कौन हैं वो निर्दलीय विधायक जिन्होंने हरियाणा में भाजपा को दिया है समर्थन ?

636

हरियाणा विधानसभा चुनाव में किंगमेकर की भूमिका मे अबतक दुष्यंत चौटाला नजर आ रहे थे, लेकिन कहते हैं न राजनीती में पासा पलटते देर नहीं लगती और हरियाणा में भी कुछ ऐसा ही अब नजर आ रहा है.

हरियाणा के सियासी हालात को देखते हुए ये साफ़ है की अब किंगमेकर की भूमिका में अब नए लोग शामिल हो रहे हैं. भाजपा की झोली में 5 ऐसे मोती गिरे हैं जिनकी चमक कांग्रेस को बेहद परेशान कर रही है और अब शायद भाजपा को मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए दुष्यंत चौटाला की भी जरूरत नहीं है.

कांग्रेस एक बार फिर हरियाणा में 31 सीटें जीतने के बाद भी सरकार बनाने में नाकाम दिख रही है और जननायक जनता पार्टी सत्ता के समीकरण बदलने की वजह से हाथ मलती रह गयी है, और आखिर में वो कौन 5 विधायक हैं जिन्होंने चिट्ठी लिखकर भाजपा को समर्थन दिया है और जिनकी चर्चा अब राजनीती के गलियारों में तेज हो रही है?

हरियाणा में बहुमत की सरकार के लिए किसी भी दल को 90 में से 46 सीटें चाहिए थी… इसमें भाजपा को मिली 40 सीटें और कांग्रेस को मिली 31 सीटें,,,,, इसके आलावा अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में जननायक जनता पार्टी को 10 सीटों पर जीत मिली… 11 महीनों पहले बनी जननायक पार्टी के बारे में चुनाव नतीजों के बाद कहा जा रहा था की ये किंगमेकर बनेगा…. लेकिन दिल्ली में बैठे अमित शाह तो कुछ और ही सोच रहे थे.. उन्होंने जब tweet करके कहा कि हरियाणा की जनता का हमें एक बार फिर मौका देने के लिए शुक्रिया…. तब ये अंदाजा लगा लिया गया कि अब भाजपा ने हरियाणा में सरकार बनाने की तैयारी कर ली है…

Dushyant Chautala

देर शाम तक चर्चाएँ रही की शायद दुष्यंत चौटाला का समर्थन लेकर भाजपा हरियाणा में सरकार बना लेगी पर नतीजों की अगली सुबह 25 अक्टूबर को दिल्ली से मिले इनपुट के बाद सियासी हवा का रुख बदला बदला नजर आने लगा और उसके कुछ समय बाद ही ये खबर आई कि 5 विधायक जो निर्दलीय चुनाव लडकर जीते थे वो अब भाजपा को समर्थन दे रहे हैं.

जिसके बाद सत्ता के रंगीन ख्वाब देख रही जननायक जनता पार्टी की उम्मीदें अचानक से धूल में मिल गईं हैं, गौरतलब है हरियाणा विधानसभा में जो 7 निर्दलीय जीते हैं उनमें से 5 भाजपा के बागी नेता हैं और उन्होंने भाजपा के साथ जाना चुना है

इन विधायकों में पहला नाम हैं- सोमबीर, जो दादरी विधानसभा से निर्दलीय विधायक चुने गए हैं, सोमबीर कुछ समय पहले तक भाजपा में ही रहे लेकिन जब भाजपा ने खेल के मैदान से राजनीती में आई बबिता फोगाट को सीट दी तो मामला बिगड़ गया और सोमबीर भाजपा से अलग होकर चुनाव लड़े और उन्होंने 14000 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की तो वहीँ दूसरी तरफ बबीता फोगाट तीसरे नंबर पर रहीं..

दूसरे बागी नेता हैं बलराज कुंडू-  ये मेहम विधानसभा से निर्दलीय विधायक चुने गये हैं और इन्होंने भी बेहद बड़े अंतर से अपने विरोधियों को हरा दिया.

जिला परिषद् के चेयरमेन रहे कुंडू पहले भाजपा में ही थे और उन्होंने टिकट मिलने की उम्मीद में जिला परिषद् से इस्तीफ़ा दिया लेकिन फिर भी भाजपा से टिकट नहीं मिलने से वो नाराज थे जिसके चलते वो निर्दलीय लड़े और उन्होंने भरी मतों से जीत दर्ज की…

तीसरे बागी नेता हैं धर्मपाल डोंगर- ये नीलोखरी विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं,

नीलोखरी एक आरिक्षित सीट है और इसपर 2014 में भी भाजपा ने जीत दर्ज की थी पर इस बार धर्मपाल डोंगर ने टिकट को लेकर दावेदारी पेश की थी लेकिन भाजपा ने पिछली बार जीते विधायक भगवानदास पर भरोसा जताया, जिससे नाराज डोंगर ने निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत भी गए.

चौथे बागी नेता का नाम का नयनपाल रावत-  ये पृथला विधानसभा सीट से निर्दलीय विधायक चुने गये हैं..

नयनपाल कुछ समय पहले पृथला विधासभा में भाजपा का एक बड़ा नाम थे, लेकिन कुछ कारणों के चलते भाजपा ने उनको टिकट नहीं दिया, उन्होंने पार्टी से नाराज होकर निर्दलीय परचा भरा और जीत दर्ज की..

पांचवे और आखिरी बागी नेता का नाम है रणधीर सिंह गोलन – ये पुण्डरी विधानसभा से निर्दलीय विधायक चुने गए हैं..

RSS से होने की वजह से वो दावेदारों की लिस्ट में सबसे ऊपर माने जा रहे थे लेकिन फिर उनको सीट नहीं दी गयी और उन्होंने पार्टी से नाराज होकर निर्दलीय चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की..

पार्टी नेता जेपी नड्डा और अमित शाह के घर पर कल से ही बैठकों का दौर जारी है और भाजपा को मिल रहे समर्थन को देखते हुए हरियाणा लोकहित पार्टी के नेता गोपाल कांडा ने भी जेपी नड्डा से मुलाकात कर भाजपा को अपना समर्थन दिया है.

ऐसे में इन तमाम पोलिटिकल फिगर्स पर अगर नजर डालें तो भाजपा अब पुरे तरीके से सरकार बनाने की स्थिति में है.