मायावती के साथ बैठने के लिए अजित सिंह को जूते उतारने पर क्यूं होना पड़ा मजबूर

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2014 के लोकसभा चुनावों में कड़ी शिक्शत मिलने के बाद इस बार बसपा अध्यक्ष मायावती पूरी तैयारी के साथ चुनाव में उतर रही हैं। अखिलेश यादव और अजित सिंह को पीछे छोड़ते हुए इस बार मायावती महागठबंधन का एक मुख्य चेहरा बनकर उभरी हैं। महागठबंधन की रैलियों, कार्यक्रमों से लेकर स्टेज पर कौन-कहां बैठेगा, कौन-कब बोलेगा ये सब मायावती तय कर रही हैं..एक तरह से वह पूरे गठबंधन की धुरी बन चुकी हैं..
हालांकि इस दौरान मायावती की तानाशाही भी साफ तौर पर देखी जा रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं से बदसलूकी के लिए बदनाम मायावती जाने-अनजाने में गठबंधन पार्टनर से भी इसी तरह की हरकतें कर रही है। और इसका उदहारण हमें देवबंद रैली के दौरान देखने को मिला..जहां उनके साथ बैठने के लिए अजित सिंह को जूते उतारने पर मजबूर किया गया जबकि खुद मायावती जूते पहन कर बैठी थी..वो ये पार्सिलीटी क्यूं करती है..ये आप खुद सोचिए..

हुआ यूं कि जब अजीत सिंह मंच पर चढ़ रहे थे तो बसपा के एक को-ऑर्डिनेटर ने अजीत सिंह से कहा कि पहले आप अपने जूते उतारिए फिर मंच पर जाइए। उसने आरएलडी अध्यक्ष को बताया कि मायावती को पसंद नहीं है कि मंच पर उनके सामने कोई जूते पहनकर बैठे, सिवाय खुद उनके। सबके सामने जूते उतारने के फरमान को सुन पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह शर्मिंदा तो हुए लेकिन गठबंधन की मजबूरियों को देखते हुए खामोश रहे। फिलहाल उन्होंने जूते उतार दिए जिसके बाद उन्हें मंच पर जाने का रास्ता मिला..

सत्ता सुख की लालसा ऐसी है कि अजीत सिंह अपने अपमान के साथ भी गठबंधन से चिपके हुए हैं लेकिन यहां सवाल ये उठता है कि अजीत सिंह की राजनीतिक पकड़ क्या इतनी ढीली पड़ गई है कि दूसरे दलों के सामने उन्हें इतना झुकना पड़ रहा है..

आपको बता दें कि 2014 के चुनाव में बागपत से बीजेपी के सत्यपाल सिंह के हाथों हारने के बाद इस बार अजित सिंह मुजफ्फरनगर से चुनावी मैदान में हैं और दलित वोटों के लिए पूरी तरह मायावती पर आश्रित हैं। ऐसे में उनके सामने मायावती के ‘प्रोटोकॉल’ को मानने की मजबूरी थी। लेकिन इस घटना के बाद अजित सिंह के समर्थक मायावती से नाराज जरूर हो गए होंगे..

फिलहाल, अखिलेश यादव के लिए भी मायावती ने कोई अलग से नियम नहीं बनाया होगा लेकिन मोदी को हराना है तो हर अपमान को सम्मान समझना होगा और गठबंधन का हिस्सा बने रहना होगा..

यहां आपको ये भी जानना जरूरी है कि मायावती को धूल से ऐलर्जी है..उनके करीबियों का कहना है कि ‘बहनजी’ को धूल से ऐलर्जी है, इसलिए उन्होंने इसे प्रोटोकॉल ही बना दिया है..बता दें कि मायावती जब मुख्यमंत्री थीं, तब भी वह अपने इसी अंदाज के लिए जानी जाती थीं। कोई मंत्री या अफसर उनसे तभी मिल सकता था, जब वह उनके कैंप ऑफिस के बाहर ही जूते उतारकर आया हो..

जहां उनके साथ बैठने के लिए अजित सिंह को जूते उतारने पर मजबूर किया इसी सिलसीले में हमें एक घटना याद आती है..जो की उस वक्त काफी चर्चा में रही..एक बार की बात है जब मायावती अपने हैलीकॉप्टर से कही जा रही थी..उसी दौरान उनकी जूती में धूल लग गई तो एक अधिकारी तुरंत आकर नीचे झुक कर अपने रुमाल से उनका जूती साफ किया..इस घटना का वीडियो भी खुब वायरल हुई थी..

यहां आप खुद ही सोचिए की जिनको धूल से इतना परहेज है..जो इतना भी धूल नहीं देख सकती..वो गरीबों की सेवा करने का कैसे दावा कर सकती है..वो विपक्ष पर गरीबों का हनन करने का आरोप लगाती रहती है लेकिन उनका ये रवैया देख तो यही लगता है कि वो गरीबों के बीच भी जाने में परहेज करती होंगी..और अगर जाती भी होंगी तो आप खुद ही सोचिए की किस लिए जाती होंगी..

इसी सिलसीले में हमें एक घटना याद आती है..जो की उस वक्त काफी चर्चा में रही..एक बार की बात है जब मायावती अपने हैलीकॉप्टर से कही जा रही थी..उसी दौरान उनकी जूती में धूल लग गई तो एक अधिकारी तुरंत आकर नीचे झुक कर अपने रुमाल से उनका जूती साफ किया..इस घटना का वीडियो भी खुब वायरल हुई थी..
यहां आप खुद ही सोचिए की जिनको धूल से इतना परहेज है..जो इतना भी धूल नहीं देख सकती..वो गरीबों की सेवा करने का कैसे दावा कर सकती है..वो विपक्ष पर गरीबों का हनन करने का आरोप लगाती रहती है लेकिन उनका ये रवैया देख तो यही लगता है कि वो गरीबों के बीच भी जाने में परहेज करती होंगी..और अगर जाती भी होंगी तो आप खुद ही सोचिए की किस लिए जाती होंगी..