कौन हैं विदिशा मैत्रा, जिन्होंने UN में पाकिस्तान को धो डाला!

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एक नाम जो इस समय चर्चा का विषय बना हुआ है. ये नाम है विदिशा मैत्रा का..पाकिस्तान की धज्जियां उड़ाने वाली विदिशा मित्रा की जमकर तारीफ हो रही है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के नाम के साथ नियाजी जोड़कर विदिशा ने सोशल मीडिया पर खूब वाहवाही लूटी… ये कोई पहला मौका नही जब भारतीय युवा ने पाकिस्तान की धज्जियां उड़ाई हो.. एनम गंभीर से लेकर विदिशा मैत्रा तक देश का प्रतिनिधित्व करते हुए इन युवाओं ने पाकिस्तान को यूएन में ही धोया है.

पाकिस्तान ने जब यूएन में झूठ का सहारा लेकर भारत पर हमला किया.. इमरान खान नियाजी का भाषण हेट स्पीच से ज्यादा कुछ नही लगी, जिसमें भारत के खिलाफ जहर तो था ही, परमाणु युद्ध की धमकी भी थी. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नियाजी के लगभग 50 मिनट के भाषण को पांच मिनट में ही ध्वस्त कर दिया गया. इन्ही पांच मिनट में पाकिस्तान को वो जवाब मिला जिसने उसे पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दिया…. सभी मुद्दों पर भारत की तरफ यूएन में विदिशा मैत्रा ने जवाब दिया. यहाँ सबसे पहले आपको ये जानना बहुत जरूरी है कि विदिशा मैत्रा आखिर है कौन? विदिशा मैत्रा एक युवा राजनयिक है. वे 2009 बैच की आईएफएस अधिकारी है. जिन्होंने शुक्रवार को भारत के ‘ राइट टु रिप्लाइ’ के तहत जवाब देते हुए अपने तर्कों से पाक की बोलती बंद कर दी. यूएन में भारतीय विदेश मंत्रालय में डेप्युटी सेक्रेट्री हैं और PP&R मतलब पॉलिसी प्लानिंग और रिचर्स डिवीजन में तैनात हैं. वे वहां भारतीय मिशन की सबसे नई सदस्य हैं. ये तो विदिशा मैत्रा की छोटी सी पहचान है लेकिन उनके काम ने, उनके जवाब ने आज उन्हें हीरो बना दिया है. इससे पहले भी साल 2016 में एनम गंभीर ने नवाज शरीफ के भाषण पर जवाब दिया था तब भी पाकिस्तान की बोलती बंद हो गयी थी, और भारतीय युवा का एक मुखर चेहरा उभर कर सामने आया था.

एनम दिल्ली की रहने वाली हैं और उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ जेनेवा से अपनी पढ़ाई पूरी की है. 2005 में उन्होंने Indian Foreign Service ज्वाइन की और 2008 में अर्जें‍टीना में भारत अंबेसी की सेकंड सेक्रेटरी बनीं. उन्हें पाकिस्तान के मामलों की अच्छी जानकारी थी. उन्होंने भी पाकिस्तान को जमकर धोया था. भारत युवाओं को पहले से तवज्जो देता आया है. ऐसा करने के पीछे भी वजह है, क्योंकि पाकिस्तान एक बड़ा मुद्दा था. उसने भारत पर कई आरोप लगाये थे.. इसके लिए किसी सीनियर अधिकारी को जवाब देना चाहिए तो जूनियर अधिकारी ने जवाब क्यों दिया?  संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन (Syed Akbaruddin) ने इस वजह का खुलासा किया है कि क्यों भारत ने एक युवा राजनयिक को इस अहम जिम्मेदारी के लिए चुना. इस पर अकबरुद्दीन ने कहा कि हमने एक युवा राजनयिक को चुना क्योंकि हम चाहते थे कि भारत के जवाब में न्यू इंडिया की झलक मिले. उन्होंने कहा कि हम हमेशा महसूस करते हैं कि युवा राजनयिक आत्मविश्वास से भरे होते हैं, जो एक नए भारत को दर्शाते हैं, जो भारत की स्थिति को स्पष्ट करने की क्षमता रखते हैं. वह उर्जा से भरे होते हैं और उन मुद्दों की गहरी समझ रखते हैं जो कि अपनी प्रकृति में ऐतिहासिक होते हैं. यह हमारी परंपरा है कि भारत का पक्ष रखने के लिए एक उर्जावान, आत्मविश्वास से भरे युवा राजनयिक को चुना जाए. ये वही सैयद अकबरुद्दीन जिन्होंने पिछले साल पाकिस्तान पर जोरदार हमला बोला था.

भाई मैत्रा ने जिस तरह से पाकिस्तान को जवाब दिया है उससे पाकिस्तान को भी समझ आ ही गया होगा कि हमारे जूनियर अधिकारी.. सीनियर अधिकारियों से भी अधिक ऊर्जा के साथ उन्हें धोने के काबिल है. अब थोड़ी सी बात करते हैं विदिशा मैत्रा के पाकिस्तान को दिए गये रिप्लाई पर…

भारतीय राजनयिक विदिशा मैत्रा ने महज 5 मिनट में इमरान की 50 मिनट की स्पीच की धज्जियां उड़ा दी. आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के दोहरे चरित्र पर प्रहार किया, पाकिस्तानी पीएम को उनके पूरे नाम इमरान खान नियाजी से संबोधित करके उन्हें 1971 के इतिहास की याद दिलाई, जब आज के बांग्लादेश और तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में लेफ्टिनेंट जनरल नियाजी ने करीब 1 लाख पाकिस्तानी सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने सरेंडर किया था. इसके बाद तो पाकिस्तान का जमकर मजाक उड़ा.. और विदिशा के इस रिप्लाई से लोगों में ख़ुशी दौड़ गयी.. सोशल मीडिया पर मैत्रा की जमकर तारीफ हुई. हालाँकि कुछ जानकारों का कहना ये भी है कि पाकिस्तान को ज्यादा तवज्जों ना देने के लिए भारत ने जूनियर अधिकारी को जवाब देने के लिए भेजा था.. मलतब भारत ने पाकिस्तान के आरोप को हवा ही नही दी थी इसलिए जूनियर अधिकारी को भारत की तरफ से भेजा गया लेकिन जो जवाब पाकिस्तान को मिला.. उसने ना कि भारत को बल्कि पाकिस्तान चुप हो गया.. ये युवाओं का भारत है.. ये न्यू इंडिया है.. ये महिलाओ के सशक्तिकरण वाला भारत है.

 वहीँ जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक़ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नियासी के भाषण से पाकिस्तानी सेना नाखुश है. उसका मानना है कि इमरान को जिस तरह से कश्मीर का मुद्दा उठाना चाहिए था वो नही कर पाए.. वे मुद्दे से भटक गये और टेरर फंडिंग के लिए अमेरिका को भी घसीट लिया. ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि क्या पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की कुर्सी बचेगी या फिर वही होगा जो पाकिस्तान की सेना करती आई है.. तख्तापलट!