जानिए इन तीन बड़े राज्यों में भाजपा या कांग्रेस किस की है अच्छी पकड़

आज सुबह सुबह NBT की रिपोर्ट पड़ी,रिपोर्ट पढ़ कर ये लगा कि इस अधार पर हम ये विश्लेष्ण कर पाएंगे कि विधान सभा चुनाव जितने के बाद कांग्रेस भी अब क्या स्तिथी है भारत के 3 बड़े राज्यों में.

तो चलिए शुरू करते है विश्लेष्ण .

अगर देखा जाये तो छत्तीसगढ़ को छोड़ कर मध्य प्रदेश और राजस्थान में दोनों जगह कांग्रेस और बीजेपी में कांटे की टक्कर रही थी।पर अब धीरे धीरे इन 3 बड़े राज्यों पर भी कांग्रेस के पकड़ लोकसभा चुनाव के टाइम पर कमजोर होती जा रही है,

तो सबसे पहले कारण ये हो सकता है कि विपक्ष के पास कोई ऐसा चेहरा नहीं है PM पद के लिए जिस पर जनता विचार कर अपना वोट दे सकते, दूसरी तरफ बीजेपी के पास मोदी जैसा चेहरा है, जिसे हटाने के लिए ही सारे विपक्षी नेता साथ आये है..तो इसे भी एक बड़ा कारण मना जा रहा है.

दूसरा कारण ये अगर छत्तीसगढ़ को छोड़ दिया जाये तो बाकी दो राज्यों में बीजेपी की हार में जयादा फर्क नहीं था..अगर हम बात करे MP की तो शिवराज सिंह चौहान वहां के 15 साल मुख्यमंत्री रहे है…आज भी वहां की राजनीति पे उनकी काफी अच्छी पकड़ है,तो वही दूसरी तरफ राजस्थान का गणित देखा जाये तो वहां 5 साल के लिए कांग्रेस और 5 साल के लिए बीजेपी आती है, पर इन विधान सभा चुनाव में भी राजस्थान के लोगों का एक ही नारा था,मोदी से कोई बैर नहीं वसुंधरा तेरी खैर नहीं, इसका मतलब लोकसभा चुनाव में उनका झुकाव मोदी यानि बीजेपी की तरफ हो सकता है..

तीसरा कारण की अगर हम बात करे तो ये हो सकता है कि पुलवामा जैसे आत्मघाती हमले का बदला भी पकिस्तान के अंदर बालाकोट में घुस कर लिया गया,भारत सरकार ने सेना को खुली छूट दे दी थी,और कारवाही करने के लिए सेना स्वतंत्र थी, पर जब 26 /11 का ताज अटैक हुआ था,तो तब भी वायु सेना ने एयर स्ट्राइक की बात कही थी पर कांग्रेस सरकार और तत्कालीन pm मनमोहन सिंह ने इसकी अनुमति नहीं दी थी..ये बात एयर स्ट्राइक के बाद खूब उडी थी..जिसके बाद  लोगों का ये मानना था कि ऐसी सरकार होनी चाहिए जो सेना के साथ कदम मिला के चले…साथ ही pm नरेंद मोदी की जो छवि है ग्लोबल लीडर के तौर पर काफी उभर के आ रही है,जब हमारे wing कमांडर अभिनंदन भारत वापस आना भी पडोसी देशों से बेहतर दोस्ती रहना और एक बड़ी कुटनीतिक जीत मानी गयी थी..

चौथा कारण ये भी हो सकता है कि MP से कमलनाथ के बेटे नकुल नाथ भी इलेक्शन में खड़े है,तो वही राजस्थान से अशोक गहलोत के बेटे भी चुनाव मैदान में है,तो इन लोगों का ध्यान अपने अपने बेटों के पैर ज़माने में है..जिस वजह से इन नेताओं का ध्यान अभी राज्य की समस्याओं पर नहीं है,और भी ऐसी समस्याएं है जिनको कांग्रेस अनदेखा कर रही है..

ये तो हमने वो कारण बताये है जिन से ऐसा लग रहा है कि लोक सभा चुनाव में कांग्रेस की पकड़ इन बड़े राज्यों में कमजोर हो सकती है..वाकि अब सब की नजर चुनावों के नतीजों पर टिकी हुई है कि जनता ने किसको चुना होगा,और किस के सर पर सत्ता का ताज सजेगा और किसको वो देश का अगला PM बनाएगी.

Related Articles