वासुदेव सद्गुरु पर liberals कर रहे हैं हमले

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देश के जाने माने अध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव सद्गुरु पर liberals अपने ट्विटर हैंडल्स से आए दिन हमले कर रहे हैं. बॉलीवुड कलाकार हों नेता हों या मीडिया संस्थान सब मिलकर एक संत के पीछे हाथ धो कर क्यों पड़े हुए हैं? सद्गुरु जाने जाते हैं अपनी संस्था ईशा फाउंडेशन के लिए जो सामाजिक और सामुदायिक योजनाओं पर काम करती है.
हाल ही में कांग्रेस की सोशल मीडिया प्रमुख दिव्या स्पंदना रम्या ने सद्गुरु पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने 1997 में अपनी ही पत्नी की हत्या कर दी थी. बिना किसी सबूत आरोप लगा रही मैडम यह बात भूल गयी हैं कि उनके ही पार्टी के वरिष्ठ माने जाने वाले नेता शशि थरूर अपनी पत्नी के क़त्ल में प्रमुख आरोपी हैं.
फिर आती हैं बॉलीवुड एक्ट्रेस स्वरा भास्कर जिन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से सद्गुरु को दिमागी रूप से बीमार और वोइलेंट बता दिया. सिर्फ इस लिए क्योंकि उन्होंने एक इंटरव्यू में अफज़ल प्रेमियों को जेल भेजने की अपील कर दी थी. ताज्जुब की बात है कि मोहतरमा को अफज़ल कभी वोइलेन्ट नहीं लगे लेकिन सामाजिक हित में समर्पित इंसान इनको वायलेंट और खतरनाक लगता है.
इनमे सबसे अद्भुत है “The Wire” जो एक ऐसा आर्टिकल ले कर आता है जो सद्गुरु को कट्टर हिन्दू नेशनलिस्ट करार देता है, और साथ ही साथ मिलिटेंट हिन्दू पॉलिटिक्स को शह देने का आरोप भी लगा देता है, और ये इत्तेफाक तो नहीं कि ये आर्टिकल उसी दिन सामने आता है जिस दिन जम्मू में एक विस्फोट होता है, और विस्फोट करने वाले उस मिलिटेंट का धर्म पता नहीं चलता.
2017 में सद्गुरु ने “Rally for Rivers” नाम का कैम्पेन चलाया था, जिसमे उन्होंने देश भर की नदियों के किनारे पेड़ लगाने का संपल्क किया था. इसके लिए उनको पूरे देश का समर्थन मिला और जिस भी राज्य में गये वहाँ की सरकारों ने उनका भरपूर स्वागत किया. लेकिन जैसे ही इन सेक्युलर पत्रकारों को यह भनक लगी कि इस कम में सद्गुरु को प्रधानमंत्री मोदी का समर्थन मिल रहा है तभी से वो इस कैम्पेन की खिलाफत में लग गये.
अब ये बात तो लाज़मी है कि कोई नरेन्द्र मोदी की तारीफ़ करे तो वो अच्छा आदमी कैसे हो सकता है? अच्छे तो उमर खालिद और कन्हैया कुमार हैं जो देश को तोड़ने की बात करते है. वो ही तो हैं असली महापुरुष.
अब आखिर में हमारा एक सवाल है आपसे कि इस देश के सामाजिक हित में अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाला इंसान अगर एक प्रतिष्ठित हिन्दू योगी है तो क्या उसे अपने ही देश में बोलने का अधिकार नही मिलना चाहिए?