WHO के चीफ ने बताया कि कोरोना वैक्सीन बनाने में ये संस्थान है सबसे आगे

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कोरोना वायरस जैसी बिमारी को लेकर आज पूरा विश्व झुज रहा है. भारत के अंदर भी कोरोना ने अपना क’हर ब’रपा रहा है. आज के वक़्त में कोरोना से लड़ने के लिए कोई भी दवा नहीं है. सिर्फ घर पर रुके और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और कोई भी चारा नही है इस वक्त कोरोना जैसी बीमारी से लड़ने के लिए.

कोरोना से जं’ग जीतने के लिए वैक्सीन बनाने में दुनियाभर के सभी देश के वैज्ञानिक जुटे हुए है. अब विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख ने बताया है की 7-8 कैंडिडेट ऐसे है जो कोरोना वायरस की वैक्सीन बनाने में सबसे आगे है. उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग से उनके काम में तेजी लाई जा रही है. हालांकि उन्होंने इनके नाम का खुलासा नहीं किया है.

वहीं दूसरी तरफ डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदनोम घेब्रेयसस ने यूएन इकनॉमिक एंड सोशल काउंसिल की एक विडियो ब्रीफिंग में कहा कि ‘दो महीने पहले तक हमारी सोच यह थी कि इसकी वैक्सीन को बनाने में 12 से 18 महीनों का समय लग सकता है. लेकिन अब तेजी से प्रयास किया जा रहा है. जिसमें एक सप्ताह पहले 40 देशों, संगठनों और बैंकों द्वारा अनुसंधान, उपचार और परीक्षण के लिए 7.4 बिलियन यूरो (8 बिलियन डॉलर) की मदद की गई है’.

उन्होने आगे कही कि 8 बिलीयन डॉलर की मदद से कोरोना जैसी वैक्सीन को बनाने के लिए इतनी राशि पर्याप्त नही है. अगर कोरोना वायरस की वैक्सीन जल्दी बनानी है तो हमें पर्याप्त पैसा दिया जाए ताकि इस वैक्सीन को वक्त पर बनाया जा सके और लोगो तक और अपने देश को इस महा’मारी से बचाया जा सके. लेकिन, वैक्सीन बनाने के लिए 7-8 लोगों के अलावा   और भी 100 से ज्यादा कैंडिडेट काम कर रहे हैं. डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ने आगे कहा कि हम उन पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं जो हमारे पास बेहतर रिजल्ट ला सकते हैं और बेहतर क्षमता वाले उन कैंडिडेट्स को पूरी सहायता उपलब्ध करवा रहे हैं.