कौन थी मटुआ महासंघ की माहारानी जिसे पीएम मोदी ने हमारे वक्त का आदर्श कहा था

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आज से 200 वर्ष पूर्व  मटुआ धर्म की स्थापना हरिचंद ने सन् 1812 में की थी इस धार्मिक आंदोलन का एक ही संदेश था कि खुद खाओ या न खाओ, लेकिन बच्चों को शिक्षा दो. इस आंदोलन ने बंगाल में अपनी एक अलग परंपरा बनाई. जब ये लोग घरों से निकलते थे तो हाथों में क्रांति का प्रतीक लंबा लाल झंडा लेकर निकलते थे और साथ में डंका बजाते चलते थे


हरिचन्द लोगों को कबीर की भाँति समझाया कि वेदों, शास्त्रों, उपनिषदों, पुराणों, गीता महाभारत, रामायण आदि ग्रंथों पर विश्वास न करना. अपनी बुद्धि और सोच-समझ से अपना रास्ता बनाना मटुआ समुदाय आजादी के बाद विस्थापित होकर बांग्लादेश से पश्चिम बंगाल आया था इस समुदाय के लोग बीनापाणी  देवी को ‘बोरोमां’ कहते थे वे प्रमथ रंजन ठाकुर की पत्नी थीं. प्रमथ रंजन ठाकुर का निधन पहले ही हो चुका था रंजन ठाकुर प्रमथ  मटुआ महासंघ की स्थापना करने वाले हरिचंद ठाकुर के पड़पोते थे


मटुआ समुदाय  लगभग 70 लाख की जनसंख्या के साथ बंगाल का दूसरा सबसे प्रभावशाली अनुसूचित जनजाति समुदाय माना जाता है बनगांव लोकसभा क्षेत्र में 50 फीसदी से ज्यादा मटुआ समुदाय के लोग हैं हालांकि प्रदेश के विभिन्न दक्षिणी जिलों में इस समुदाय की जनसंख्या लगभग एक करोड़ है, जो प्रदेश की कुल 294 विधानसभा सीटों में से कम से कम 74 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं महारानी बीनापाणी की उम्र 100 साल से ज्यादा हो चुकी थी वे फेफड़े में संक्रमण समेत उम्र जनित कई बीमारियों से पीड़ित थीं 21 फरवरी की रात को ही महारानी की तबीयत बिगड़ गई थी और तुरंत उन्हें जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल अस्पताल में भर्ती किया गया था जहां 5 मार्च को उनका निधन हो गया

PM मोदी ने ट्वीट कर महारानी  बीनापाणी के निधन पर शोक जताया है PM मोदी ने ट्वीट कर लिखा की ‘बोरोमां’ कई लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत की तरह थी बडोमा के विचार हमेशा पीढ़ियों को प्रभावित करते रहेंगे सामाजिक न्याय पर उनके द्वारा किया गया काम कभी ना भूलने वाला है

दो फरवरी को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मटुआ  बहुल क्षेत्र ठाकुरनगर में एक जनसभा की थी तब उन्होंने कार्यक्रम से पहले महारानी से मिलकर उनका आशीर्वाद भी लिया था
ममता बनर्जी ने भी ट्वीट कर लिखा है कि मैं बोरोमां के निधन से दुखी हूं मेरी पूरी संवेदना उनके परिवार और मटुआ के लोगों के साथ हैं

ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को प्रदेश में 2011 और फिर 2016 विधानसभा चुनाव जिताने में मतुआ समुदाय ने बड़ी भूमिका निभाई थी बोंगांव के इलाके में मटुआ समुदाय के वोटरों का प्रतिशत 65 से 67 है इसके अलावा  प. बंगाल की 10 सीटों पर भी उनकी अच्छी संख्या है यानी कहीं ना कहीं ममता बेनर्जी को मटुआ समुदाय का सियासी फायदा भी मिलता रहा है