आखिर कैसे होता है प्रोटेम स्पीकर का चुनाव? उनके पास क्या-क्या होते है अधिकार

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महाराष्ट्र में चले आ रहे सियासी ड्रामे का अंत सभवतः नजदीक आ गया है. महाराष्ट्र का मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुँच गया था. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार का फैसला सुनाते हुए कहा कि फडणवीस सरकार बुधवार को बहुमत परीक्षण कराये. कोर्ट ने कहा कि प्रोटेम स्पीकर नियुक्त कर उसकी देख-रेख में शक्ति परीक्षण की प्रक्रिया पूरी करवाई जाएगी. कोर्ट ने साफ किया कि गुप्त मतदान नहीं होगा और फ्लोर टेस्ट का लाइव टेलिकास्ट किया जाएगा. इसके बाद से महाराष्ट्र की विपक्षी पार्टियों में जोश आ गया है. आखिर प्रोटेम स्पीकर का कैसे चुनाव जाता है और उसके पास क्या क्या अधिकार होते है?


प्रोटेम स्पीकर, चुनाव के बाद पहले सत्र में स्थायी अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के चुने जाने तक सदन का कामगाज स्पीकर के तौर पर चलाता है यानि सदन का संचालन करता है. सीधे कहें तो यह कामचलाऊ और अस्थायी स्पीकर होता है. बेहद कम वक्त के लिए इन्हें चुना जाता है. प्रोटेम एक लैटिन शब्द है जिसका अंग्रेजी में मतलब ‘ कुछ समय के लिए’ मतलब होता है. प्रोटेम स्पीकर को लोकसभा या विधानसभाओं में काम करने के लिए कुछ अवधि के लिए नियुक्त किया जाता है. प्रोटेम स्पीकर को सदन के संचालन के लिए तब चुना जाता है जब लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव हो गए हो लेकिन स्पीकर और डिप्टी स्पीकर के लिए मतदान नहीं हुआ हो, या फिर किसी वजह से स्पीकर और डिप्टी स्पीकर की कुर्सी खाली रह गयी हो.. अथवा स्पीकर और डिप्टी एक साथ इस्तीफ़ा दे दें.. ऐसे में प्रोटेम स्पीकर की नियुक्ति की जाती है. जब भी कोई नई लोकसभा या विधानसभा गठित होती है तो संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में अथवा विधानसभा में सबसे अधिक समय गुजारने वाले सदस्य या निर्वाचित सबसे वरिष्ठ सदस्य को प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया जाता है. ऐसे में महाराष्ट्र में प्रोटेम स्पीकर बनाने के लिए 17 संभावित नाम सचिवालय की तरफ से भेजे गए हैं.


आइये अब जानते है कि आखिर प्रोटेम स्पीकर के पास अधिकार क्या-क्या होते है?

प्रोटेम स्पीकर का मुख्य कर्तव्य सदन के नए सदस्यों को पद की शपथ दिलाना है. वह सदन को नए स्पीकर का चुनाव करने में सक्षम बनाता है. प्रोटेम स्पीकर फ्लोर टेस्ट भी कराता है. नया स्पीकर चुने जाने के बाद प्रोटेम स्पीकर का कार्यालय समाप्त हो जाता है

सदन में जब तक नवनिर्वाचित सांसद/विधायक शपथ ग्रहण नहीं कर लेते तब तक वे औपचारिक तौर पर सदन का हिस्सा नहीं माने जाते हैं. इसलिए पहले सांसदों/विधायकों को शपथ दिलाई जाती है, जिसके बाद वे अपने बीच से अध्यक्ष का चयन करते हैं.


प्रोटेम स्पीकर के पास इस बात का भी अधिकार होता है कि  अवैध तरीके से वोट करने पर किसी सांसद/विधायक के वोट को डिसक्वालिफाई कर सकता है. इसके अलावा वोटों के टाई होने की स्थिति में वह अपने मत का इस्तेमाल फैसले के लिए कर सकता है.

हालाँकि महाराष्ट्र में जबसे सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया है कि बुद्धवार को महाराष्ट्र में गठित सरकार को फ्लोर टेस्ट करवाना होगा.. वोटिंग गुप्त रूप से नही होगी..इसके साथ ही वोटिंग को लाइव टेलीकास्ट किये जाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया है तबसे ही महाराष्ट्र में विपक्ष के एक नई ऊर्जा दिखाई दे रही है.. हलचल तेज हो गयी है..महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल इतनी तेजी से करवट बदल रही है कि आने वाले समय में क्या खबर निकलकर सामने आये इस पर भी कुछ कहा नही जा सकता..

महाराष्ट्र में बीजेपी की सरकार गिर गयी है जल्द ही नई सरकार का गठन हो सकता है.