुश नहीं हैं.. ऐसा कभी लगा ही नहीं… क्यूंकि पापा पापा बने रहकर ही खुश रहते हैं.. और मम्मी मम्मी बनी रहकर.. इतने सालों बाद भी उनको अपनी जिम्मेदारियां पूरी करना अच्छा लगता है… उनको बंधे रहना अच्छा लगता है.. वो कभी एक दुसरे से बोर होकर कहीं नही भागे.. आज भी साथ हैं… क्यूंकि वो प्यार करते हैं.. हमसे.. एक दूसरे से… और इसलिए शादी, प्यार और जिम्मेदारियां बुरी नहीं हैं.. बस आप डरते हैं.. क्यूंकि आप इच्छाएं बहुत सारी रखते हैं.. और पूरी एक भी नहीं करना चाहते और यहीं आप मात खा जाते हैं… दिल टूटने से डरते रहते हैं.. हैं ना.. पर यकीन मानिए डर के आगे जीत है ये यूँ ही नहीं कहा गया.. जब भी कोई ब्रेकअप या डाइवोर्स की कहानी सुनाएं.. तो ऐसे अपने कान बंद कर लीजिये और सिर्फ अपने पेरेंट्स को याद कीजिये.. सुकून मिलता है ना.. एक खूबसूरत प्यार और परिवार की कहानी आपके बिलकुल सामने है तो फिर डरिये मत.. आगे बढिए.. खुश रहिये.. अपना हाथ बढाइये.. प्यार आपका रास्ता खुद ब खुद ढूंढ ही लेगा.

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