क्या है सिंधु जल संधि और इसके टूटने से कैसे प्यासा मरेगा पाकिस्तान

देश मे जब भी पाक की तरफ से कोई आतंकी हमला किया जाता है तो हमेेशापाकिस्तान की तरफ बहने वाली नदी का पानी रोकने की बात की जाती है। वो बात अलग है कि ये मांग सिर्फ मांग ही रही और सरकारों ने इसके बारे में गम्भीरता से सोचना तक ज़रूरी नही समझा। अभी हाल ही में हुए पुलवामा हमले के बाद एक बार फिर से मांग उठ गई कि भारत को सिंधु जल समझौते को तोड़कर पाकिस्तान की तरफ बहने वाले पानी को रोक देना चहिए। 
अभी कल ही केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी कह दिया है कि भारत पाकिस्तान की तरफ जाने वाले पानी को रोकने जा रहा है।

जिस समझौते पर इतना विवाद है क्या आप इसके बारे में जानते है?? क्या आप जानते है कि सिंधु जल समझौता क्या है और अगर वाकई पानी रुक जाए तो पाकिस्तान को क्या क्या नुकसान होगा।

आपको वही बताते है।पर इसके लिए आपको 1960 में चलना होगा।
ये वो साल था जब आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान के बीच सिंधु जल समझौता हुआ था।
इसमें सिंधु नदी बेसिन में बहने वाली 6 नदियों को पूर्वी और पश्चमी यानी ईस्ट और वेस्ट दो हिस्सों में बांट दिया गया।
पूर्वी हिस्से में बहने वाली तीन नदियों,सतलज,रावी,और व्यास के पानी पर भारत का पूरा अधिकार है जबकि पश्चिम हिस्से में बह रही सिंधु,चिनाब और झेलम के पानी का इस्तेमाल भारत के लिए सीमित कर दिया गया। संधि के मुताबिक हमारा देश पश्चिम में बहने वाली इन तीन नदियों के पानी का कुल 20 प्रतिशत ही अपने पास रोक सकता है।

अब यहां आपके लिए जानना बहुत जरूरी है कि भारत अपनी 6 नदियों से कुल 80% पानी पाकिस्तान भेजता है। हम चाहे तो इन नदियों पर हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बना सकते है लेकिन उसको लिए हमे पहले रन ऑफ द रिवर प्रोजेक्ट बनाने होंगे जिनके तहत पानी को रोका नही जा सकता। इसके अलावा भारत सिंचाई के लिए भी इन नदियों का इस्तेमाल कर सकता है 

पानी रोकने से पाकिस्तान को क्या नुकसान है.

पाकिस्तान भले ही भारत को तबाह करने की गीदड़भभकी देता रहा हो लेकिन वो ना जाने क्यो भूल जाता है कि अगर भारत सिर्फ अपने यहां से पाक जाने वाले सारे पानी को रोक दे तो पाकिस्तान प्यासा मर जाएगा।

 कुल लम्बाई 3 हजार किलोमीटर की लंबाई के साथ  सिंधु नदी दुनिया की सबसे बड़ी नदी है। चिनाब,झेलम,सतलज,रावी और व्यास जैसीइसकी पार्टनर नदियां सिंधु नदी से पाकिस्तान में ही मुलाकात करती है और फिर एक साथ मिलके ही आगे बढ़ती है

। 
1)पाकिस्तान के दो तिहाई हिस्से में सिंधु और उसकी सहायक नदियां आती है।
2) पाकिस्तान की 2करोड़ 6 लाख एकड़ जमीन की सिंचाई इन्ही नदियों पर निर्भर है।
3) अगर भारत ने पानी रोका तो पाक में पीने का पानी का बड़ा संकट पैदा हो जाएगा।
4) पानी रुकने से पाक की खेती और विद्युत व्यवस्था बुरी तरीके से चरमरा जाएगा।
5) पहले से ही कर्ज में डूबे पाकिस्तान के लिए ये एक बड़ा झटका होगा।

कैसे रुकेगा पानी-

मौजूदा हालात में पाक की तरफ बहने वाले पानी को रोकने की बात कर कोई कर है। लेकिन ये कोई छोटी मोटी नदी नही है बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी नदी है जिसमे कई नदियों का खूब सारा पानी है जिसको रोकना आसान कतई नही है। हम ये नही कहते कि इसको रोका नही जा सकता,रोका जा सकता है बिल्कुल रोका जा सकता है पर इसके लिए भारत को बांध और ढेर सारी नहरे बनानी पड़ेगी जिसके लिए बहुत सारा वक्त और पैसा लगेगा। इसके अलावा दोनो दोनो देशो के बीच युद्ध भी हुआ लेकिन फिर भी ये सन्धि चलती रही। इस संधि को सहयोग के ग्लोबल मॉडल की तरह पेश किया जाता है और ये टूटी तो भारत की छवि को कुछ हद नुकसान पहुँचेगा । 
वैसे विशेषज्ञ मानते है कि भारत अगर पश्चमी नदियों का पानी अपने हक के मुताबिक पूरी तरह से इस्तेमाल करना चालू करके उससे बिजली बनाना शुरू कर दे तो उससे भी पाक को अच्छा खासा नुकसान पहुँचाया सकता है। 


बाकी मोदी साहब के आने के बाद दुनिया भर में भारत पाकिस्तान के खिलाफ पर्याप्त सबूत दे ही चुका है और अगर भारत सिंधु जल सन्धि खत्म करने का सोचता भी है तो शायद ज्यादातर लोग भारत के पक्ष में ही दिखाई देंगे। ख़ैर,देखना दिलचस्प होगा पाक का पानी वास्तव में ही रोका जाएगा या ये भी बस एक चुनावी जुमला ही साबित होगा।

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