अपनी एक गलती से टुक’ड़े-टुक’ड़े हो जाएगा पाकिस्तान

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1947 में जब भारत को आज़ादी मिली तो मुसलमान अपने लिए अलग देश चाहते थे, देश के टुकड़े कर के उन्हें पाकिस्तान दिया गया ताकि अपना देश ले कर वो सुकून से रह सकें . लेकिन उनसे अपना नया मुल्क नहीं संभला और 1971 में पाकिस्तान का विभाजन हो गया . पूर्वी पाकिस्तान अलग हो कर बांग्लादेश बना .
पाकिस्तान से अपना बचा खुचा मुल्क नहीं संभल रहा था लेकिन उसकी हसरतें उसकी हैसियत से भी बड़ी थी .आज़ादी के बाद से ही पाकिस्तान कश्मीर लेना चाहता था.

पाकिस्तान अपने मुल्क पर ध्यान देने की बजाये हमेशा भारत को नुक्सान पहुंचाने की कोशिश में लगा रहा और उसकी अपनी स्थिति ख़राब होती गई …. अब हालात ये है कि पाकिस्तान ना सिर्फ दीवालिया होने की कगार पर खड़ा है बल्कि कई टुकड़ों में बंट जाने का भी खतरा है….. पाकिस्तान, कश्मीर को हासिल करने के लिए वहां अलगाववाद को हवा देते रहा लेकिन खुद उसके मुल्क में अलगाववाद पनपता रहा . पाकिस्तान में चार प्रान्त है, बलूचिस्तान, सिंध, खैबर पख्तुन्ख्वा और पंजाब…. गिलगित बाल्टिस्तान पाक अधिकृत कश्मीर के हिस्से हैं ….. बलूचिस्तान, सिंध, गिलगित बाल्टिस्तान ये सारे इलाके पाकिस्तान ने अलग होकर अपना स्वतंत्र अस्तित्व चाहते हैं.

चूंकि कश्मीर अभी चर्चा में है तो पहले बात करते हैं गिलगित –बाल्टिस्तान की …. 1 नवम्बर 1947 तक गिलगित और बाल्टिस्तान जमू-कश्मीर का हिस्सा था … 2 नम्वंबर 1947 को गिलिगित स्काउट के स्थानीय कमांडर कर्नल मिर्जा हसन खान ने महाराजा हरी सिंह के खिलाफ बगावत कर दिया और खुद को आज़ाद घोषित कर लिया … इस विद्रोह से दो दिन पहले ही महाराजा हरी सिंह ने कश्मीर के भारत में विलय के घोषणापत्र पर दस्तखत किया था … कमांडर कर्नल मिर्जा हसन खान ने गिलगित – बाल्टिस्तान को आज़ाद तो घोषित कर दिया लेकिन उसकी आज़ादी ज्यादा दिनों तक बरक़रार नहीं रह सकी . 21 दिनों बाद पाकिस्तान ने यहाँ अपनी सेना भेजी और इस क्षेत्र पर कब्ज़ा कर लिया और अपना प्रतिनिधि नियुक्त कर दिया …

चूंकि इस कब्जे से पहले ही महाराजा हरी सिंह ने कश्मीर के भारत में विलय पर हस्ताक्षर कर चुके थे इसलिए ये कब्ज़ा अवैध कहलाया और ये हिस्सा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के हिस्से में चला गया .. गिलगित –बाल्टिस्तान लद्दाख क्षेत्र का हिस्सा है … 28 अप्रैल 1949 को गिलगित बाल्टिस्तान की सरकार ने इस क्षेत्र का सारा नियंत्रण पाकिस्तान सरकार को सौंप दिया …. ये समझौता करांची समझौता कहलाया .इस समझौते में कोई भी स्थानीय नेता शामिल नहीं था … गिलगित-बाल्टिस्तान के उत्तर में स्थित एक इलाके को कारकोरम राजमार्ग के निर्माण के लिए चीन को ‘गिफ्ट’ कर दिया.,, चीन ने इस क्षेत्र में भारी निवेश किया जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया . उनका मानना है कि चीन यहाँ जनसांख्यिकीय चरित्र को बदलना चाहता है …. इस क्षेत्र में अक्सर विद्रोह की आवाजें उठती रहती है लेकिन पाकिस्तान सैन्य कारवाई से इसे कुचल देता है . इस क्षेत्र में विदेशी मीडिया पर प्रवेश प्रतिबंधित है इसलिए यहाँ कि ख़बरें बाहर नहीं आ पाती .

जब कश्मीर से केंद्र सरकार ने धारा 370 को हटा लिया तो गिलगित बाल्टिस्तान को भी अपनी आज़ादी की उम्मीद दिखी … वहां के नेता सेंग एच. सेरिंग ने एक वीडियो जारी कर गृह मंत्री अमित शाह से कहा है कि क्षेत्र के लोग भारत के साथ जुड़ना चाहते हैं। साथ ही माँग की है कि उन्हें भी भारतीय संविधान में प्रतिनिधित्व दिया जाए।

अब आते हैं बलूचिस्तान पर … बलूचिस्तान पाकिस्तान का दक्षिण –पश्चिमी प्रान्त है … ये पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रान्त है … पाकिस्तान के कुछ क्षेत्र का 44 प्रतिशत बलूचिस्तान है . यहाँ कि आबादी बलूच और पश्तून बहुल है.,,, बलूचिस्तान खनीज बहुल क्षेत्र है लेकिन सबसे गरीब प्रान्त भी है …. आज़ादी से पहले चार रियासतों मकरन, खरन, लासबेला और कलत से मिलकर बलूचिस्तान बना था. 1947 में ही मकरन, खरन, लासबेला पाकिस्तान के साथ मिल गायवे लेकिन कलत ने आज़ाद रहने का फैसला किया . मार्च 1948 में पाकिस्तान ने उस पर हमला करके कब्ज़ा कर लिया . 1948 में ही बलूचों ने पाकिस्तान के खिलाफ विद्रोह कर दिया था लेकिन 2003 के बाद विद्रोह ने जोर पकड़ लिया …. बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी, लश्कर-ए-बलूचिस्तान और बलूच लिबरेशन युनाइटेड फ्रंट ने वहां आज़ादी की जंग छेड़ रखी है … इन संगठनों का कहना है कि पाकिस्तान उनके खनिजों का दोहन करता है आयर उनका शोषण कर उन्हें गरीब भी बनाये रखता.. इसलिए उन्हें आज़ादी चाहिए … 2016 में जब पीएम नरेंद्र मोदी ने लाल किले से बलूचिस्तान का जिक्र किया तो बलूचों में आज़ादी कइ लिए भारत के सहयोग की उम्मीद जगी …. बलूच नेताओं का कहना है कि जैसे पूर्वी पाकिस्तान की मदद कर भारत ने उन्हें आज़ादी दिला कर बंगलादेश का निर्माण किया वैसे ही सहयोग बलूचिस्तान के आज़ादी की लड़ाई में भी दे…..
गिलगित बाल्टिस्तान, पाक अधिकृत कश्मीर, बलूचिस्तान के बाद पाकिस्तान का सिंध प्रान्त भी आज़ाद होने के लिए सुलग रहा है … वहां के लोग आज़ाद होकर सिन्धुदेश बनाना चाहते हैं … और इसलिए अक्सर आज़ाद करो आज़ाद करो .. सिन्धु देश को आज़ाद करो के नारे के साथ जुलूस निकलते हैं जिसमे हज़ारों लोग शामिल होते हैं … सिंध की आबादी 5 करोड़ है …
सबसे दिलचस्प बात ये है कि चारों तरफ से टुकड़े टुकड़े हो जाने की कगार पर खड़ा कंगाल पाकिस्तान अक्सर भारत को युद्ध की धमकियाँ देते रहता है