देश को मिले नए सेना अध्यक्ष ,अब इनके हाथों में होगी भारतीय सेना कि कमान

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भारतीय थलसेना को अपने नए सेना प्रमुख मिल गए हैं. जनरल विपिन रावत ने अपने रिटायरमेंट से पहले लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को थलसेना का पदभार सौंपा. वहीं जनरल बिपिन रावत को देश का पहला चीफ ऑफ डिफेन्स स्टाफ बनाया गया है.

मंगलवार को नई दिल्ली के सेना भवन में जनरल रावत ने लेफ्टिनेंट जनरल मनोज मुकुंद नरवणे को पूरी परंपरा के साथ कार्यभार सौंपा. नरवणे सितंबर से पहले सेना में सेना उप-प्रमुख थे और उससे भी पहले वो ईस्टर्न कमान के प्रमुख थे जो चीन की सीमा पर तैनात रहती है. नरवणे भारत-चीन की सीमा पर कार्यरत रहे हैं इसी लिए उन्हें सीमा की अच्छी जानकारी भी है. नरवणे अपने अच्छे व्यवहार और काम के प्रति निष्ठा रखने के लिये जाने जाते हैं.

नरवणे मुश्किल परिस्तिथियों में सफलता पाने, सहकर्मियों के साथ अच्छा व्यवहार रखने,बेहतरीन नेतृत्व करने,अधिकारियों के बीच साफ सुथरी छवि रखने के लिए लोकप्रिय हैं. नरवणे के लिए कहा जाता है कि सीमा पर चाहे कितना भी तनाव रहे लेकिन वह अपने सैनिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं. साथ ही उन्हें अपनी ड्यूटी पर सतर्क रहने वाले अधिकारी के रूप में भी जाना जाता है. उनको अपनी बातें बिना किसी झिझक के बोलने, अनुशासन और समय का पाबंद होने के कारण हार्ड टास्क मास्टर भी कहा जाता हैं.

अपने 37 वर्षो के कार्यकाल में नरवणे ने कई पदों पर कार्यभार संभाला. नरवणे ने जम्मू कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स बटालियन की कमान संभाली और पूर्वी मोर्चे पर इन्फैन्ट्री ब्रिगेड का मोर्चा भी संभाला. नरवणे को  श्रीलंका में भारतीय शांति रक्षक बल का हिस्सा भी बनाया गया वहीं तीन वर्षों तक म्यामांर स्थित भारतीय दूतावास में रक्षा अताशे भी रहे. नरवणे को अपने अच्छे प्रदर्शन और छवि रखने के लिए कई सम्मानों से भी नवाजा गया है. जिसमें उनको सेना मेडल और विशिष्ट सेना मेडल से दिए जा चुके हैं. नरवणे राष्ट्रीय रक्षा अकादमी और भारतीय सैन्य अकादमी के छात्र भी रहे, वहीं उनको  जून 1980 में सिख लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट की सातवीं बटालियन में कमीशन प्राप्त हुआ था.