पर्यटकों को कश्मीर खाली करने का निर्देश दे कर आखिर क्या करने जा रही है सरकार?

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गृह राज्य मंत्री जी कृष्ण रेड्डी ने 24 जुलाई को राज्यसभा में कश्मीर के हालत पर जानकारी देते हुए कहा था कि कश्मीर के हालात पहले से बेहतर हुए हैं लेकिन फिर उसके बाद केंद्र सरकार ने अचानक से कश्मीर में सुरक्षाबालों की संख्या में बढ़ोतरी कर दी . अब तक कश्मीर में करीब 35 हज़ार जवान तैनात किये जा चुके हैं . आर्टिकल 35 पर राज्य में घमासान मचा हुआ है, तभी राज्य सरकार एक एडवाइजरी जारी कर अमरनाथ यात्रा रोक देती है और पर्यटकों को कश्मीर खाली करने का आदेश दिया जाता है . सरकार एडवाइजरी जारी करते हुए बताती है कि आतंकी हमले के इनपुट मिले हैं .

आतंकी हमले के इनपुट, आर्टिकल 35 , जवानों की तैनाती के बीच चुनाव की भी चर्चा चल रही है और इन सब के बीच जनता पूरी तरह से कन्फ्यूज है कि आखिर कश्मीर में सरकार करने क्या जा रही है ? कश्मीर में पहले से करीब 90 हज़ार जवान तैनात है . इनमे सेना, अर्धसैनिक बल और केन्द्रीय बलों की मिलीजुली संख्या है , इसके अलावा हाल ही में सरकार ने 35,000 नए जवानों को तैनात किये . अगर पुलिस को छोड़ दें तो सिर्फ सवा लाख जवान सेना और अर्धसैनिक बलों से हैं . इतनी बड़ी संख्या में जवानों की तनाती बहुत लम्बे समय बात हुई है घाटी में .

घाटी के हालात पहले भी ख़राब हुए हैं लेकिन इस तरह से पर्यटकों से घाटी खाली करने को नहीं कहा गया . लेकिन अब अचानक से राज्य सरकार का ये कहना कि सभी पर्यटक कश्मीर खाली कर दें , लोगों के मन में तरह तरह की शंकाओं को जन्म दे रहा है . आशंकाएं जताई जा रही है कि केंद्र सरकार आर्टिकल 35 हटाने के बारे में सोच रही है इसलिए धीरे धीरे घाटी में सुरक्षा बलों की संख्या बढाई गई और अब पर्यटकों से घाटी खाली करने को कहा जा रहा है . दूसरी तरफ ये आशंका भी जताई जा रही है कि आगामी 15 अगस्त को प्रधानमंत्री लाल किले के प्राचीर से कश्मीर के बारे में कोई बड़ा ऐलान कर सकते हैं . ये भी कहा जा रहा है कि 15 अगस्त को सरकार जम्मू-कश्मीर के हर पंचायत में तिरंगा फहराना चाहती है इसलिए ये सारी कवायद इस सिलसिले में है . इन सारे अफवाहों और तर्कों के बीच सरकार ये कह रही है कि सब ठीक है लेकिन आम आदमी से लेकर नेता तक सरकार के क़दमों के बारे में सिर्फ अनुमान ही लगा रहे हैं , सरकार के मन की थाह किसी को नहीं लग रही .