क्या है माहौल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के इन जिलों में

374

पश्चिमी उत्तर पप्रदेश के बहुत से जिलों के बाड़े में हमने आपको बताया … आज के भाग में बचें हुए उन सभी जिलों का ज़िक्र हम करेंगे और वहाँ के चुनावी महाल पर चर्च करेंगें … जिन जिलों और लोक सभा सीट के बारे में हम बात करने वाले है वो हैं – बरेली, बदायूं, अमरोहा, बुलंदशहर,अलीगढ, हाथरस, रामपुर, फर्रुखाबाद और औरैया…

बरेली
यूं तो बरेली झूम्कों के लिए मशहूर है… लेकिन यहाँ की लोकसभा सीट राजनीतिक लिहाज से उतनी ही ज़रूरी है…. पिछले 3 दशक से यहाँ भारतीय जनता पार्टी का राज रहा है…यहां के सांसद संतोष गंगवार कई बार इस सीट पर चुनाव जीत चुके हैं… और इस समय केंद्र सरकार में मंत्री भी है… बरेली क्षेत्र में संतोष गंगवार का राजनीतिक दबदबा है….. 2019 में एक बार फिर बीजेपी को उम्मीद है कि संतोष गंगवार पार्टी के लिए यहां पर कम खिलाएंगे…
बरेली लोकसभा सीट पर अभी तक 16 बार चुनाव हुए हैं I इसमें से 7 बार भारतीय जनता पार्टी ने बाजी मारी है…. जिसमें से 6 बार तो लगातार जीत दर्ज की गई थी.

पिछले लोकसभा चुनाव में यहां समूचे उत्तर प्रदेश की तरह मोदी लहर का असर दिखा था. बीजेपी के संतोष गंगवार को इस सीट पर 50 फीसदी से अधिक वोट प्राप्त हुआ था. …

अलीगढ
हमेशा से अपने तालों के लिए मशहूर और अपने मुश्लिम यूनिवर्सिटी को लेकर चर्चा में रहने वाला अलीगढ हर मायने से लोकसभा चुमाव के लिए अहम् है … पश्चिमी उत्तर प्रदेश का यह ऐतिहासिक शहर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कारण दुनियाभर में खासा चर्चित रहा है. मुस्लिम बहुल अलीगढ़ संसदीय सीट पर पिछले चुनाव में बीजेपी ने अप्रत्याशित रूप से जीत हासिल की थी….
अलीगढ़ लोकसभा सीट बचाने की चुनौती भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सामने है…. हालांकि इस बार चुनाव में सपा-बसपा का गठबंधन हो चुका है…

बीजेपी के उम्मीदवार और निवर्तमान सांसद सतीश कुमार गौतम को बहुजन समाज पार्टी और सपा के संयुक्त उम्मीदवार डॉक्टर अजित बालियान, कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह चौधरी, आम आदमी पार्टी के सतीश चंद्र शर्मा और प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के दीपक चौधरी से चुनौती का सामना करना पड़ेगा..

आपको बता दें की पिछले साल एएमयू में पाकिस्तान के जनक मोहम्मद अली जिन्ना की तस्वीर पर काफी बवाल हुआ था… स्थानीय सांसद सतीश गौतम ने जिन्ना की तस्वीर पर आपत्ति जताई थी, जिसके बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तस्वीर हटाने का आदेश दिया था…. तब कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर राजनीतिक तौर पर काफी शोर हुआ था…..
वैसे 1952 और 1957 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी. लेकिन इन चुनाव के बाद लगातार चार चुनाव यहां गैर कांग्रेसी दलों ने जीत हासिल की. 1967 और 1971 में भारतीय क्रांति दल के अलावा 1977 और 1980 में जनता दल ने जीत हासिल की थी.

90 के दशक में देशभर में रामलहर के दौर में बीजेपी की यहां एंट्री हुई और 1991, 1996, 1998 फिर 1999 में बीजेपी की शीला गौतम ने लगातार जीत दर्ज की. लेकिन 2004 के चुनाव में कांग्रेस और 2009 के चुनाव में बसपा ने यहां से बाजी मारी. हालांकि 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के दम पर बीजेपी के लिए सतीश गौतम ने बड़ी जीत दर्ज की थी…..

अलीगढ़ लोकसभा सीट पर मुस्लिम वोटरों का काफी प्रभाव है. यहां अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी होने के कारण यहां के मुस्लिम वोटरों का संदेश पूरे उत्तर प्रदेश में जाता है. 2014 के चुनाव में बीजेपी के सतीश गौतम ने एकतरफा जीत दर्ज की थी..

बदायूं
पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बदायूं लोकसभा क्षेत्र समाजवादी पार्टी का गढ़ रहा है…. पिछले 6 लोकसभा चुनाव से समाजवादी पार्टी इस सीट पर जीतते आई है मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव अभी यहां से सांसद हैं…. वह लगातार दो बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं….2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर होने के बावजूद समाजवादी पार्टी यहां से बड़े अंतर से जीती, ऐसे में अब समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के बाद भी भारतीय जनता पार्टी की जीत इतनी आसान नहीं दिख रही है…..
बदायूं लोक सभा सीट पर शुरूआती दिनों में कांग्रेस का दबदबा रहा है…लेकिन पिछले दो दशकों से इसपर समाजवादी पार्टी का दबदबा है…

अमरोहा
जौन एलिया जैसे दिग्गज साहित्याकार की धरती है अमरोहा… पश्चिमी उत्तर प्रदेश की इस लोकसभा सीट पर सभी की नजरें हैं….. मुस्लिम बहुल इस सीट पर पिछले चुनाव में सभी को चौंकाते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बड़ी और शानदार जीत दर्ज की थी…. इस सीट पर मुस्लिमों समाज के अलावा जाटों का भी वर्चस्व रहा है……

बुलंदशहर
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में इस बार लोकसभा चुनाव बेहद खास होने वाला है क्योंकि कुछ महीने पहले गोहत्या के शक में हुई हिंसा के बाद यह क्षेत्र पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था…. देश में लोकसभा चुनाव का प्रचार जोरों पर है तो बुलंदशहर भी इसमें पीछे नहीं है और लोगों की नजर भी इस संसदीय क्षेत्र पर टिकी हुई है क्योंकि इसे भारतीय जनता पार्टी का गढ़ कहा जाता है.. . बुलंदशहर संसदीय सीट से फिलहाल बीजेपी के भोला सिंह ही सांसद हैं…..पिछले चुनाव में उन्होंने यहां से प्रचंड जीत हासिल की थी…. 2014 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में मोदी लहर दिखा जिस कारण बीजेपी का जादू चला था…… बुलंदशहर में भी बीजेपी के भोला सिंह को प्रचंड जीत हासिल की थी…..

हाथरस
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खास हाथरस संसदीय सीट पर पिछले दो दशक से यहां पर भारतीय जनता पार्टी का वर्चस्व रहा है और यह मुस्लिम-जाट वोटर बाहुल्य क्षेत्र है… बीजेपी की कोशिश इस सीट पर अपनी पकड़ बनाए रखने की है तो राज्य में नए समीकरण के बाद समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन के बाद सपा अपना उम्मीदवार यहां से उतार रही है… 2014 में बीजेपी के राजेश कुमार दिवाकर को बड़ी जीत मिली थी….. उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के उम्मीदवार को 3 लाख से ज्यादा मतों के अंतर से हराया था….

रामपुर
उत्तर प्रदेश में कई लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां पर मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक है….. पश्चिमी उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट इन्हीं में से एक है….. यहां पर 50 फीसदी से भी अधिक जनसंख्या जो है वो मुस्लिमों की है, ये क्षेत्र समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान का गढ़ माना जाता रहा है….. हालांकि, 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां से भारतीय जनता पार्टी के नेपाल सिंह ने जीत दर्ज की थी…. 2014 में उत्तर प्रदेश से कोई भी मुस्लिम सांसद चुनकर नहीं गया था, जो कि इतिहास में पहली बार हुआ था…. और इसी को ध्यान में रख कर is बार बीजेपी ने वहां से जाया प्रदा को टिकेट दिया है …
वैसे आज़म खान और जाया प्रदा के तल्ख़ रिश्तो के चर्चे तो हर जगह है … इनकी आपसी रंजिस चुनावी मैंदान में भी देखने को मिलती आये है…

फर्रुखाबाद
उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण लोकसभा सीटों में से फर्रुखाबाद संसदीय सीट भी काफी अहम है….. ये इलाका सूबे के आलू उत्पादन में अव्वल है…. इसीलिए फर्रुखाबाद शहर को पोटैटो सिटी के नाम से जाना जाता है……

फर्रुखाबाद राज्य के कानपुर मंडल का हिस्सा है…. यहां की संसदीय सीट पर मौजूदा समय में बीजेपी का कब्जा है…. जबकि इससे पहले कांग्रेस की मनमोहन सिंह की सरकार में विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शीद इसी सीट से चुनकर संसद पहुंचे थे….. ये ऐसी सीट है जहां से समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया भी जीत हासिल कर चुके हैं…..
उत्तर प्रदेश एक बड़ा राज्य है… हमने 3 भागों में आपको पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चुनावी माहौल के बारे में बताने की कोशिश की.. लेकिन चुनाव का परिणाम पूर्ण रूप से जनता पर टिका होता है… राजनीतिक पार्टियां पुरजोर कोशिश करती है जनता को लुभाने की लेकिन वो कहते है न “ये public है सब जानती है”