कौन कर रहा है Twitter पर Nehru का झूठा महिमा मंडन?

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दोस्तों आज हम बात करेंगे कुछ ऐसे लोगों के बारे में जो सोशल मीडिया पर फेक न्यूज़ दिखा के झूठा प्रोपगंडा करते हैं. हम बात कर रहे हैं एक ट्विटर यूजर फराह खान की. फराह खान कुछ स्क्रीन शॉट्स को ट्वीटर पर पोस्ट करके बताती हैं कि कांग्रेस ने 60 सालों में क्या किया है. आप फराह खान को कांग्रेस का सदस्य ना समझिएगा क्योंकि ये पेशे से एक ज्वेलरी डिज़ाइनर हैं.

फराह खान एक आर्टिकल पोस्ट करती है और नेहरु और कांग्रेस के कार्यकाल का झूठा महिमा मंडन करती हैं. और कई झूठ बोलती हैं.

सबसे पहले वे कहती हैं कि आज़ादी के तुरंत बाद भारत में एक सुई बनाने तक के संसाधन नहीं थे.

दूसरा, 1950 में भारत में कोई एजुकेशन संस्थान नहीं थे.

तीसरा, 1947 में सिर्फ 20 गावों में ही बिजली थी.

चौथा, भारत में 1947 में सिर्फ 20 डैम थे.

हालाँकि उन्होंने झूठे दावे तो और भी बहुत किए लेकिन हम आपको सिर्फ इन्हीं दावों कि सच्चाई बता रहे हैं.
सबसे पहला झूठ कि सुई बनाने के संसाधन भी नहीं थे. इसका सच ये है कि गोदरेज कंपनी जिसके appliances आपने भी इस्तेमाल किए होंगे वो 1897 में अर्देशिर गोदरेज ने स्थापित की थी वहीं 1907 में टाटा स्टील्स की स्थापना की गयी थी. इसके साथ-साथ Mysore पैलेस में 1900 से ही OTIS लिफ्ट की सुविधा भी थी. Hindustan Aeronautical Limited यानी HAL भी 23 दिसम्बर 1940 श्री वालचंद हिरचंद ने स्थापित कर दी थी.

दूसरा झूठ, कि भारत में कोई एजुकेशन संस्थान नहीं थे.जबकि सच्चाई ये है कि 1818 में Serampore कॉलेज, 1847 में यूनिवर्सिटी ऑफ़ रूरकी जो आगे चल के IIT-रूरकी बनी. इसके बाद यूनिवर्सिटी ऑफ़ बॉम्बे, मद्रास और कलकत्ता जिन्हें 1857 में स्थापित किया गया. कलकत्ता यूनिवर्सिटी से गुरुदेव रबिन्द्र नाथ टैगोर और महान साइंटिस्ट सीवी रमण जैसे व्यक्ति जुड़े रहे हैं. आपको बता देन कि ये यूनिवर्सिटी तब भी बहुत प्रतिष्ठित थी और आज भी बहुत प्रतिष्ठित हैं.

तीसरा झूठ, 1947 में सिर्फ 20 गावों में बिजली थी. जबकि सच्चाई ये है कि बेंगलुरु शहर में 1905 से ही स्ट्रीट लाइट्स थी. आपको जानकार हैरानी होगी की पूरे एशिया में सबसे पहले स्ट्रीट लाइट बेंगलुरु में 1905 में इस्तेमाल की गयी थी. 1907 में भारत में पहला सिनेमा हॉल चैपलिन सिनेमा कलकत्ता में स्थापित कर दिया गया था. और Mysore पैलेस कि लिफ्ट के बारे में तो आपको हम बता ही चुके हैं.

चौथा झूठ भारत में 1947 में सिर्फ 20 डैम थे जबकि सच्चाई ये है कि समय भारत में 300 बड़े dams थे.

चीन भारत के बाद आज़ाद हुआ था. क्षेत्रफल में चीन भारत से दोगुने से भी ज्यादा बड़ा है और भारत से अर्थव्यवस्था के लगभग हर क्षेत्र में पिछड़ा हुआ था. इसके बाद चीन में सिविल वॉर हुआ कई लोगों की जाने गयी. आगे चलकर चीन कि स्थिति इतनी ख़राब हो गयी की 1958 से 1962 तक भुखमरी के चलते करीब चार करोड़ 45 लाख लोग मारे गए. तो सवाल ये है कि अगर नेहरु ने और कांग्रेस ने 60 सालों में इतना विकास किया तो आज हम चीन से इतने पिछड़े क्यों है? और आपको बता दें कि चीन से हम 2014 के बाद नहीं, बल्कि 1960 के दशक से ही पिछड़े हुए हैं.

सच्चाई तो ये है कि आजादी के बाद कांग्रेस के पास स्वर्णिम 60 साल थे जिसे कांग्रेस पार्टी ने गवा दिया. पंचायत से पार्लियामेंट तक कांग्रेस थी. आज कि तरह उस समय न तो पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन जैसे कोई कांसेप्ट था न ही सक्रिय मीडिया था. केंद्र और राज्य में भी कांग्रेस कि ही सरकार थी. राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर अगर केंद्र और राज्य में टकराव होता था तो वो कांग्रेस पार्टी के अंदर, पार्टी स्तर पर ही सुलझ जाता था. लेकिन आज की स्थिति बिलकुल अलग है.

अभी तक प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थी किसानों कि लिस्ट मध्य प्रदेश, राजस्थान, West Bengal और दिल्ली सरकार ने केंद्र सरकार को आज तक नहीं भेजी है. जबकि पहली 2000 रुपए कि किश्त चार करोड़ से ज्यादा किसानों को मिल चुकी है और दूसरी किश्त भी अप्रैल में मिल जाएगी. इसी तरह केजरीवाल ने दिल्ली ने आयुष्मान योजना लागू करने से भी मना कर दिया है.

आज सोशल मीडिया का ज़माना है और इतने राजनीतिक दल हैं, NGO हैं, activists हैं जो केंद्र सरकार का कोई भी विकास का काम शुरू होने से पहले कोर्ट जाकर किसी न किसी बहाने से रोक देते हैं. इंटेलिजेंस ब्यूरो कि एक रिपोर्ट के मुताबिक कई NGO और बुद्धिजीवी विदेशी फंडिंग कि मदद से विकास के कामों को रोकने कि पूरी कोशिश करते हैं जिससे भारत की प्रगति रुक जाये.कोर्ट जाकर विकास के प्रोजेक्ट्स को रोक दिए जाते हैं.

भारत आज सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्था है और सभी देश और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं भारत के नेतृत्व की भारत को आगे बढ़ाने के प्रयासों कि तारीफ कर रही हैं.भारत ने शुरू के 60 सालों का उपयोग जैसा हो सकता था वैसे बिलकुल नहीं हुआ. देश देशवासियों से चलता है देश वासी मेहनत करते हैं तो देश का विकास होता है लेकिन इस अधूरे विकास को पूरा बता कर इसे सिर्फ एक पार्टी कि विरासत बता देना ठीक नहीं है.

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