‘जब पत्थरबाजी जायज हो सकता है तो वोटिंग क्यों नहीं’

260

लोकसभा चुनाव की तारीख को लेकर मचें बवाल के बाद एक सवाल हमारे मन में भी आया..जो मैं उन तमाम लोगों से जानना चाहती हुं..जो रमजान के चलते चुनावों की तारीख बदलने की वकालत कर रहे हैं, उन्हें ये बात भी जरूर पता होगा कि पिछले साल रमजान के दिनों में ही सुरक्षाबलों पर पत्थरबाजी की जा रही थी, रमजान के दिनों में पत्थरबाजी तो हो सकती है लेकिन चुनाव नहीं ये क्या बात हुई..समझ नहीं आ रहा है..कि जब पत्थरबाजी करने में उन लोगों को तकलीफ नहीं होती तो फिर उन्हें वोट देने में क्या परेशानी हो सकती हैं..

लोकतंत्र का सबसे बड़ा महापर्व कहे जाने वाले लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान काफी सोच विचार करने के बाद कर दिया गया..जिसके बाद किसी को दिक्कत नहीं हुई, लेकिन इस देश के 20 करोड़ मुसलमानों की दुहाई देते हुए कुछ जाने माने मुसलमान परेशान हो गए..उनका तर्क ये है कि रमजान के वक्त वो अपने वोट देने के अधिकारों को इस्तमाल नहीं कर पाएंगे…क्योंकि वो रमजान में रोज़े में रहेंगे और बहुत गर्मी होने की वजह से वो घर से कम निकलेंगे..इसलिए उन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करने में परेशानी होगी..जिससे वोट कम पड़ेंगे..कुछ लोग तो सत्ताधारी पार्टी पर भी आरोंप लगाने से नहीं चुके..उनका आरोप है कि यह जानबूझ कर कराया गया है..ये लोग चुनाव आयोग से मांग करने लगे की चुनाव की तारीखों को बदल दी जाए और रमजान में ना रखी जाए..

कुछ मौलानाओं की तरफ से बयान जारी होने के बाद इस मांग को आम आदमी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने भी उठाया..लेकिन चुनाव आयोग ने इस मांग को पुरी तरह से खारिज कर दिया..चुनाव आयोग ने कहा कि ईद की तारीख का ध्यान रखा गया है. जहां तक बात रमजान की है तो रमजान पूरे एक माह का होता है और दैनिक कार्यो को प्रभावित नहीं करता है. 2 जून के पहले चुनाव कराना जरूरी है इसलिए चुनाव को और अधिक नहीं टाला जा सकता है…

आपको बता दें कि पिछले साल रमजान के महीने को देखते हुए गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में सैन्य कार्रवाई पर रोक लगा दी थी..गृह मंत्रालय की तरफ से जारी हुए आदेश में कहा गया था कि केंद्र सरकार ने यह फैसला शांति में विश्वास रखने वाले मुसलमानों के लिए किया गया है. इस्लाम में हिंसा और आतंक को अलग करना जरूरी है. जब तक मासूम जनता पर कोई हमला न हो तब तक कोई गोली ना चलाई जाए..मतलब की जम्मु-कश्मीर में नो ऑपरेशन लगा दिया गया था..गृह मंत्रालय की इस शान्ति पूर्ण पहल के बावजूद भी कश्मीर में जमकर पत्थरबाजी हुई..तो जो हमने आपसे अपने वीडियो के शुरुआत में जो सवाल पुछा था वो इसलिए ही पुछा था कि अगर रमजान के महिने में पत्थरबाजी हो सकती है तो चुनाव क्यों नहीं हो सकता है..

हालांकि यहां एक और सवाल उठना लाजमी है कि चुनाव का पहला चरण चैत्र नवरात्र में पड़ रहा है..लेकिन इसमें किसी हिन्दू को कोई दिक्कत नही हो रही है..लेकिन वहीं रमजान के नाम पर मुसलमान आरोप लगाने से नहीं चूकें क्यों…खुद पीएम मोदी नवरात्रों के दौरान केवल नींबू पानी का सेवन करते है…यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ खुद गोरक्ष पीठाधीश्र्वर है..इन दोनों लोगों की नवरात्र में बहुत कठिन दिनचर्या रहती है..और इनके जैसे बहुत सारे हिन्दूओं की कठिन दिनचर्या रहती है फिर भी कोई भी हिन्दू अपने धार्मिक आचरण से किसी अन्य को कोई दिक्कत नहीं होने देता.. पिछला लोकसभा चुनाव भी चैत्र नवरात्र में पड़ा और इस बार भी चुनाव की तिथियां चैत्र नवरात्र में ही पड़ रही है. इसके पहले भी ऐसा हो चुका है ..लेकिन कभी कोई चर्चा नहीं हुई मगर एक बार चुनाव की तिथियों के बीच में रमजान पड़ गया तो चुनाव के तिथियों को ही बदलवाने की मांग उठने लगी….