अजीत डोभाल के बेटे को आखिर किस लिए दी गयी है सुरक्षा, जानिये वजह

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अजीत डोभाल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं. उनकी सुरक्षा भी बेहद कड़ी रहती है. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार होने के नाते देश-विदेश में उनके कई दुश्मन भी होंगे.. आतंकियों और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई वाली रणनीति के चलते वे हमेशा निशाने पर रहते ही है… लेकिन इसी बीच अजीत डोभाल के बेटे शौर्य डोभाल को जेड प्लस की सुरक्षा दे दी गयी है. अब लोगों के मन में सवाल जरूर आ रहा है कि आखिर क्यों बढाई गयी है शौर्य डोभाल की सुरक्षा. दरअसल अधिकारियों ने बताया कि केद्रीय एजेंसियों द्वारा तैयार सुरक्षा आकलन रिपोर्ट के बाद गृह मंत्रालय ने लिस्ट में शामिल लोगों को सुरक्षा देने का फैसला लिया है. इसमें कई लोग शामिल थे. इन्हों लोगों में से शौर्य डोभाल भी है, रिपोर्ट में बताया गया है कि उन्हें उनके पिता और अन्य लोगों के विरोधियों से खतरा है। उनकी सुरक्षा में सीआईएसएफ के 15-16 कमांडो तैनात होंगे। ये एके-47 से लैस होंगे।

शौर्य थिंक-टैंक ‘इंडिया फाउंडेशन’ के प्रमुख हैं. वहीँ nsa अजीत डोभाल को crpf द्वारा जेड प्लस की सुरक्षा मिली हुई है ये सुरक्षा उन्हें चार साल पहले ही दी गयी थी. इसी तरह से पश्चिम बंगाल में चुनाव लड़ रहे बीजेपी के लगभग 10 उम्मीदवारों को भी वीआईपी सुरक्षा ‘सीमित अवधि’ के लिए दी गई है.. इसके अलावा केंद्रीय मंत्रिमंडल में राज्य मंत्री और दुर्गापुर से उम्मीदवार एस एस अहलूवालिया, कूच बिहार से उम्मीदवार निशित प्रमाणिक, पूर्व आईपीएस अधिकारी और घटाल सीट से उम्मीदवार भारती घोष को भी ‘वाई प्लस’ सुरक्षा प्रदान की गई है. इसके तहत 5-6 सशस्त्र कमांडो सुरक्षा में तैनात होते हैं…. हालाँकि कि चुनाव के बाद उनकी सुरक्षा हटाई जा सकती है. सुरक्षा मिलने के बाद एक बार फिर शौर्य डोभाल चर्चाओं में आ गये. लोगों में सवाल था कि आखिर इन्हें सुरक्षा क्यों दी गयी.. सुरक्षा दिया जाना बड़ा मुद्दा नहीं था बड़ा मुद्दा तो ये था कि ये सुरक्षा चुनाव के बीच में बढाई गयी है. इस पर लोगों में तमाम प्रकार की चर्चाएँ हो रही थी. अजीत डोभाल के बेटे अक्सर सुर्ख़ियों में रहते हैं. कभी कोर्ट के मामले को लेकर तो कभी विपक्षियों द्वारा निशाना बनाये जाने पर… अजीत डोभाल जो मोदी सरकार के सबसे ताकतवर अधिकारी हैं उन्होंने पूरे करियर में डोभाल ने महज 7 साल ही पुलिस की वर्दी पहनी। उनका ज्यादातर समय खुफिया विभाग में बतौर जासूस गुजरा है।

अपनी हिम्मत और जज्बे के बूते डोभाल ने जासूसी की दुनिया में कई ऐसी मिसालें कायम कीं, जिसने उन्हें दुनिया रियल जेम्स बॉण्ड बना दिया।

जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर हुए आतंकी हमले के काउंटर ऑपरेशन ब्लू स्टार में जीत के नायक बने। वो रिक्शा वाला बनकर मंदिर के अंदर गए और आतंकियों की जानकारी सेना को दी, जिसके आधार पर ऑपरेशन में भारतीय सेना को सफलता मिली।

– 1999 में कंधार प्लेन हाईजैक के दौरान ऑपरेशन ब्लैक थंडर में अजीत डोभाल आतंकियों से निगोसिएशन करने वाले मुख्य अधिकारी थे। –

अजीत डोभाल 33 साल तक नॉर्थ-ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में खुफिया जासूस रहे। –

2015 में मणिपुर में आर्मी के काफिले पर हमले के बाद म्यांमार की सीमा में घुसकर उग्रवादियों के खात्मे के लिए सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन के हेड प्लानर रहे।