जब शीला को मा’रने के लिए कार में किया गया था ध’माका, ऐसे बची थी जान

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15 सालों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही शीला दीक्षित का शनिवार शाम 81 वर्ष की उम्र में निधन हो गया . वो लम्बी बिमारी से पीड़ित थीं . दिल्ली के एस्कॉर्ट हॉस्पिटल में दिल का दौड़ा पड़ने से उनका निधन हुआ लेकिन बहुत पहले, जब शीला सक्रीय राजनीति में नई नई आयीं थी तो उनकी जान जाते जाते बची थी .

घटना है 25 दिसंबर 1985 की . पंजाब में विधानसभा चुनाव होने वाले थे . शीला दीक्षित चुनाव प्रचार के कार्यों में लगी थीं . चुनाव प्रचार के आखिरी दिन उन्होंने बटाला में एक रैली को संबोधित किया . उनके साथ बिहार के एक सांसद भी थे . बटाला में चुनाव प्रचार के बाद शीला दीक्षित अपने सहयोगी सांसद के कार में बैठ कर अमृतसर के लिए निकल गईं .

बटाला से अमृतसर यात्रा के दौरान कार में शीला दीक्षित, वो सांसद, एक सुरक्षाकर्मी और ड्राइवर था .रास्ते में  ड्राईवर ने कहा कि अभी अमृतसर पहुचने में बहुत वक़्त लगेगा इसलिए अभी खाना खा लेते हैं . शीला ने सहमती दे दी, उसके बाद ड्राईवर ने एक रेस्टोरेंट के बाहर कार रोक दी . कार में स्वर सभी लोग उतर के रेस्टोरेंट के अन्दर चले गए . ड्राईवर खाना खाने लगा और शीला ने एक कोल्ड ड्रिंक मंगवाया . तभी जोरदार धमा’के से सबकुछ हिल गया . ध’माका उसी कार में हुआ था, जिसमे शीला सफ़र कर रही थीं . शीला और उनके साथ के सभी लोग तो ब’च गए लेकिन इस ध’मा’के में कार के पास खेल रहे दो बच्चों की मौ’त हो गई .

ध’माके के बाद सन’सनी फ़ैल गई . एक साल पहले ही पंजाब आतं’कवाद के दौर से बाहर निकला था . पुलिस जांच में बात सामने आई कि शीला की कार में टा’इम ब’म लगाया गया था . ब’म लगाने वाले को पता था कि शीला दीक्षित उस कार में सफ़र करने वाली हैं . लेकिन ड्राईवर की भूख ने सभी की जा’न बचा ली .