इमरान का पूरा नाम इमरान खान ‘नियाजी’ बोल कर विदिशा ने कुरेद दिए पाकिस्तान के ज़ख्म

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यूनाइटेड नेशन जनरल असेम्बली के 74वें अधिवेशन में पाकिस्तान ने प्रधानमंत्री इमरान खान के जहरीले भाषण के बाद भारत ने राईट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए इमरान के भाषण और प्रोपगैंडा की धज्जियाँ उड़ा दी. भारत की तरफ से मोर्चा सँभालने आई विदिशा मैत्रा ने जब इमरान खान को इमरान खान नियाजी कह कर संबोधित किया तो हर शख्स चौंक पड़ा. सोशल मीडिया पर भी इमरान खान नियाजी टॉप ट्रेंड करने लगा. लोगों का चौंकना स्वाभाविक भी था. क्योंकि शायद ही किसी ने कभी इमरान खान के साथ नियाजी टाइटल जुड़ते सुना होगा.

इमरान के वालिद का नाम था इकरामुल्लाह खान नियाजी. 1952 में पैदा हुए इमरान का पूरा नाम है इमरान खान नियाजी. ऐसे में लोगों के मन में ये सवाल आना तो लाजिमी था कि आखिर क्या वजह हुई कि इमरान खान नियाजी सिर्फ इमरान खान के नाम से जाना गया. या फिर यूँ कहें कि इमरान खान ने नियाजी टाइटल को खुद से अलग क्यों कर लिया? इसकी कहानी जानने के लिए हम आपको ले चलते हैं 1971 में. साल 1971 में दो घटनाएँ हुई थी जिसने पाकिस्तान का इतिहास बदल दिया था. एक घटना ने पाकिस्तान को दो टुकड़ों में बाँट दिया और दूसरी घटना थी पाकिस्तान के राष्ट्रीय क्रिकेट टीम में इमरान खान का प्रवेश.

ये सब जानते हैं कि 1971 की जंग में पाकिस्तान बुरी तरह हारा. उसके 90 हज़ार सैनिकों को भारत के सामने आत्मसमर्पण करना पड़ा और बंगलादेश का जन्म हुआ. पाकिस्तान के 90 हज़ार सैनिकों के आत्मसमर्पण के घोषणापत्र पर पाकिस्तान के जिस जनरल ने हस्ताक्षर किये थे उसका नाम था जनरल एएके नियाजी.

नियाजी एक पख्‍तून ट्राइब है. माना जाता है कि इसकी जड़ें पूर्वी अफगानिस्तान में पाकिस्तान से लगते इलाके में हैं. पाकिस्‍तान के उत्‍तरी-पश्चिमी पंजाब के मियांवाली में नियाजी ट्राइब बहुत पहले आकर बस गई थी. पाकिस्तान के लोगों ने अपने मुल्क के बंटवारे के लिए जनरल नियाजी को जिम्मेदार माना और उन्हें नियाजी टाइटल से नफरत हो गई. इस टाइटल से उन्हें हार का दंश याद आता और लोगों ने नियाजी टाइटल से परहेज करना शुरू कर दिया.

इमरान खान ने भी नियाजी टाइटल से पीछा छुड़ा लिया लेकिन इस टाइटल ने इमरान का पीछा नहीं छोड़ा. UN में जब विदिशा मैत्रा ने इमरान खान को इमरान खान नियाजी कह कर संबोधित किया तो इससे पुरे पाकिस्तान का वो ज़ख्म फिर से हरा हो गया होगा जो 1971 में उन्हें मिला था.