क़तर में पतंजलि है हलाल सर्टिफाइड, जानिये क्या होता है हलाल सर्टिफिकेट

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ज़ोमैटो को लेकर खड़ा हुए हालिया विवाद ने हलाल शब्द को एक बार फिर चर्चा में ला दिया . दरअसल ज़ोमैटो ने एक मुस्लिम यूजर से हलाल मीट न दे पाने के कारण खेद जताया था जिसके बाद लोगों ने ज़ोमैटो के दोहरे रवैये पर सवाल उठाये और देश में हलाल शब्द को लेकर बहस छिड़ गई . उसके बाद द प्रिंट की जर्नलिस्ट जैनब सिकंदर ने अपने ट्विटर अकाउंट पर 2018 का एक आर्टिकल शेयर किया जिसमे लिखा था कि पतंजलि के प्रोडक्ट को क़तर में हलाल सर्टिफिकेट मिला है . जैनब सिकंदर का ये ट्वीट दरअसल दक्षिणपंथियों को चिढाने के लिए था . डेक्कन क्रोनिकल के आर्टिकल को शेयर करने हुए जैनब ने लगभग तीन लाइनों में hahaha लिखा .

पतंजलि योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी है और भारत में हलाल शब्द का मतलब मीट या मीट से बने प्रोडक्ट समझा जाता है . ऐसे में पतंजलि के प्रोडक्ट को हलाल सर्टिफिकेट मिलने की खबर से लोगों का चौंकना स्वाभाविक है कि क्या पतंजलि के प्रोडक्ट में मीट का इस्तेमाल होता है . तो इससे पहले कि आप पतंजलि के बारे में कोई गलत धारणा बनायें, आइये आपको बताते हैं कि हलाल सर्टिफिकेट क्या होता और ये कैसे मिलता है?

इस्लाम में चीजों को हलाल और हराम के जरिये समझा जाता है . जो चीज इस्लामिक नियमों के हिसाब से हो उसे  हलाल कहते हैं और जो चीज इस्लामिक नियमों के हिसाब से नहीं हो उसे हराम कहते हैं . भारत में हलाल को अक्सर मीट से जोड़ कर देखा जाता है मुस्लिम समुदाय के लोग हलाल मीट का इस्तेमाल करते हैं और हिन्दू और सिख धर्म के लोग झटका मीट का उपयोग करते हैं. लेकिन जब बात हलाल सर्टिफिकेट की आती है तो ये सारी समझ धरी की धरी रह जाती है .

कई मुस्लिम देश में खाद्य या अन्य उत्पाद के लिए हलाल सर्टिफिकेट आवश्यक होती है . हलाल सर्टिफिकेट ऐसे प्रोडक्ट्स को दिए जाते हैं जिन्हें बनाने में किसी जानवर, केमिकल्स या अल्कोहल का इस्तेमाल नहीं किया गया है। इसके अलावा इन चीजों में एनिमल फैट या कीड़ों के रंग के अलावा दूध से बनी चीजों और बीवैक्स का भी इस्तेमाल नहीं किया जाता है। यानी कि जिन प्रोडक्ट्स को हलाल सर्टिफिकेट मिला है वो पूरी तरह से शुद्ध शाकाहारी हैं .

दुनिया के कई देशों में प्रोडक्ट्स को हलाल सर्टिफिकेट दिया जाता है साथ ही भारत में भी हलाल सर्टिफिकेट दिया जाता है . बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक़ अकेले गुजरात में 300 से अधिक कम्पनियां ऐसी हैं जो हलाल सर्टिफ़ाइड हैं . अब हलाल कॉस्मेटिक्स का चलन भी जोर पकड़ रहा है . विदेशों में बाकायदा हलाल सर्टिफ़ाइड  दुकानें होती है .

शुरू में हलाल सर्टिफ़ाइड  प्रोडक्ट्स सिर्फ इस्लाम को मानने वालों के लिए बनाया जाता था लेकिन जब इसके बारे में पूरी जानकारी बाहर आई तो हलाल सर्टिफ़ाइड  प्रोडक्ट्स की मांग अन्य धर्मों में भी बढ़ गई . देश की हलाल सर्टिफाइंग बॉडी हलाल इंडिया के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर मोहम्मद जिन्ना ने बताया, ‘हलाल सर्टिफिकेशन का मतलब है कि प्रॉडक्ट बनाने में क्लीन सप्लाई चेन और कम्प्लायंस का पूरा ध्यान रखा गया है, जिसमें सोर्सिंग से लेकर ट्रेड तक शामिल है, यानी कि कंपनियां हैंडलिंग, पैकेजिंग, लेबलिंग, वितरण और भंडारण में कुछ स्टैंडर्ड्स का सख्ती से पालन करती हैं ताकि इन प्रॉडक्ट्स को हलाल क्वॉलिफाई किया जा सके।’ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि आज के युवा और शिक्षित वर्ग पशु कल्याण को लेकर ज्यादा जागरूक होते हैं और इस कारण हलाल सर्टिफ़ाइड प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ी है .

भारत में चार संस्थाएं हैं जो हलाल सर्टिफिकेट जारी करती है . ये संस्थाएं हैं – हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, हलाल सर्टिफिकेशन सर्विस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जमीअत उलमा –ए-महाराष्ट्र और जमीअत उलमा-ए –हिन्द हलाल ट्रस्ट.

हलाल सर्टिफिकेट ना सिर्फ प्रोडक्ट्स बल्कि दवा फ़ैक्ट्री, अस्पताल, बैंक, होटल और इंटरनेट साइट्स को भी दिए जाते हैं. अब आप सोचेंगे कि हलाल सर्टिफ़ाइड वेबसाईट क्या होता है ?. तो हलाल सर्टिफ़ाइड वेबसाईट पर जब आप अश्लील सामग्री, साहित्य, सूअर के मांस जैसी चीजों को टैप करेंगे तो आपको कोई रिजल्ट नहीं मिलेगा .

तो अब आते हैं जैनब सिकंदर के ट्वीट पर . जैनब को भी शायद हलाल सर्टिफिकेट का मतलब पता नहीं है . तभी उन्होंने दक्षिणपंथियों को चिढाने के लिए ये ट्वीट किया कि पतंजलि को हलाल सर्टिफिकेट मिला है क़तर में . लेकिन सिर्फ जैनब ही नहीं . उस ट्वीट पर रिप्लाई करने वाले लोग भी खुद को ज्ञानी समझ रहे हैं . तो अगली बार अगर आपको किसी प्रोडक्ट पर हलाल सर्टिफ़ाइड लिखा दिखे तो मुंह मत बनाइएगा .