भारत-पाक के बीच चलने वाली ‘समझौता एक्स्प्रेस’ का इतिहास क्या है

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भारत-पाकिस्तान के बीच चलने वाली एक ऐसी ट्रेन जिसका नाम समझौता एक्सप्रेस है भारत और पाकिस्तान के  तनाव में सबसे पहले समझौता एक्सप्रेस ही प्रभावित होती है  26 फरवरी को भारत द्वारा पाकिस्तान में एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने इस सेवा पर रोक लगा दी थी यह पहला मौका नहीं था जब समझौता एक्सप्रेस पर रोक लगा दी गई हो. इससे पहले भी कई बार भारत पाक तनाव के बीच समझौता एक्सप्रेस पर रोक लगी है  साल 2001 में जब संसंद पर हमला हुआ था तब भी समझौता एक्सप्रेस रोक दी गयी थी इतना ही नही 2007 में पाकिस्तान की पूर्व PM बेनजीर भुट्टो पर हुए हमले के बाद भी इस ट्रेन को रोक दिया गया था

भारत में यह ट्रेन राजधानी दिल्ली से पंजाब में स्थित अटारी तक जाती है इसके बाद अटारी से वाघा बॉर्डर तक तीन किलोमीटर की सीमा पार करती है इस दौरान BSF के जवान घोड़ागाड़ी से इसकी निगरानी करते हैं इसके साथ ही जवान पटरियों की पड़ताड़ भी करते चलते है सीमा को पार करने के बाद यह ट्रेन पा‌किस्तान के लाहौर तक जाती है इस ट्रेन के पहुंचने में कोई देरी ना हो इसीलिए ट्रेन दिल्ली से निकलने के बाद अटारी तक जाने के बीच में इसका कोई भी स्टापेज नही है


भारत और पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति पर एक नजर डाला जाए तो यह बात स्पष्ट हो जायगी  की भारत और पाकिस्तान साल 1947 तक हिन्दुस्तान नाम के एक ही राष्ट्र हुआ करते थे देश की आजादी के वक्त भारत-पाकिस्तान विभाजन हुआ था आज भी ‌दिल्ली और लाहौर के लोगों से बात करेंगे तो पता चलेगा कि उनके रिश्तेदार भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों में हैं इतना ही नही दोनो देशों के बीच व्यापार भी होता है भारत और पाकिस्तान के बीच कई सामानों का आयात निर्यात भी होता है

समझौता एक्सप्रेस में कुल 6 स्लीपर कोच और एक  3rd AC कोच है दिल्ली रेलवे स्टेशन से यह ट्रेन सप्ताह में दो बार चलती है इसके लिए पुरानी दिल्ली में अलग से प्लेटफॉर्म भी बनाया गया है सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समझौता एक्सप्रेस में  प्रवेश करने से पहले ही यात्रियों की पूरी गहन पड़ताल के बाद ही इस ट्रेन में बिठाया जाता है 


समझौता एक्सप्रेस में एक जबर्दस्त धमाका भी हुआ था यह धमाका साल 2007 में  दिल्ली से करीब 80 किलोमीटर दूर पानीपत के दीवाना रेलवे स्टेशन के पास हुआ था इस हादसे में 68 लोगों की मौत हो गई थी जब ये हादसा हुआ तब ट्रेन दिल्ली से लाहौर के लिए निकली थी मारे गए लोगों में अधिकांश पाकिस्तानी मूल के लोग थे मामले में सालों तक जांच-पड़ताल चलती रही, लेकिन सबूतों के अभाव में सभी आरापियों को जमानत मिल गई
इतिहास गवाह है की भारत और पाकिस्तान के बीच समय समय पर सम्बन्ध बिगड़ते ही रहते है जिसके कारण समझौता एक्सप्रेस पर ब्रेक लग जाती है लेकिन अभी तक इस समस्या का कोई स्थायी सामाधान नही निकल पाया है भारत से कई यात्री पाकिस्तान के लिए इसी ट्रेन से जाते है यहां तक की काफी संख्या में सिक्ख श्रद्धालु भी पाकिस्तान में मौजूद ननकाना साहिब के लिए जाते है इस ट्रेन पर रोक लगा देने के बाद कई यात्री पाकिस्तान में फंस जाते है इसलिए इसका कोई स्थाई समाधान जरूर निकलना चाहिए ताकि इस ट्रेन से आने जाने वाले यात्रियों को किसी तरह की कोई परेशानी ना हो

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