किसी ने छोड़ी लाखों की नौकरी, कोई विदेश से वापस आया और बन गये नेता, पढ़िए पूरी खबर

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राजनीति में अब देश के युवा में दिलचस्पी लेने लगे हैं.. सिर्फ वोट डालने में ही नही, बल्कि चुनाव लड़ने में युवा आगे आ रहे हैं. कोई डॉक्टर, कोई खिलाडी, कोई अभिनेत्री कोई लाखों की नौकरी छोड़कर चुनावी मैदान में उतर रहा है.. इन सबके मन में लाखों रूपये की नौकरी और अच्छा खासा कम छोड़कर लोगों की सेवा करने की भावना जागृत हो गयी है. ऐसे में आज हम आपको कुछ युवाओं के बारे में बताने जा रहे हैं जो अच्छी खासी नौकरी छोड़कर चुनावी मौदान में उतर गये हैं.

नौक्षम चौधरी लंदन में पब्लिक रिलेशन की 1 करोड़ रुपए की नौकरी छोड़कर वापस आई हैं और हरियाणा के सबसे पिछड़े जिलों में से एक मेवात के पुन्हाना विधानसभा में चुनाव लड़ने उतरी हैं. पिता रिटायर जज और माँ अधिकारी हैं. मिरांडा हाउस कॉलेज में छात्र संघ नेता रही नौक्षम ने अगस्त में ही भाजपा की सदस्यता ली थी..और अब वे चुनाव लड़ रही हैं. टिकट पाकर नौक्षम से सबको चौंका दिया.. मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान कम समय में अच्छी-खासी भीड़ जुटाकर नौक्षम ने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे.
 … झज्जर में भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ रहे डॉ. राकेश कुमार… राकेश कुमार डिप्टी सिविल सर्जन से वीआरएस लेकर राजनीति में आए हैं. 2 महीने पहले ही उन्होंने वीआरएस लिया और आरएसएस से जुड़ाव की वजह से उन्हें चुनाव लड़ने का मौका भी मिल गया. हालांकि ये पहला मौका नही है जब डॉ. राकेश ने चुनाव लड़ने की कोशिश की हो..पिछली बार भी चुनाव लड़ने का प्रयास किया था लेकिन उन्हें वीआरएस नहीं मिल पाया था. डा. राकेश की टक्कर झज्जर से कांग्रेस की मौजूदा विधायक गीता भुक्कल से है.

Nauksham-chaudhary

 योगेश्वर दत्त और बबीता फोगाट को तो आप जानते हो होंगे.. इन्होने ने भी बीजेपी ज्वाइन कर ली है. दोनों के बीजेपी में आने से लोग चौक जरूर गये थे.. आपको बता दें कि योगेश्वर दत्त ने डीएसपी की नौकरी छोड़कर राजनीति में आये हैं और चुनाव लड़ने जा रहे हैं.. वहीँ बबीता फौगाट ने सबइंस्पेक्टर की नौकरी छोड़कर राजनीति करने जा रही हैं..

वहीँ बल्लभगढ़ से विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे अरुण बीसला पेटीएम से इंजीनियर की नौकरी छोड़कर आए हैं.. आर्मी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग से इंजीनियरिंग ग्रेजुएट अरुण की अच्छी खासी तनख्वाह थी. लाखों रूपये की नौकरी छोड़कर आये अरुण के दादा जी भी राजनीति में रह चुके हैं. उनका कहना है कि अपने दादा की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने राजनीति में आये हैं. आपको बता दें कि अरुण बीसला को बहुजन समाजपार्टी से टिकट मिल गया है.

वहीँ जननायक जनता पार्टी की तरफ लाडवा सीट से चुनाव लड़ रही डॉ. संतोष दहिया कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में बतौर लेक्चरर कार्यरत हैं. ऑन लीव होकर वे चुनाव लड़ रही हैं. वॉलीबाल की अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी दहिया ने 1991 में कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी में नौकरी ज्वाइन की थी.

तो देखा आपने इन लोगों ने अपनी अच्छी खासी नौकरी, विदेशों की नौकरी छोड़कर राजनीति में आ गए हैं.. इसके पीछे कुछ बड़े कारण जरूर होंगे हो सकता है इनका मन अब नौकरी से हट कर समाजसेवा की तरफ परिवर्तित हो गया हो.. आपको क्या कारण नजर आते हैं हमें कम्मेंट करके जरूर बताइए.